हिमाचल में एन्वायरनमेंट साइंस में संभावनायें

Submitted by Hindi on Tue, 03/22/2011 - 09:20
Source
दिव्य हिमाचल, 26 दिसंबर 2010

पर्यावरण विज्ञान के क्षेत्र में एक एन्वायरनमेंटल साइंटिस्ट 12000 से 18000 रुपए प्रति महीना वेतनमान प्राप्त कर सकता है। बीई डिग्री प्राप्त किए हुए एन्वायरनमेंटल इंजीनियर्स 15000 से 30000 रुपए प्रति महीना वेतनमान प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा पीएचडी किए हुए छात्र 50000 से 75000 रुपए प्रति महीना वेतनमान पाता है। हिमाचल में नौणी विश्वविद्यालय में पांच या दस सीटें पर्यावरण विज्ञान के कोर्सों के लिए रखी जाती हैं, जो हर साल यूनिवर्सिटी की अकादमिक काउंसिल द्वारा तय की जाती हैं…

पृथ्वी में पर्यावरण जीवन का एक साधन है। यह हमें खाना, कपड़े, शैल्टर और दूसरी भी कई प्रकार की जीवन से संबंधित चीजें जैसे पानी, हवा, सूर्य की रोशनी इत्यादि प्रदान करता है। औद्योगिकीकरण और शहरीकरण की वृद्धि के कारण पर्यावरण के प्राकृतिक बैलेंस में रुकावटें पैदा हो गई हैं, जिसके परिणामस्वरूप विकास की प्रक्रिया धीमी पड़ गई है। इसका दुष्परिणाम यह है कि लोग इसे महसूस नहीं कर पा रहे हैं, जिस कारण पर्यावरण के जानकार भारत में बहुत कम हैं। पर्यावरण साइंस में पर्यावरण से संबंधित समस्याओं, खासतौर से जो प्रदूषण से जुड़ी हुई हैं, के बारे में शिक्षा दी जाती है। इस क्षेत्र में कार्य करने वाला एन्वायरनमेंटलिस्ट एक ऐसा व्यक्ति होता है, जो पर्यावरण से संबंधित समस्याओं और प्रदूषण से होने वाले प्रभावों के बारे में जानकारी रखता है और उन्हें दूर करने की कोशिश करता है। पर्यावरण साइंस में छात्रों को एन्वायरनमेंटल साइंस के बारे में बताया जाता है और भविष्य में उन्हें दूर करने के उपायों के बारे में शिक्षा प्रदान की जाती है। अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियां, राष्ट्रीय सरकारें, उद्योग और एमएनसी इत्यादि अपने काम के लिए इको फ्रेंडली प्रैक्टिसेज अडॉप्ट करने की कोशिश कर रही हैं। इसके अलावा रिसर्च इंस्टीच्यूट्स भी नए एन्वायरनमेंटल फ्रेंडली मैथड्स और टेक्नोलाजीस का विकास करने की कोशिश कर रही हैं। इसलिए इस क्षेत्र में पर्यावरण विज्ञानियों को रोजगार के ढेरों अवसर प्राप्त हो सकते हैं।

कोर्सेज — भारत में कई सरकारी और निजी संस्थानों द्वारा पर्यावरण विज्ञान से संबंधित शिक्षा दी जाती है। कई विश्वविद्यालयों द्वारा इससे संबंधित अंडर ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स करवाए जाते हैं। पर्यावरण विज्ञान में कैरियर इस विषय में बीएससी या बीई डिग्री के साथ शुरू होता है। पर्यावरण में बीएससी कोर्स के लिए कम से कम शैक्षणिक योग्यता साइंस विषय के साथ बारहवीं है। इस कोर्स की अवधि तीन साल की है। पर्यावरण विज्ञान में एमएससी डिग्री के लिए कोर्स की अवधि दो साल की है और इस कोर्स में प्रवेश पाने के लिए छात्र का बीएससी (पर्यावरण विज्ञान) में पास होना आवश्यक होता है। कुछ तकनीकी संस्थानों द्वारा पर्यावरण विज्ञान में एमटेक कोर्स भी करवाया जाता है, जिसकी अवधि दो साल होती है और इसमें केवल बीई और बीटेक किए हुए छात्र ही प्रवेश पा सकते हैं। इसके अलावा पर्यावरण विज्ञान और एन्वायरनमेंटल मैनेजमेंट में शॉर्ट टर्म पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा कोर्स भी करवाए जाते हैं। इसके साथ ही आप इस क्षेत्र में एमफिल और पीएचडी कोर्स भी कर सकते हैं। कई संस्थानों द्वारा सर्टिफिकेट और डिप्लोमा कोर्स भी करवाए जाते हैं।

