पेप्सी-कोक का आर्थिक साम्राज्य

Submitted by Hindi on Thu, 03/10/2011 - 11:56

इन्हें स्कूल की कैण्टीन से बाहर करें, खेलकूद के मैदान से और बस अड्डों से बाहर करें। छतरियों, कुर्सियों, दुकानों की दीवारों, टी शर्टों और हार्डिंग्स से इन्हें बाहर करें। वैश्विक गाँव में वैश्विक उपनिवेशवादियों के चंगुल में भारत को नहीं फँसने देना है। दुनिया के स्तर पर परिवर्तन बहुत तेजी से हुआ है। राष्ट्र कमजोर हुए हैं, बाजार मजबूत हुआ है। बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ वैश्विक ताकत हैं। दुनिया में नई गुलामी की तानाशाह यही हैं। तथ्यों में बात यह है कि दुनिया की 100 सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से 51 बहुराष्ट्रीय कम्पनियाँ हैं, शेष 49 देश हैं। 12 नम्बर की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाली कम्पनी ‘वालमार्ट’ इजराइल, पोलैण्ड सहित 161 देशों की सम्मिलित अर्थव्यवस्था से कहीं ज्यादा बड़ी हैं। मित्सुबिसी की सालाना कारोबार धरती के चैथे बड़े आबादी वाले देश इंडोनेशिया से ज्यादा बड़ी है। मित्सुई और जनरल मोटर्स की वार्षिक कारोबार डेनमार्क, पुर्तगाल और तुर्की जैसे देशों के मिले जुले वार्षिक सकल घरेलू उत्पाद से 50 अरब अमरीकी डॉलर ज्यादा है। फोर्ड कम्पनी दक्षिण अफ्रीका से और टोयोटा नार्वे से बड़ी है। फिलिप मोरिस कम्पनी न्यूजीलैण्ड की अर्थव्यवस्था से भी बड़ी है और इसके कामकाज का दायरा 170 देशों में फैला हुआ है।

200 विशालकाय बहुराष्ट्रीय कम्पनियां, जिनमें से ज्यादातर कई-कई राष्ट्रीय अर्थव्यवस्थाओं से भी बड़ी हैं, अब दुनिया की एक चैथाई से भी ज्यादा आर्थिक गतिविधियों को नियंत्रित करती हैं। अमरीका की दो कंपनियां पेप्सी-कोकाकोला की दुनिया की इन 200 बहुराष्ट्रीय कम्पनियों में हैसियत है। दोनों का कारोबार दुनिया के 180-190 देशों में फैला हुआ है। 5 लाख करोड़ रुपये के करीब का वार्षिक कारोबार है इनका। कोकाकोला की प्रतिदिन 1 अरब बोतल उपभोगताओं तक पहुंच रखती है, पेप्सी की भी पहुँच है इसके आस-पास। 1997 की कोकाकोला की वार्षिक कारोबार रिपोर्ट के अनुसार ‘इस साल हम भले ही 1 अरब बोतलें बेचते हों, दुनिया अभी भी अन्य पेयों की 47 अरब बोतलें उपयोग कर रही है। हम तो अभी शुरुआत भर कर रहे हैं।’

 

 

विश्व विजय का सपना


एशिया और यूरोप को रौंद डालने के बावजूद मंगोलिया का चंगेज खाँ जिस विश्व विजय का सपना तलवार के बल पर पूरा नहीं कर पाया उसे पूरा कर दिखाया है अमरीका की कम्पनी पेप्सी और कोक ने और वह भी तलवार की नोंक से नहीं, ठंडे पेय की बोतलों से। इस समय दुनिया के 190 देशों में पेप्सीकोला का वितरण होता है। यों तो यह कम्पनी खाद्य प्रसंस्करण (फूड प्रोसेसिंग) में भी काम करती है, पर इसका मुख्य कारोबार ठंडे पेय का ही है।

विश्व विजय के आखिरी मुकाम तक पहुँचने के लिए पेप्सी ने ऐसा कोई तरीका नहीं, जो अपनाया न हो। प्यास मनुष्य की सहज प्राकृतिक जरूरत है। इसके सहारे अपना व्यापारिक साम्राज्य खड़ा करने की पेप्सी की प्यास बढ़ती ही जा रही है। आम लोगों के सम्मोहन के लिए इसने क्या-क्या नहीं किया हैः अन्तरराष्ट्रीय खेलों का प्रायोजन, नामी फिल्मी हस्तियों, खिलाड़ियों द्वारा विज्ञापन और सीरियल। पर नाच, गाना, खेलना ही पेप्सी का हथियार नहीं हैं, इसका इतिहास हत्याओं, धोखाधड़ी, छल-फरेबी, जालसाजी जैसे अपराधों से भरा पड़ा है।

