उग्रवाद की गोद में विकास की पहल

Submitted by Hindi on Tue, 02/22/2011 - 13:37
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लगभग सत्ताइस साल पहले चार सामाजिक कार्यकर्ताओं ने नेतरहाट के वीरान इलाके बिशुनपुर में आदिवासियों के बीच विकास का अलख जगाना शुरू किया। आज वह प्रयास जादू की तरह अपना असर दिखा रहा है। उग्रवाद से गंभीर रूप से ग्रसित जिन इलाकों में पुलिस भी नहीं घुसती वहाँ भी इस संस्था की सहज पहुँच है।

झारखंड विधानसभा से सेवानिवृत्त होने के बाद विकास भारती से जुड़कर सामाजिक विकास में योगदान कर रहे अयोध्यानाथ मिश्र बताते हैं कि झारखंड में ऐसी संस्थाओं के प्रयासों की बेहद आवश्यकता है।विकास भारती की स्थापना 1983 में अशोक भगत, डॉ. महेश शर्मा, रजनीश अरोड़ा और स्वर्गीय डॉ. राकेश पोपली की पहल पर हुई थी। विकास भारती के वर्तमान सचिव अशोक भगत बिशनपुर के आदिवासी समुदाय के बीच कार्य करने के मिशन के साथ आए थे। उन्होंने क्षेत्र का सर्वेक्षण किया तो महसूस किया कि इस समुदाय के बीच कार्य करने के मिशन के साथ आए थे।

उन्होंने क्षेत्र का सर्वेक्षण किया तो महसूस किया कि इस समुदाय के समुचित विकास के लिए अलग किस्म के प्रयासों की जरूरत है। नेतरहाट के तल पर बसा यह प्रखंड पूरी तरह वीरान, सुप्त और उजाड़ था। जादू-टोना, टोटका, डायन-बिसाही, गैरकानूनी भूमि दखल की एक पूरी दुनिया आबाद थी। विकास के नाम पर तब यहाँ अँगरेजों के जमाने की मात्र एक पक्की सड़क थी।

जिस समय भगत यहाँ आए, उस दौर में जमींदार तेजी से आदिवासियों की जमीन हड़प रहे थे। आदिवासी समुदाय अपने परंपरागत धंधे कृषि, कारीगरी, ग्रामीण कला एवं शिल्प से दूर होते जा रहे थे।

उनके 27 वर्षों की अनवरत मेहनत रंग लाई है। विकास भारती ने आज आदिवासियों में शिक्षा, अधिकार, सजगता, मानसिक ताकत एवं जागरूकता बढ़ा दी है। जागरूकता का नतीजा है कि अब ग्राम स्वराज की माँग होने लगी है। विकास भारती ने आज झारखंड के 2000 गाँव में अपना कार्य फैला लिया है। विकास भारती आदिवासी समुदाय के अंदर आत्मविश्वास कायम करने के‍ लिए और अपने लक्ष्य समुदाय, समूहों एवं व्यक्तियों को क्षमतावान बनाने के लिए कार्य करता है।

किसी भी समुदाय के सशक्तीकरण के लिए शिक्षा सबसे शक्तिशाली साधन है। इसे देखते हुए विकास भारती ने समाज के वंचितों के तीन समूह अनाथ, विकलांग एवं वंचित अथवा क्षितिजों की शिक्षा के लिए विशेष बल दिया है। अनाथ बच्चों के लिए बने श्रम निकेतन में आवासीय व्यवस्था में सभी मूलभूत सुविधाओं के साथ सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक शिक्षा दी जाती है। संस्था में शक्तिमान केंद्र हैं जो विकलांग बच्चों की विशेष आवश्यकताओं का प्रबंध करता है। प्राथमिक शिक्षा एवं व्यावसायिक कौशल प्रशिक्षण प्रदान करने के अतिरिक्त विकास भारती इन बच्चों को झारखंड के ख्‍याति प्राप्त चिकित्सालयों में अस्थि चिकित्सा हेतु वित्तीय एवं भावनात्मक सहयोग भी प्रदान करता है।

