प्रस्तावित नदी जोड़ परियोजना (National River Linking Project)

Submitted by Hindi on Sat, 07/02/2011 - 10:44
Source
जागरण जंक्शन, 20 जून 2011

नदी जोड़ो परियोजनानदी जोड़ो परियोजनाएनडब्लूडीए के नेशनल पर्सपेक्टिव प्लान के तहत हिमालयी और प्रायद्वीपीय क्षेत्र की चिह्नित नदियों एवं स्थानों को कुल 30 नहरों द्वारा आपस में जोड़ा जाना है। इनमें हिमालयी क्षेत्र में 14 और प्रायद्वीपीय क्षेत्र में 16 संयोजक नहरें शामिल हैं।

आनुमानित लागत: इस परियोजना की 2002 में आनुमानित लागत 5 लाख 60 हजार करोड़ रुपये थी। इसमें 16000 करोड़ हर साल के हिसाब से 35 साल तक खर्च किया जाना था। एक दूसरे अनुमान के मुताबिक इस परियोजना में कुल खर्च 5 लाख 56 हजार करोड़ रुपये है। इसमें 3 लाख 30 हजार करोड़ रुपये हिमालयी और प्रायद्वीपीय क्षेत्र की नदियों को आपस में जोड़ने की लागत है।

परियोजना की वर्तमान स्थिति: एनडब्लूडीए तीस अंतर्राज्यीय नदी जोड़ (हिमालय भाग की 14 और प्रायद्वीपीय हिस्से की 16) बनाने के लिए व्यवहारिक रिपोर्ट (एफआर) तैयार कर रहा है। इनमें से प्रायद्वीपीय भाग की 14 और हिमालय के 2 लिंक की रिपोर्ट तैयार हो चुकी है। प्रायद्वीपीय भाग की पांच अंतर्राज्यीय नदी जोड़ सरकार की प्राथमिकता सूची में शामिल हैं। इनमें केन-बेतवा, पार्वती-कालीसिंध-चंबल दमनगंगा-पिंजल, पार-तापी-नर्मदा, एवं गोदावरी (पोलावरम)-कृष्णा (विजयवाड़ा) नदी जोड़ से संबंधित विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जा रही है।

केन-बेतवा नदी जोड़ प्रोजेक्ट का डीपीआर तैयार हो गया है। उसको उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश सरकार के पास विचार के लिए भेजा गया है। इसके अलावा पार-तापी-नर्मदा और दमनगंगा-पिंजल से संबंधित डीपीआर दिसंबर 2011 तक तैयार हो जाने की संभावना है। गोदावरी (पोलावरम)-कृष्णा (विजयवाड़ा) नदी जोड़ के लिए योजना आयोग ने निवेश की अनुमति प्रदान कर दी है। एनडब्ल्यूडीए को सात राज्यों महाराष्ट्र, गुजरात, झारखंड, उड़ीसा, बिहार, राजस्थान और तमिलनाडु से 36 अंतर्राज्यीय नदी जोड़ के लिए प्रस्ताव मिले हैं। उनमें से 12 प्रोजेक्ट की पूर्व व्यावहारिक रिपोर्ट (प्री-एफआर) का काम एनडब्ल्यूडीए ने पूरा कर लिया है।

 

 

हिमालयी क्षेत्र की संयोजक नहरें


1. कोसी-मेकी
2. कोसी-घाघरा
3. गंडक-गंगा
4. घाघरा-यमुना
5. शारदा-यमुना
6. यमुना-राजस्थान
7. राजस्थान-साबरमती
8. चुनार-सोन बैराज
9. सोन बांध-गंगा की दक्षिणी सहायक नदियां
10. ब्रह्मपुत्र-गंगा (मानस-संकोश-तीस्ता-गंगा)
11. ब्रह्मपुत्र-गंगा(जोगीगोपा-तीस्ता-फरक्का)
12. फरक्का-सुंदरवन
13. फरक्का-दामोदर-सुवर्णरेखा
14. सुवर्णरेखा-महानदी

 

 

 

 

प्रायद्वीपीय क्षेत्र की संयोजक नहरें:


1. महानदी (मणिभद्रा)-गोदावरी (दौलाईस्वरम)
2. गोदावरी (इंचमपाली)-कृष्णा (नागार्जुन सागर)
3. गोदावरी (इंचमपाली लो डैम)-कृष्णा (नागार्जुन टेल पाँड)
4. गोदावरी (पोलावरम)-कृष्णा (विजयवाड़ा)
5. कृष्णा (अलमाटी)-पेन्नार
6. कृष्णा (श्रीसैलम)-पेन्नार (प्रोडात्तुर)
7. कृष्णा (नागार्जुन सागर)-पेन्नार (स्वर्णशिला)
8. पेन्नार (स्वर्णशिला)-कावेरी (ग्रांड आर्नीकट)
9. कावेरी (कट्टई)- वईगई-गुंडुर
10. केन-बेतवा लिंक
11. पार्वती-काली सिंध-चंबल
12. पार-तापी-नर्वदा
13. दमनगंगा-पिंजाल
14. वेदती-वरदा
15. नेत्रावती-हेमावती
16. पम्बा-अचनकोविल-वप्पार

 

 

 

जनमत


क्या नदियों को आपस में जोड़कर बाढ़ और सूखे पर काबू पाया जा सकता है?
हां : 93%
नहीं : 7%






क्या नदियों को जोड़ने की योजना प्रकृति और पर्यावरण के विरुद्ध है?


हां : 36%
नहीं : 64%

 

 

 

 

 

 

 

आपकी आवाज :


नदियों को आपस में जोड़कर सूखे और बाढ़ से मुक्ति ली जा सकती है। सभी राज्यों को इस मामलें में एक दूसरे की सहायता करनी चाहिए। – राजू

नदियों को जोड़ने से प्रकृति और पर्यावरण पर कुछ खास फर्क नहीं पड़ेगा, यह कदम देश की तरक्की में सहायक होगा। – संतोष कुमार (कानपुर)

 

 

 

 

 

 

 

 

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