पॉलिथीन से पिंड छुड़ाने की पहल

Submitted by Hindi on Mon, 06/13/2011 - 12:27
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नई दुनिया, 12 जून 2011

पृथ्वीतल पर जमा पॉलिथीन जमीन की जल सोखने की क्षमता खत्म कर रहा है। इससे भूजल स्तर गिरा। सुविधा के लिए ईजाद की गई पॉलिथीन आज सबसे बड़ा दुविधा का कारण बन गई है। प्राकृतिक तरीके से नष्ट न होने के कारण यह धरती की उर्वरक क्षमता को भी धीरे-धीरे समाप्त करने पर तुली है।

पॉलिथीन छत्तीसगढ़ की ही नहीं, पूरे देश की एक गंभीर समस्या है। इसके खिलाफ अब छत्तीसगढ़ में भी मुहिम छिड़ चुकी है। इन दिनों मुख्यमंत्री से लेकर आम लोगों तक, इसके विरोध के स्वर सुनाई दे रहे हैं। इसमें महिला वर्ग की भूमिका बहुत अहम है। महिलाएं कागज के बैग और लिफाफे बनाकर मुफ्त में बांट रही हैं ताकि लोगों में जागृति आए और वे पॉलिथीन का पिंड छोड़ दें। जैसे-जैसे अभियान जोर पकड़ता जा रहा है, व्यापारी और अन्य कारोबारी भी इससे जुड़ते जा रहे हैं। प्रेरित होकर लोग घरों में ही पेपर बैग बनाने लगे हैं। मुट्ठी भर लोगों के हौसले को देखते हुए मजरूह की यह नज्म याद आती है, ‘मैं अकेले ही चला था जानिबे मंजिल मगर लोग जुड़ते गए, कारवां बढ़ता गया।’

दो दशक पहले हम-आप जब खरीदारी के लिए झोला लेकर जाते थे, तब दुकानदार के पास कागज के लिफाफे होते थे जिसमें वह सामान डाल देता था। कई बार इन कागज के लिफाफों में किसी का पत्र भी होता था या खूबसूरत-सी कविता होती थी, जो सामान खोलने पर बरबस हमारा ध्यान खींच लेती थी। अब इन खूबसूरत स्मृतियों की जगह पॉलिथीन ने ले ली है। मामूली सामान लेने पर भी हम पॉलिथीन मांगते हैं। घर जाकर यह पॉलिथीन चली जाती है कूड़ेदान में वहां खाद्यान्न से लिपटे ये पॉलिथीन मवेशी के पेट में जमा होने लगते हैं। और इससे वे कुछ ही दिनों में घुट-घुटकर मर जाते हैं। मंदिरों से लेकर ऐतिहासिक धरोहरों, पार्क, अभयारण्य आदि में धड़ल्ले से इसका उपयोग हो रहा है। रायपुर में इन प्रयासों से जुड़े लोग एकमत हैं कि राजधानी की सुंदरता में नासूर की तरह पॉलिथीन गड़ी हुई है। पॉलिथीन न केवल वर्तमान बल्कि भविष्य को भी नष्ट करने में लगा हुआ है। पॉलिथीन का उपयोग मनुष्य की आदत में शुमार हो गया है। लगातार इस्तेमाल के कारण आज हर व्यक्ति इसी पर निर्भर दिखाई दे रहा है।

पृथ्वीतल पर जमा पॉलिथीन जमीन की जल सोखने की क्षमता खत्म कर रहा है। इससे भूजल स्तर गिरा। सुविधा के लिए ईजाद की गई पॉलिथीन आज सबसे बड़ा दुविधा का कारण बन गई है। प्राकृतिक तरीके से नष्ट न होने के कारण यह धरती की उर्वरक क्षमता को भी धीरे-धीरे समाप्त करने पर तुली है। पॉलिथीन से निकलने वाला धुआं ओजोन परत के साथ लोगों को भी नुकसान पहुंचा रहा है। इसको जलाने से कार्बन डाईऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड एवं डाईऑक्सींस जैसी विषैली गैस निकल रही हैं। राजधानी के निवासी इस बात को लेकर भी चिंतित हैं कि विकास के नाम पर शहर में पेड़ों की अंधाधुंध कटाई हुई है। गौरवपथ के निर्माण के दौरान भी कई पेड़ काटे गए। वहीं स्टेशन रोड चौड़ीकरण से लेकर नगर निगम के नवीन मुख्यालय भवन के सामने बूढ़ातालाब, विद्युत मंडल, गवर्नमेंट स्कूल, नलघर के सामने, कालीबाड़ी, टिकरापारा प्रमुख रूप से है। वहीं फोरलेन बनाने के दौरान भी सैकड़ों पेड़ कुर्बान हो गए।

पॉलिथीन के ढेर में खाना तलाशती गायपॉलिथीन के ढेर में खाना तलाशती गायअब शहर को सुंदर, स्वच्छ एवं प्रदूषण मुक्त बनाने का बीड़ा महिलाओं ने उठाया है। तेजस्विनी महिला मंच की अध्यक्ष लक्ष्मी साहू, सीता बघेल, सरोज पांडेय, चित्रा यादव, रामकुंड पारा में जय मां मौली माता समिति की अध्यक्ष ज्योति राव, मनीषा सोना, सुनील मुथलियार, ऊषा सागर, कंचर सागर, गुंजा सोनी, उजलो सेनकर व ममता राय भी अलग-अलग वार्डों में पेपर बैग बनाकर अभियान चला रही हैं। आस-पास के दुकानदारों को मुफ्त में पेपर बैग भी दे रही हैं। राजधानी की प्रथम महिला महापौर डॉ. किरणमयी नायक भी पॉलिथीन पर रोक के कारगर उपाय कर रही हैं। उन्होंने 70 वार्डों की महिलाओं के अलग-अलग समूह बनाकर उन्हें जिम्मेदारी भी सौंपी है।

रायपुर कलेक्टर डॉ. रोहित यादव ने स्पष्ट किया कि प्रदूषण से बचाने के लिए पॉलिथीन पर प्रतिबंध सख्ती से लागू किया जाएगा। पॉलिथीन निर्माण करने वाले उद्योगों पर भी कार्रवाई की जाएगी। निर्धारित मापदंड के बाहर की पॉलिथीन बनाने पर जुर्माना भी लगाया जाएगा। पॉलिथीन को प्रदेश से हटाने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने इसे लेकर सचिव स्तर पर अधिकारियों को निर्देशित किया है और सभी जिलों के कलेक्टर, नगर निगम आयुक्त व नगरपालिकाओं के अधिकारियों को पॉलिथीन पर प्रतिबंध लगाने के निर्देश देने को कहा है। उन्होंने अधिकारियों को पर्यावरण संरक्षण कानूनों का कठोरता से पालन करने का निर्देश दिया है।

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