अमरीका में गृहयुद्ध के बाद 1860 और 1870 के दशकों में अमरीकी, खासतौर से दक्षिण प्रदेशों के अमरीकी टूट गये थे। मानसिक रोग, चिड़चिड़ापन, हिस्टीरिया, अपराधबोध, सिरदर्द, शराबखोरी और नपुंसकता जैसी बीमारियाँ अमरीकी समाज में फैल रही थी। कुछ नीम हकीमों ने इसका फायदा उठाया। उत्तरी कारोलिना के कैलब ब्रैढम नामक फार्मासिस्ट ने डिप्रेशन को ठीक करने के लिए 1898 में पेप्सीकोला बनाना शुरू किया। पहले और दूसरे महायुद्ध में चीनी के दाम बहुत बढ़ जाने से उत्पन्न समस्या से कंपनी की दशा बिगड़ गयी, पर इस कम्पनी ने विज्ञापन के सारे हथकण्डे अपनाकर अपने को फिर से खड़ा कर लिया और 1959 के आते-आते कम्पनी का मुनाफा सात सौ प्रतिशत पहुँच गया। प्रतिद्वन्द्वी कम्पनी कोक ने कोला पेय को पाँच सौ साल पुराने अमरीकी राष्ट्र की देशभक्ति से अपने को जोड़ा और अमरीकी विकास और संस्कृति के प्रतीक के रूप में अपने को उजागर किया, खूब लाभ उठाया और अमरीकी प्रभाव को दुनिया में फैलाने में मदद भी की है। दरअसल पेप्सीकोला और कोकाकोला को आधुनिकता के प्रतीक बनाने में इन कम्पनियों ने भारी धनराशि खर्च की और अकूत धनराशि कमाई। दुनिया के नब्बे प्रतिशत से अधिक ठण्डे पेय पर कब्जा करके ‘कारपोरेट उपनिवेशवाद’ को कायम करने में इन कम्पनियों की अहम् भूमिका रही है।

जरूरी है कि उपनिवेशवाद के इस नए स्वरूप, गुलामी के नए संस्करण को समझने की जरूरत है। यह भी तय करना होगा कि पेप्सी, कोक के विश्व विजय अभियान को कैसे रोका जाय। इन्हें स्कूल की कैण्टीन से बाहर करें, खेलकूद के मैदान से और बस अड्डों से बाहर करें। छतरियों, कुर्सियों, दुकानों की दीवारों, टी शर्टों और हार्डिंग्स से इन्हें बाहर करें। वैश्विक गाँव में वैश्विक उपनिवेशवादियों के चंगुल में भारत को नहीं फँसने देना है।

 

 

 

 

कहां क्या है

 

 

 

पेप्सी-कोक का कच्चा चिट्ठा


1. पेप्सी-कोक का आर्थिक साम्राज्य
2. दुनिया भर में पेप्सी-कोक के काले कारनामे
3. पेप्सी-कोक के सभी वादे झूठे
असेहत बनाम पेप्सी-कोक
4. सेहत के दुश्मन हैं पेप्सी-कोक
5. सेहत के साथी देसी पेय
6. जे.पी.सी. की रिपोर्ट
‘पेप्सी-कोकः भारत छोड़ो’ अभियान
7. पेप्सी-कोक से मुक्ति; आजादी की नई लड़ाई का पहला कदम
8. पेप्सी-कोक, भारत छोड़ो, देशव्यापी एक्शन प्लान
9. भारत में कहाँ-कहाँ पेप्सी कोक प्लांट हैं ( नक्शा )
10. पेप्सी-कोक के खिलाफ देश के कोने-कोने में संघर्ष
11. 20 जनवरी 2005 को पेप्सी-कोक के खिलाफ बनी मानव श्रृखलाएं एवं लगी जन अदालत की रिपोर्ट
12. अखबारों से
13. देश भर के महत्वपूर्ण सम्पर्क सूत्र

इन सभी कहानियों को पढ़ने के लिए नीचे दिए गए पीडीएफ फाईल डाउनलोड करें

 

 

 

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केसर सिंहकेसर सिंहपानी और पर्यावरण से जुड़े जन सरोकार के मुद्दों पर उल्लेखनीय कार्य करने वाले वरिष्ठ पत्रकारों में शुमार केसर सिंह एक चर्चित शख्सियत हैं। इस क्षेत्र में काम करने वाली कई नामचीन संस्थाओं से जुड़े होने के साथ ही ये बहुचर्चित ‘इण्डिया वाटर पोर्टल हिन्दी’ के प्रमुख सम्पादक हैं।

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