गांव में मौतें, प्रशासन मना रहा है महोत्सव

Submitted by admin on Wed, 11/18/2009 - 09:57
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अंबरीश कुमार/ जनसत्ता / 15 नवंबर 09
रिहंद बांध से लगे लभरी गांव में जहरीले पानी के चलते तेरह साल की सुनीता ने दम तोड़ दिया। लोग परेशान हैं, गांव वाले बेहाल थे तो दूसरी तरफ समूचा प्रशासन सोन महोत्सव में जश्न मना रहा था। और तो और कलेक्टर पंधारी यादव के पास इतनी फुरसत नहीं थी कि वे जश्न छोड़ जहरीले पानी से दम तोड़ रहे बच्चों के परिवार वालों से मिल पाते। जन संघर्ष मोर्चा ने आज इस मुद्दे पर प्रदर्शन कर धरना दिया पर कलेक्टर को ज्ञापन इसलिए नहीं मिल पाया क्योंकि वे सोन महोत्सव में व्यस्त थे। जानने के लिए जान लें कि सोन भी लगभग सूख गयी है
सोनभद्र/लखनऊ, नवंबर। रिहंद बांध के जहरीले पानी से पिछले दो हफ्ते में दो दर्जन से ज्यादा लोगों की मौत के बाद अब सोनभद्र में आंदोलन शुरू हो गया है। रिहंद बांध के पानी में पहले जहां बिजली घरों का फ्लाई ऐश बहाया जाता था, वहीं अब कनौड़िया केमिकल्स का जहरीला कचरा बहाया जा रहा है। रविवार को रिहंद बांध से लगे लभरी गांव में इसी जहरीले पानी के चलते तेरह साल की सुनीता ने दम तोड़ दिया। लोग परेशान हैं, गांव वाले बेहाल थे तो दूसरी तरफ समूचा प्रशासन सोन महोत्सव में जश्न मना रहा था। और तो और कलेक्टर पंधारी यादव के पास इतनी फुरसत नहीं थी कि वे जश्न छोड़ जहरीले पानी से दम तोड़ रहे बच्चों के परिवार वालों से मिल पाते। जन संघर्ष मोर्चा ने आज इस मुद्दे पर प्रदर्शन कर धरना दिया पर कलेक्टर को ज्ञापन इसलिए नहीं मिल पाया क्योंकि वे सोन महोत्सव में व्यस्त थे। जानने के लिए जान लें कि सोन भी लगभग सूख गयी है।

पिछले दो हफ्ते में जो लोग रिहंद बांध के जहरीले पानी से मरे हैं, उनका ब्योरा जन संघर्ष मोर्चा ने तैयार किया है। खास बात यह है कि जिले के मुख्य चिकित्साधिकारी जीके कुरील भी इस बात की पुष्टि कर चुके हैं कि बांध का पानी गांव वाले न पिएं। यह पानी जहरीला हो चुका है। रविवार को लभरी गांव में सुनीता की मौत के बाद जब जीके कुरील से फोन पर इस संवाददाता ने संपर्क करने की कोशिश की तो उन्होंने भी फोन काट दिया। बाद में कलेक्टर पंधारी यादव को फोन किया गया तो उन्होंने भी फोन काट दिया। जिले के वरिष्ठ पत्रकार सुल्तान शहरयार खान ने कहा, इस समय कोई भी अफसर फोन नहीं उठाएगा। ये सब लोग सोन महोत्सव के नाच-गाने में व्यस्त हैं। वैसे भी रिहंद बांध के जहरीले पानी को लेकर कई बार आवाज उठाई गई पर प्रशासन हाथ पर हाथ धरे बैठा रहा। यही वजह है कि इस पानी को पीकर अब लोगों की जान जा रही है। कनौड़िया केमिकल्स का कचरा लोगों की जान ले रहा है।

