ठंडे पेयों में कीटनाशकों के मामले पर संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की रिपोर्ट

Submitted by Hindi on Wed, 03/09/2011 - 14:43
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भूमिका


संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) गठन की पृष्ठभूमिः दिल्ली की एक गैर सरकारी संस्था- सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) ने ठंडे पेयों में कीटनाशकों जैसे डीडीटी, बीएचएस, लिन्डेन, क्लोरोपायरीफॉस, मेलाथियान आदि के अवशेष पर अध्ययन करके अपने विश्लेषण की रिपोर्ट 5 अगस्त 2003 को सार्वजनिक की। इस रिपोर्ट को इलेक्ट्रानिक और प्रिंट मीडिया ने बड़ी सुर्खियों में पेश किया। आम जनता पर इस रिपोर्ट का भारी असर हुआ, देश में जगह-जगह पेप्सी-कोक के खिलाफ प्रदर्शन हुए, उनकी बोतलें तोड़ी गयी। रिपोर्ट में कहा गया कि दिल्ली के खुले बाजार में खरीदे गये ठंडे पेयों के 12 ब्राण्ड के नमूनों में कीटनाशक अवशेष पाये गये। यह मामला 6 अगस्त 2003 को लोकसभा में भी उठाया गया। ठंडे पेयों में कीटनाशक पाये जाने पर सदस्यों ने गम्भीर चिन्ता प्रकट की और सरकार से तथ्यों की जानकारी प्राप्त करने के बाद वक्तव्य पेश करने का निवेदन किया। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री ने ऐसा करने का आश्वासन दिया।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री ने ठंडे पेयों की स्वतंत्र जांच भारत सरकार की दो सबसे अधिक सम्मानित प्रयोगशाला- नेशनल फूड लेबोरेटरीज, कोलकाता और नेशनल फूड टेक्नोलॉजी रिसर्च सेंटर, मैसूर से कराई और उनकी जांच से प्राप्त नतीजों को उजागर करते हुए मंत्री ने 21 अगस्त 2003 को लोकसभा में बताया कि कुछ नमूनों में प्राप्त कीटनाशक अवशेष यूरोपीय संघ के मानकों से काफी नीचे हैं और कुछ अन्य नमूनों में यूरोपीय संघ की सीमा से कुछ गुने ज्यादा हैं। मंत्री महोदय ने कहा भारत के खाद्य मिलावट निरोधक कानून (पीएफए) 1954 द्वारा निर्धारित मानकों के काफी अन्दर हैं। इस वक्तव्य से लोकसभा के सदस्य सन्तुष्ट नहीं हुए और उन्होंने जेपीसी गठित करने की मांग की। सदन ने फलतः जेपीसी का गठन किया जिसे दो मुद्दों पर रिपोर्ट देने को कहा गया।

जेपीसी की जांच के मुद्देः


1. क्या ठंडे पेयों में कीटनाशक अवशेषों पर सीएसई की ताजी खोज सही है या नही?
2. ठंडे पेयों, फल के रसों और पानी का मुफ्त इस्तेमाल करने वाले पेयों में उपयुक्त सुरक्षा मानकों को तैयार करने के लिए निकषों का सुझाव देना।

जेपीसी के सदस्यः 22 अगस्त 2004 को निम्नलिखित सदस्यों की समिति गठित हुई-

लोकसभा के सदस्यः


1. श्री शरद पवार (चेयरमैन)
2. श्री अनन्त कुमार
3. श्री अनिल बसु
4. श्री अवतार सिंह भडाना
5. श्री रमेश चेन्नथीला
6. डॉ. रंजीत कुमार पांजा
7. श्री ई. अहमद
8. श्री अखिलेश यादव
9. डॉ. (श्रीमती) सुधा यादव
10. श्री के. वेरन्नाइडू

राज्यसभा के सदस्य


11. श्री एस.एस. अहलूवालिया
12. श्री पृथ्वीराज चैहान
13. श्री प्रशान्त चटर्जी
14. श्री प्रेमचन्द्र गुप्त
15. श्री संजय निरूपम

समिति की कुल 17 बैठकें हुई। समिति ने 8 मंत्रालयों, सीएसआईआर, कोलकाता और मैसूर की प्रयोगशालाओं, आईसीएमआर, नेशनल एक्रीडीशन बोर्ड फॉर टेस्टिंग एण्ड केलीब्रेशन लेबोरेटरीज, एग्रीकल्चर एण्ड प्रोसेस्ड फूड प्रॉडक्ट्स, एक्सपोर्ट डेवलपमेंट अथॉरिटी के प्रतिनिधियों के साक्ष्य लिये। समिति ने सीएसई, पेप्सीकोला, कोकाकोला कंपनियों के साक्ष्य लिये तथा एसोचैम, फिक्की, एसोसिएशन आॅफ इंडियन बॉटल्ड वाटर मैन्यूफैक्चरर्स, आल इंडिया फूड प्रोसेसर्स एसोसिएशन के प्रतिनिधियों के विचार सुने तथा कई विशिष्टजनों को भी साक्ष्य देने के लिए बुलाया। 22 जनवरी 2004 को समिति ने अपनी रिपोर्ट का अन्तिम ड्राफ्ट मंजूर किया और 5 फरवरी 2004 को संसद को रिपोर्ट सौंप दी।

ठंडे पेयों में कीटनाशकों के मामले पर संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) की रिपोर्ट पूरा पढ़ने के लिए नीचे दिए गए पीडीएफ फाईल को डाउनलोड करें

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