दम तोडती आमी नदी बचाएं

Submitted by Hindi on Tue, 04/26/2011 - 16:19
Source
जनादेश डॉट इन, अप्रैल 2011

गोरखपुर, अप्रैल। आमी नदी को लेकर बीते बुधवार को कटका गांव में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों के साथ गांव वालों ने जो प्रतिक्रिया व्यक्त की उसके बारे में जिला प्रशासन को पहले से ही जानकारी मिल चुकी थी पर उसके बाद भी गोरखपुर का जिला प्रशासन जागा नहीं। अब जब आमी नदी के किनारे बसे कटका गांव के लोगों ने उद्यमियों की जी हुजूरी करने में लगे प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों को सबक सिखाने का जो तरीका अपनाया वह कानूनन रूप से भले ही ठीक न हो और इस घटना की प्राथमिकी दर्ज कराकर प्रदूषण बोर्ड अपने साथ हुए अपमान को भुलाने का प्रयास कर रहा है पर हकीकत यह है कि अब यह मुद्दा कोई साधारण मुद्दा नहीं रह गया है बल्कि यह अब आम जन तथा सर्वदल का मुद्दा बन चुका है। अब तक आमी बचाओ मंच के साथ मुखर होकर भाजपा, कांग्रेस, सपा उठकर खड़ी हो गई है।

दूसरी तरफ इस घटना की प्राथमिकी दर्ज होने और घटना में शामिल मंच के अध्यक्ष समेत सैकड़ों ग्रामीणों की गिरफ्तारी के लिए सीओ की अगुवाई में कई थानों की पुलिस की टीम बना दी गई है। पुलिस के खौफ से कटका गांव के लोग घर-बार छोड़कर भागे-भागे फिर रहे हैं। शुक्रवार को सादे वेश में पुलिस जवानों की एक टीम कटका गांव में गई और वहां मौजूद कुछ महिलाओं को एक संस्था का कार्यकर्ता बताकर घटना में शामिल लोगों के बारे में जानने की कोशिश की जब वे सफल नहीं हुए तो घटना को अंजाम देने वालों को सम्मानित कराने की बात कही पर महिलाओं ने मुंह नहीं खोला। मंच के अध्यक्ष विश्वविजय सिंह ने कहा है कि वह मुकदमें से नहीं डरते आमी नदी सैकड़ो लोगों के लिए जीवनदायिनी है और वह इसके लिए जेल जाने से पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने यह भी कहा है कि आमी नदी को बचाने के लिए मंच अब न्यायालय का दरवाजा खटखटाएगा क्योंकि अब उन्हें इस मामले में किसी से न्याय की उम्मीद नहीं रह गई है और यह भी चेतावनी दी कि अगर प्रशासन ने कार्यवाही के नाम पर ग्रामीणों का उत्पीड़न किया तो इसके परिणाम गंभीर होंगे।

यहां बता दें कि बुधवार को लखनऊ से गीडा और आमी नदी की जांच करने आए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों को छताई पुल पर सैकड़ो की संख्या में गाँव वालों ने घेर लिया था और उन्हें आमी नदी के जहरीले हो चुके जल से हो रही दिक्कतों को दिखाना चाहा तो जांच टीम में शामिल एक अधिकारी ने उद्योगों और उद्यमियों की हिमायत कर दी इस पर ग्रामीण भड़क गए और जांच में शामिल प्रदूषण एवं पर्यावरण विभाग के अधिकारियों को कटका गांव में बंधक बनाकर न सिर्फ उनके साथ दुर्व्यवहार किया बल्कि कालिख, गोबर कीचड़ मुंह में पोता और साड़ी पहनाकर मारापीटा भी घटना के अगले दिन यानी गुरूवार को अपर जिलाधिकारी के निर्देश पर उपजिलाधिकारी सहजनवां ने प्रदूषण जांचने आई टीम के अधिकारियों से मिलकर उनके साथ घटी घटनाओं की जानकारी हासिल की और फिर उन लोगों को सहजनवां ले जाकर चिकित्सकीय परीक्षण कराया और जांच टीम की अगुवाई कर रहे पर्यावरण विशेषज्ञ डॉ. डी.सी. गुप्ता की तहरीर पर आमी बचाओ मंच के विश्वविजय सिंह समेत सैकड़ो ग्रामीणों के खिलाफ सहजनवां थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई। बताते हैं कि टीम में शामिल पर्यावरण विभाग के एक अधिकारी पर ग्रामीणों का खौफ इस कदर था कि वह रातों-रात वापस लखनऊ लौट गए।

गाँव वालों का आक्रोश यूं ही नहीं फूटा आमी नदी के किनारे बसे लोग आमी नदी के पानी को प्रदूषित होने से बचाने के लिए पिछले साल भर से लगातार आंदोलन चला रहे थे उन्हें आश्वासन पर आश्वासन मिलता रहा और नदी लगातार प्रदूषित होती रही आज हालत यह है कि नदी का पानी काला हो चुका है। नदी में कोई जलीय जीवन नहीं रह गया है। पशुओं के लिए पानी की दिक्कत पैदा तो हो ही गई है नदी के प्रदूषित जल से उठने वाली दुर्गंध से वहां के लोगों का जीवन भी नारकीय बनता जा रहा है। गांव वालों के बहुत प्रयास पर इसी माह 6 तारीख को सिटी मजिस्ट्रेट जेपी सिंह के नेतृत्व में जांच की गई और उस पर तथा गांव वालों में बढ़ते आक्रोश को लेकर शासन को जहां एक रिपोर्ट कार्यवाही के लिए भेजी गई थी वहीं दूसरी तरफ जिला प्रशासन ने ग्रामीणों के भीतर पनप रहे आक्रोश के ज्वार के बारे में भी आगाह किया गया था, लेकिन और मामलों की तरह इसमें भी गोरखपुर के जिलाधिकारी अजय कुमार शुक्ल ने कोई खास दिलचस्पी नहीं दिखाई तथा गीडा के उद्यमियों ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मुख्यालय में पैरवीकर एक दूसरी जांच का आदेश करा दिया। ग्रामीणों का आक्रोश भड़कने की एक प्रमुख वजह यही थी।

आमी बचाओं मंच के कार्यकर्त्ताओं द्वारा विरोध स्वरूप अधिकारियों को कालिख पोतने और उन्हें अपमानित करने की घटना के बारे में सांसद योगी आदित्यनाथ का कहना है कि यह विरोध जनता की स्वाभाविक प्रतिक्रिया थी। आमी नदी सैकड़ो गांवों के लोगों के जीवन की रीढ़ है। आमी का अमृत जैसा जल औद्योगिक विकास के नाम पर जहरीला बना दिया गया है। ग्रामीणों के साथ खड़ी सपा के एमएलसी देवेन्द्र सिंह ने बयान जारी कर कहा कि पर्यावरण एवं प्रदूषण विभाग के अधिकारियों के खिलाफ आमजन का गुस्सा भड़कना स्वाभाविक था। अगर प्रशासन ने इस मामले में ज्यादती की तो आर-पार का संघर्ष होगा। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता बिनय कुमार सिंह का कहना है कि आमी नदी के प्रदूषण को लेकर काफी दिनों से संघर्षरत आमजनों का गुस्सा वाजिब है।
 

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