जन संघर्ष मोर्चा के प्रतिनिधिमंडल ने रिहंद बांध से जुड़े कमारी डाह और लभरी गांव में जहरीले पानी के चलते पिछले दो हफ्ते में मरने वालों की सूची जारी की है। कमारी डाह में हाल ही में जिन लोगों की मौत हुई है, उनमें छह साल की चुनमुअर, एक साल की रीना, पांच साल की रीता, तीन साल का वीरभान, आठ साल की गीता, छह साल की पूनम, दो साल की सुनैयना, ५३ साल की सुगुनी और ६३ साल के राम दुलार शामिल हैं। दूसरी तरफ लभरी गांव में जिन लोगों की मृत्यु हुई है, उनमें दो साल की ऊषा, चार साल का राम बाबू, पांच साल की सरिता, चार साल की सोनू, तीन साल का राकेश, तेरह साल की सुनीता, ४८ साल का राम चंदर और ४0 साल का गणोश यादव शामिल है। इतने लोगों की मौत के बाद भी जिला प्रशासन ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। रविवार को लभरी गांव में एक बच्ची की मौत के बाद जन संघर्ष मोर्चा के दिनकर कपूर ने गांव में जाकर उसके परिजनों से बात की और फिर कलेक्टर पंधारी यादव को इस हादसे की जानकारी दी। पंधारी यादव ने बताया कि बांध का पानी जांच के लिए रूड़की स्थित प्रयोगशाला को भेजा गया है।

रिहंद बांध का पानी पहले से ही काफी प्रदूषित है। पिछली बार इस संवाददाता ने रेणुकूट में देखा कि वहां हैदराबाद से लाई मछलियां बिक रही हैं। पता चला कि रिहंद बांध के पानी में मछली जिंदा नहीं रह पाती। अगर बांध के पानी में कहीं से मछली मिल भी जए तो उसको खाने वाला जिंदा नहीं बचता। बांध के पानी में अनपरा पावर हाउस, एनटीपीसी की रेणू सागर इकाई और हिन्डालको के बिजली घर का फ्लाई ऐश इस पानी में बहाया जाता रहा है। बांध में हिंडालकों और एनटीपीसी ने अपने कचरे को शोधित करने की व्यवस्था की। तो दूसरी तरफ कनौड़िया केमिकल्स ने अपना जहरीला कचरा रिहंद बांध के पानी में डालना शुरू कर दिया। जिसके चलते बांध के आसपास के गांव में लोग बीमार पड़ने लगे। रिहंद बांध के आसपास के दजर्न भर गांवों में प्रदूषित पानी के चलते लोग बीमार पड़ चुके हैं। जिन गांवों में प्रदूषित पानी का ज्यादा असर पड़ा है, उनमें दुमरचुआं, महरी कला, बहेड़ा कला और पखतवा गांव शामिल हैं। प्रशासन कहता है कि वे बांध का पानी न पिएं। लभरी गांव के राम प्रसाद ने कहा-कहां का पानी न पिएं। हैंडपंप का पानी मिलता नहीं। जिंदा रहने के लिए मजबूरी में यह पानी पीते हैं और बीमार पड़ते हैं। सोनभद्र की सामाजिक कार्यकर्ता रोमा ने कहा-हम लोगों ने रिहंद बांध के पानी की गुणवत्ता का अध्ययन कराया और पता चला कि यह पानी किसी भी हाल में पीने लायक नहीं है। बावजूद इसके पीने के पानी का वैकल्पिक इंतजाम नहीं किया जा रहा है।

जन संघर्ष मोर्चा ने आज राबर्टसगंज में धरना देकर कनौड़िया केमिकल्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की। इसके साथ ही जहरीला पानी पीकर मरने वालों के परिजनों को मुआवजा देने और प्रभावित गांवों में तत्काल प्रभाव से हैंडपंप लगाने की मांग की। दिनकर कपूर ने कहा-अगर यह मांगें प्रशासन ने नहीं मानी तो आंदोलन सोनभद्र से लेकर दिल्ली तक चलेगा।

जनसत्ता

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