अब हवा से पानी बनाइए और पीजिए

Submitted by admin on Sat, 10/31/2009 - 12:56
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dr-mahesh-parimal's blog

वॉटर मिलवॉटर मिलपीने के पानी की किल्लत दूर करने के लिए अब एक अनोखी मशीन बनाई गई है। यह मशीन हवा से पानी निकालती है। उम्मीद की जा रही है कि माइक्रोवेव के बाद यह सबसे उपयोगी घरेलू मशीन की खोज साबित होगी।

यह मशीन उसी तकनीक पर आधारित है जिस पर डी-ह्यूमिडीफायर काम करता है। वॉटर मिल नामक नई मशीन हवा से पीने के लिए तैयार पानी तैयार कर सकती है। मशीन बनाने वाली कंपनी का कहना है कि यह विकसित देशों में न सिर्फ बोतलबंद पानी का विकल्प पेश करेगी, बल्कि रोजाना पानी की कमी से जूझ रहे लाखों लोगों के लिए भी उपयोगी साबित हो सकती है।

मशीन नमी वाली हवा को एक फिल्टर के जरिए खींच लेती है। मशीन के अंदर एक कूलिंग एलीमेंट होता है। यह नम हवा को ठंडा कर देता है, जिससे संघनित होकर पानी की बूंदें निकलती हैं। मशीन एक दिन में 12 लीटर तक पानी बना सकती है। तूफानी मौसम में हवा में नमी बढ़ जाती है। ऐसी सूरत में वॉटर मिल ज्यादा पानी तैयार कर पाएगी।

वॉटर मिल को बनाते वक्त इस बात का ध्यान रखा गया है कि इससे पर्यावरण में प्रदूषण न फैले। मशीन के इस्तेमाल में उतनी ही बिजली की खपत होती है, जितनी आम तौर पर रोशनी के लिए तीन बल्ब जलाने में होती है। वॉटर मिल ईजाद करने वाले जॉनथन रिची ने कहा- पानी की मांग बढ़ती ही जा रही है। जल वितरण व्यवस्था भरोसेमंद नहीं होने के कारण लोग इससे निजात पाना चाहते हैं।

मशीन करीब तीन फुट चौड़ी है। उम्मीद है कि जल्दी ही यह ब्रिटेन के बाजार में आ जाएगी। तब इसकी कीमत 800 पाउंड (करीब 60,000 रुपये) रहने का अनुमान है। मशीन का उत्पादन कनाडा की एलीमेंट फोर नामक फर्म कर रही है। उसका अनुमान है कि मशीन से एक लीटर पानी तैयार करने में करीब 20 पेंस का खर्च आएगा। हालांकि यह मशीन उन इलाकों में कारगर नहीं है जहां सापेक्ष नमी 30 फीसदी से कम हो। लेकिन ब्रिटेन में यह 70 फीसदी से ज्यादा है, इसलिए वहां मशीन की सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा।

दूसरी ओर पर्यावरणविदों का दावा है कि जलवायु परिवर्तन के कारण 2080 तक दुनिया में आधी आबादी को पानी की किल्लत का सामना करना पड़ेगा। हर पांच में से एक इंसान को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। ऐसे में इस मशीन से उम्मीद की किरण जगी है।

इसका दूसरा पहलू यह है कि इसके खतरनाक परिणाम भी सामने आएंगे। जब नमी ही नहीं बचेगी, तब क्‍या करेंगे, उस जल को पीकर। कभी सोचा किसी ने। अभी तो सब कुछ अच्‍छा लगेगा। पर यह खतरे की घंटी है, पर्यावरण के विनाश के लिए। इसके लिए हमें अभी से सचेत होना होगा।
 

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भोपालवासी डॉ. महेश परिमल का छत्तीसगढ़िया गुजराती. हिन्दी में एमए और भाषा विज्ञान में पीएच.डी. अकादमिक कैरियर है। पत्रकारिता और साहित्य से जुड़े अब तक देश भर के समाचार पत्रों में करीब 700 समसामयिक आलेखों व ललित निबंधों का प्रकाशन का लम्बे लेखन का अनुभव है। पानी उनके संवेदना का गहरा पक्ष है।

डॉ. महेश परिमल वर्तमान में भास्कर ग्रुप में अंशकालीन समीक्षक के रूप में कार्यरत् हैं। उनका संपर्क: डॉ. महेश परिमल, 403, भवानी परिसर, इंद्रपुरी भेल, भोपाल. 462022. ईमेल - parimalmahesh@gmail.com

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