ऐसे बच्चों तक पहुँचने के लिए जो दूरस्थता के कारण या अपने माता-पिता की आजीविका हेतु किए जाने वाले संघर्ष के कारण शिक्षा को बीच में ही छोड़ देते हैं, विकास भारतीय सर्व शिक्षा अभियान में शामिल होकर राज्य के उन दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों को शिक्षित करने का कार्य कर रहा है।

श्रम निकेतन, कोयलेश्वर नाथ विद्या मंदिर, जतरा टाना भगत विद्या मंदिर पास के ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों के लिए उत्कृष्ट केंद्र साबित हुए हैं। ऐसे केंद्र औपचारिक विद्यालयों से विविध कारणों से शिक्षा-वंचित बच्चों को भी आच्छादित करते हैं। शबरी आश्रम, निवेदिता आश्रम, टैगोर आश्रम, वाल्मीकि आश्रम, विश्वकर्मा आश्रम, एकलव्य आश्रम जैसे नौ आश्रमों में 12 जनजातियों के सैकड़ों बच्चे प्रशिक्षण ले रहे हैं।

सैद्धांतिक और गैर-सैद्धांतिक शिक्षा प्रदान करने हेतु औपचारिक विद्यालयों और आश्रमों के संचालन के अलावा विकास भारती सर्व शिक्षा अभियान की साझेदारी में प्राथमिक स्तर पर इन बालिकाओं के लिए शिक्षा के राष्ट्रीय कार्यक्रम -एनपीइजीइएल जो भारत सरकार का दुर्गम स्थलों में रहने वाली बालिकाओं तक पहुँचने का एक केंद्रीभूत कार्यक्रम का संचालन कर रहा है। जिन गाँवों में आँगनबाड़ी केंद्र नहीं हैं, वहाँ के बच्चों को बालपन केंद्रों के जरिये पूर्ण विद्यालयी शिक्षा देने का काम किया जा रहा है। इसके तहत अब तक 2187 बच्चों को लाभान्वित किया जा चुका है।

झारखंड विधानसभा से सेवानिवृत्त होने के बाद विकास भारती से जुड़कर सामाजिक विकास में योगदान कर रहे अयोध्यानाथ मिश्र बताते हैं कि झारखंड में ऐसी संस्थाओं के प्रयासों की बेहद आवश्यकता है। विकास भारती और इससे संबंधित संगठनों ने झारखंड के युवाओं के क्षमता विकास के लिए मुख्‍य रूप से तीन कार्यक्रम चला रखे हैं।

जनशिक्षण संस्थान, तकनीकी संसाधन केंद्र और ग्रामीण युवा ज्योति। जनशिक्षण संस्थान कार्यक्रम भारत सरकार की योजना है। इसके तहत गरीबों, निरक्षर, नवसाक्षर, अभिवंचितों और दुर्गम क्षेत्रों के लोगों, विशेषकर 15-35 आयु वर्ग के लोगों को केंद्र में रखते हुए व्यावसायिक शिक्षा प्रदान की जाती है। यह संस्थान इस अर्थ में खास है कि यह केवल कौशल विकास का ही कार्य नहीं करता बल्कि साक्षरता को व्यावसायिक कौशल से जोड़ने और लोगों को समृद्धात्मक शिक्षा बहुतायत मात्रा में प्रदान करते हैं।

1985 में स्थापित ग्रामीण तकनीक केंद्र का उद्देश्य देशज तकनीक कला, शिल्प को संवर्द्धित एवं संरक्षण करना तथा ग्रामीण समुदाय को उद्यमिता विकास के विविध कौशलों पर प्रशिक्षण देना भी है। ग्रामीण युवा ज्योति योजना केवल व्यावसायिक कौशल प्रदान करने मा‍त्र के लिए नहीं है बल्कि जीवन कौशल, व्यक्तित्व विकास हेतु सुझाव और सूचना प्रदान करने का भी कार्य करता है।