रोजगार के अवसर — एन्वायरनमेंटल साइंस ग्रेजुएट्स के लिए इस क्षेत्र में ढेरों अवसर हैं। वे कई सरकारी विभागों और एजेंसियों में कार्य कर सकते हैं जैसे- फोरेस्ट एंड एन्वायरनमेंट, पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड्स, अर्बन प्लानिंग, उद्योगों, वाटर रिसोर्सेज और एग्रीकल्चर इत्यादि। अब एनजीओज भी एन्वायरनमेंटल प्रोटेक्शन के लिए कार्य कर रही हैं, जो एन्वायरनमेंटल साइंटिस्ट के लिए एक बेहतर कैरियर विकल्प है। कई निजी उद्योग भी पर्यावरण विज्ञानी को नौकरियां प्रदान करते हैं। इसके अलावा वेस्ट ट्रीटमेंट इंडस्ट्रीज, रिफाइनरीज, डिस्टिलरीज, माइन्ज, फर्टिलाइजर प्लांट्स, फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्रीज और टैक्सटाइल मिल्ज में भी पर्यावरण विज्ञानियों के लिए ढेरों अवसर हैं। पर्यावरण विज्ञानी निजी और सरकारी संस्थानों में एक अध्यापक और रिसर्च गतिविधियों में भी अच्छा रोजगार प्राप्त कर सकते हैं। एन्वायरनमेंटल साइंटिस्ट एक पर्यावरण जर्नलिस्ट के रूप में मीडिया में भी रोजगार प्राप्त कर सकता है। पर्यावरण विज्ञानियों के कालेजों और विश्वविद्यालयों में पढ़ाना एक बेहतर कैरियर विकल्प साबित हो सकता है।

वेतनमान — एन्वायरनमेंटल साइंटिस्ट सरकारी एजेंसियों खासकर सेंट्रल और स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्डों में काम करके 12000 से 18000 रुपए प्रति महीना वेतनमान प्राप्त कर सकता है। बीई डिग्री प्राप्त किए हुए एन्वायरनमेंटल इंजीनियर्स 15000 से 30000 रुपए प्रति महीना वेतनमान प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री प्राप्त किए हुए छात्र 35000 से 50000 रुपए की आकर्षक सैलरी पा सकता है और जिस छात्र ने पीएचडी डिग्री प्राप्त की है, वह 50000 से 75000 रुपए प्रति महीना वेतनमान पाता है। एक लाइसेंस प्राप्त किया हुआ इंजीनियर एक लाख रुपए तक सैलरी पाता है। इसके साथ ही एन्वायरमेंटल प्रोजेक्ट्स से जुड़ी अंतर्राष्ट्रीय फर्में अपने कर्मचारियों को आकर्षक सैलरी पैकेज देती हैं।

कोर्सेज — * पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री इन एन्वायरनमेंटल साइंस
• अंडर ग्रेजुएट कोर्स इन एन्वायरनमेंटल साइंस
• बीएससी डिग्री इन एन्वायरनमेंटल साइंस
• एमएससी डिग्री इन एन्वायरनमेंटल साइंस
• एमटेक इन एन्वायरनमेंटल साइंस
• एमफिल इन एन्वायरनमेंटल साइंस
• पीएचडी डिग्री इन एन्वायरनमेंटल साइंस
• बैचलर डिग्री इन एन्वायरनमेंटल मैनेजमेंट
• सर्टिफिकेट कोर्स इन एन्वायरनमेंटल स्टडीज
• एमएससी इन एन्वायरनमेंटल टेक्नोलॉजी
• एमएससी इन एन्वायरनमेंटल माइक्रोबायोलॉजी
• डिप्लोमा इन एन्वायरनमेंटल प्रोटेक्शन
• ग्रेजुएट डिप्लोमा इन एन्वारनमेंटल साइंस
• बीई डिग्री इन एन्वायरनमेंटल साइंस

संस्थान — * नेशनल इंस्टीच्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, हमीरपुर
• जीबी पंत इंस्टीच्यूट ऑफ हिमालयन एन्वायरनमेंट एंड डेवलपमेंट मोहल, कुल्लूहिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी, शिमला
• डा. यशवंत सिंह परमार यूनिवर्सिटी ऑफ हार्टिकल्चर एंड फोरेस्ट्री, नौणी, सोलन
• डिग्री कालेज, धर्मशाला
• कृषि विश्वविद्यालय, पालमपुर
• थापर यूनिवर्सिटी, पटियाला
• पंजाब टेक्निकल यूनिवर्सिटी, जालंधर
• इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी, खन्ना
• देशभक्त ग्रुप ऑफ इंस्टीच्यूशंज, गोबिंदगढ़, पंजाब
• कन्या महाविद्यालय, जालंधर
• हंसराज महिला महाविद्यालय, जालंधर
• हरियाणा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी, हिसार
• कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी, कुरुक्षेत्र
 

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