पटियाला में सीवेज पानी से खेत की सिंचाई

Submitted by minakshi on Sun, 10/11/2009 - 17:27
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Source
राणा रणधीर, June 28, 2009

पटियाला. पटियाला के आस-पास के दर्जनों किसानों को तो शायद इसका अहसास भी नहीं है कि वो अपने बच्चों को रोटी नहीं, बल्कि ऐसा मीठा जहर दे रहे हैं, जो उन्हें जिंदगी भर के लिए अपाहिज बना सकता है। पटियाला शहर के पूरा सीवरेज सिस्टम जिस नाले में जाकर गिरता है, उसका मेन डिस्पोजल गांव मैण के पास बनाया गया है, यानि गांव मैण तक यह गंदा नाला खुला है।

इसमें सीवरेज का गंद गिरने के अलावा रास्ते में पड़ती कई फैक्ट्रियों के रासायनिक पदार्थ भी गिरते है। आस-पास के दर्जनों गांवों के सैकड़ों किसानों ने इस गंदे नाले में अपने पाइप लगा लिए हैं और इस गंदे नाले के जहरनुमा पानी से अपने खेतों को सींचने में लगे हैं। अब कहने को तो यह सिंचाई का सस्ता साधन और वेस्टेज पानी का सही उपयोग है, लेकिन वास्तव में यह कितनी बीमारियों को निमंत्रण दे रहे हैं, इसका अंदाजा आम आदमी शायद सहजता से लगा नहीं सकता है।

यही कारण है कि वातावरण विशेषज्ञों के कहने के बावजूद आज भी इन पाइपों से धड़ल्ले से सिंचाई हो रही है। वातावरण विशेषज्ञों ने इस बात को कई बार साबित भी कर दिया है कि दूषित पानी से होने वाली सिंचाई से हैवी मेटल काफी मात्रा में शरीर के अंदर चले जाते हैं, जो मानवीय शरीर के लिए काफी खतरनाक साबित हो सकते हैं। सीवरेज और दूषित पानी से हो रही इस सिंचाई से उपजाऊ भूमि और ग्राउंड वाटर दूषित हो रहा है।

राजिंदरा अस्पताल ने भी की है रिसर्च : पटियाला से निकलने वाले सीवरेज के पानी से हो रही सिंचाई से दर्जन से ज्यादा गांव प्रभावित हो रहे हैं। इनमें सूलर, मैण, शेर माजरा, डरोली, लगडोई, गाजेवास प्रमुख हैं। सूलर के पास पटियाला शहर का मेन सीवरेज का डिस्पोजल होने के चलते यहां कई हैरानीजनक तथ्य पहले भी सामने आ चुके हैं।

सरकारी राजिंदरा अस्पताल के न्यूरोलोजी विभाग की ओर से मिर्गी की बीमारी को लेकर की गई रिसर्च में भी सबसे ज्यादा मरीज इसी बेल्ट से सामने आए थे। इसके अलावा इस इलाके के लोगों में पेट, जिगर अन्य बीमारियों का ग्राफ भी अन्य क्षेत्रों से ज्यादा रहा है।

इन गांवों के अलावा पटियाला शहर की बात करें तो बड़ी नदी के पास का क्षेत्र जो सरहिंद बाईपास से लेकर हीरा बाग, गोबिंद नगर और राजपुरा रोड़ के पास लगता इलाका इसी चपेट में है, बड़ी नदी के पास लगते इलाके में मथुरा कालोनी, जगदीश कालोनी, सनौरी अड्डा क्षेत्र भी आता है।

सरहिंद बाईपास से लेकर राजपुरा रोड़ तक बड़ी नदी के साथ सैकड़ों बीघे जमीन को यहां लगे ट्यूबवेलों से सींचा जा रहा है, जो लगातार दूषित पानी की सप्लाई कर रहे हैं। इससे सींचे खेतों में हुई फसल के साथ हैवी मैटल शरीर में जाकर कई तरह की बीमारियों बुलाता है।

सही नहीं है मैटल
पटियाला मेडिकल व स्मॉल स्केल इंडस्ट्री के लिहाज से काफी बड़ा शहर है। यो यहां के सीवरेज में आरसेनिक, मर्करी, लेड के कम्पाउंड का होना स्वाभाविक है। पटियाला में ऐसा कोई ट्रीटमेंट प्लांट नहीं लगा जहां से पानी को क्योर किया जाता हो। इस पानी से पैदा होने वाली सब्जियों में यह हैवी मैटल शरीर के अंदर चला जाता है, जो शरीर के लिए सही नहीं है। -सुरिन्दर जिंदल, जिला-कोआर्डीनेटर्स भारतीय ज्ञान-विज्ञान समिति, पंजाब

जमीन हो सकती है बंजर
किसानों को मैं एक बात बता देना चाहता हूं कि इस सीवरेज वाले पानी में हैवी मैटल के साथ-साथ कई तरह के साल्टस भी होते हैं, जो उनकी जमीन को बंजर बना सकते हैं। पौधा सजीव है और अगर आप उसे जहर दे रहे हैं तो आप कितने दिन यह आशा करेंगे कि वो जीवित रहे। -डा. बलविंदरपाल सिंह सोहल, चीफ एग्रीकल्चर अफसर, पटियाला

सेहत के लिए हानिकारक
हैवी मैटल वाला पानी को सेहत के लिए हानिकारक है ही, इससे लीवर, पेट की बहुत सी खतरनाक बीमारियां लग सकती हैं। तुरंत समाधान ढूंढने की जरूरत है। -बीएल, एमडी मेडिसन, राजिंदरा अस्पताल
 
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