एनआरएचएम और झारखंड सरकार के सहयोग से वर्ष 2007 में शुरू की गई यह योजना राज्य के 24 जिलों में चल रही है। इसके द्वारा राज्य सरकार द्वारा अधिसूचित दुर्गम क्षेत्रों में स्वास्थ्‍य शिविरों का प्रबंध किया जाता है। ग्रामीण समुदाय के दरवाजे पर प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा मुहैया कराने की इस योजना के तहत अब तक 6336 शिविर आयोजित किए जा चुके हैं। इससे 862779 रोगियों ने लाभ उठाया है। चलत मोबाइल मेडिकल गाड़ी जिसमें विभिन्न तरह की जाँच सुविधा जैसे एक्स-रे, पैथोलॉजी आदि की सुविधा होती है, डॉक्टरों-विशेषज्ञों के साथ गाँव-गाँव भेजे जाते हैं। इसी तरह 2006 में शुरू किए गए चलंत पंचायत स्वास्थ्‍य कार्यकर्ता या एमपीएचडब्ल्यू के द्वारा अब तक 12 हजार 643 ग्रामीण रोगी लाभान्वित हो चुके हैं। विकास भारती के द्वारा लोगों को साफ-सफाई के प्रति सजग बनाने के लिए स्वच्छता परियोजना और संपूर्ण स्वच्छता अभियान भी चलाए जाते हैं।

कृषि क्षेत्र में राज्य को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र, बीज ग्राम, किसान क्लब, राष्ट्रीय बागवानी मिशन, मेसो प्रोटोटाइप जैसी योजनाएँ सफलतापूर्वक चलाई जा रही हैं। स्वयं सहायता समूह, महिला उद्योग, ग्राम तकनीकी, ग्रामीण युवा ज्योति, अंबेडकर हस्तशिल्प योजना, स्वावलंबन धारा और अन्य कार्यक्रमों के द्वारा जरूरतमंदों को आत्मनिर्भर बनाने पर काम हो रहा है।

पर्यावरण संरक्षण के संदर्भ में समाज को जागरूक करने के लिए विकास भारती ने वर्ष 2008-09 में वन, पानी, स्वास्थ्‍य-जन पहल प्रेरणा और नदी बचाओ, पारिस्थितिकी बचाओ अभियान शुरू किया। नदियों के विषय में धार्मिक भावना पैदा करने हेतु दो वर्ष पूर्व एक राज्यव्यापी गंगा दशहरा उत्सव का आयोजन किया गया। इसे 125 प्रखंडों में चलाया गया। राँची जिले में हरमू नदी का पूजन किया गया। नागरिकों ने अनुभव किया कि वह दिन दूर नहीं जब राँची शहर की जीवन रेखा समाज के कुछ प्रभावकारी परिवारों के निहित स्वार्थों के चलते समाप्त हो जाएगी।

'हरमू नदी बचाओ आंदोलन समिति' का गठन किया गया। नतीजा यह हुआ कि हरमू को बचाने के लिए प्रशासन के साथ-साथ समाज का हर तबका सामने आ गया। बरियातू स्थित विकास भारती के आरोग्य भवन में 30 प्रकार के विभिन्न व्यावसायिक पाठ्‍यक्रम चलाए जाते हैं। 15 दिनों से लेकर छह माह तक चलने वाले पाठ्‍यक्रमों की समाप्ति के बाद प्रशिक्षितों का एक स्वयं सहायता समूह बनाकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। इसके अलावा आरोग्य भवन केंद्र से इस वर्ष से प्रबंधन पाठ्‍यक्रम की व्यवस्‍था उपलब्ध कराए जाने की कोशिश की जा रही है।

अशोक भगत कहते हैं कि राज्य में नक्सली समस्या कभी भी हमारे लिए बाधक नहीं बनी। हम जिस भावना के साथ कार्य करते हैं, उसके लिए किसी के साथ टकराहट की कोई गुंजाइश ही नहीं रहती। हमारा उद्देश्य निजी लाभ के लिए संसाधन जुटाना नहीं है। निजी हित से ऊपर उठकर जब भी कोई व्यक्ति, संस्था कार्य करेगी, किसी भी तरह की मुश्किलें उसका रास्ता नहीं रोकेंगी।
 

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http://hindi.webdunia.com
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