कृष्णा / Krishna River

Submitted by admin on Wed, 07/27/2011 - 07:30
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कृष्णा (एकात्मता स्तोत्र से)


कृष्णा नदी का स्रोत महाराष्ट्र के महाबलेश्वर में है। समुद्र तल से 1372 मीटर की ऊँचाई पर स्थित यह महाराष्ट्र का सबसे अधिक ऊँचाई वाला लोकप्रिय व खूबसूरत पर्वतीय स्थल है। महाबलेश्वर की हरियाली से लबालब मनोरम दृश्यावलियाँ पर्यटक को स्वप्नलोक में विचरण करने को विवश कर देती हैं। यहीं पर पश्चिमी घाट के सह्य पर्वत से कृष्णा नदी का उद्गम होता है। महाबलेश्वर में भगवान महाबली को समर्पित प्राचीन मंदिर है। यह मंदिर प्राकृतिक रूप से बने शिव लिंगम के लिए काफी प्रसिद्ध है। पंचगंगा मंदिर महाबलेश्‍वर के प्राचीन मंदिरों में है। इस स्थान पर कोयना, कृष्णा, वेन्ना, सावित्री और गायत्री नदियों का संगम होता है। इन मिश्रित नदियों का जल गोमुख से निकलता है। इसी कारण इसे पंचगंगा मंदिर के नाम से जाना जाता है। कृष्णा घाटी में दक्षिण में स्थित पंचगनी महाबलेश्वर से मात्र 19 कि.मी. दूर है। यह चारों ओर से रमणीक दृश्यों से भरपूर होने के कारण सैलानियों के लिए आकर्षण का केंद्र है। यहाँ पर्वत श्रृंखला को देखना और तेज हवाओं से बात करना एक अनूठा अनुभव है।

महाबलेश्वर से निकलकर कृष्णा सांगली पहुंचती है। कृष्णा नदी के तट पर बसा यह हरा-भरा नगर महाराष्ट्र के पश्चिमी हिस्से में स्थित है। मध्य काल में इस नगर को कुंडल नाम से जाना जाता था। 12वीं शताब्दी में यह नगर चालुक्य साम्राज्य की राजधानी था। यहां के हिन्दू और जैन मंदिर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। कृष्णा नदी के तट पर गणेश मंदिर बना है। मंदिर में संगमरमर से बनी भगवान गणेश की सुंदर प्रतिमा स्थापित है। गणेश मंदिर के चारों ओर चिंतामनेश्वर, चिंतामनेश्वरी, सूर्य और लक्ष्मी-नारायण को समर्पित अन्य मंदिर भी बने हुए हैं। लक्ष्मी-नारायण मंदिर में भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी को एक साथ पूजा जाता है। सांगली के पास हरीपुर में स्थित कृष्णा घाट में कृष्णा और वारना नदी का संगम होता है। इन दोनों नदियों के तट पर संगमेश्वर शिव मंदिर बना हुआ है। सांगली के पास ही पवित्र स्थान नारसोबा वाडी है कृष्णा का संगम पंचगंगा से होता है। यहाँ पर श्री नरसिम्हा सरस्वती स्वामी दत्तदेव का मंदिर है।

महाराष्ट्र में भ्रमण करने के बाद कृष्णा उत्तरी कर्नाटक में प्रवेश करती है। यहाँ पर बीजापुर जिले में कृष्णा पर अल्माटी बांध बनाया गया है। इस बांध से बिजली बनायीं जाती है और सिंचाई के लिए नहरें निकली गयी हैं। बांध से 15 कि. मी. दूरी पर कुंडलसंगम नामक तीर्थ स्थल है। यहाँ पर स्वयं-भू शिव लिंग है जिसके पास लिंगायत पंथ के संस्थापक विश्वगुरु बसवेश्वर की समाधि भी है। कर्नाटक से कृष्णा नदी आन्ध्र प्रदेश में प्रवेश करती है।

आन्ध्र प्रदेश में कृष्णा नल्लामलाई के जंगलों और पहाड़ों में आ जाती है। यहाँ पर कृष्णा जिले में कृष्णा नदी के तट पर श्रीशैल (श्रीसैलम) पर्वत है। इसे दक्षिण कैलाश कहते हैं। इस स्थान के संबंध में पौराणिक कथा है कि जब विश्व परिक्रमा की प्रतियोगिता में श्रीगणेश को शिव जी ने विजयी घोषित किया तो इस बात से रुष्ट होकर कार्तिकेय क्रौंच पर्वत पर चले गए। माता-पिता ने नारद को भेजकर उन्हें वापस बुलाया, पर वे न आए। अंत में, माता का हृदय व्याकुल हो उठा और पार्वती शिवजी को लेकर क्रौंच पर्वत पर पहुंचीं, किंतु उनके आने की खबर पाते ही वहां से भी कार्तिकेय भाग खडे हुए और काफी दूर जाकर रुके। कहते हैं, क्रौंच पर्वत पर पहुंच कर शंकर जी ज्योतिर्लिग के रूप में प्रकट हुए और तब से वह स्थान श्रीमल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिग के नाम से प्रख्यात है। श्रीसैलम में भी कृष्णा नदी पर बांध बनाया गया है जिससे बिजली बनायीं जाती है।

नालगोंडा जिले में कृष्णा नदी पर नागार्जुन सागर झील और बांध बनाया गया है। पत्‍थरों से बना यह दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे ऊंचा बांध है। यह बांध दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी मानव निर्मित झील बनाता है। झील के पास बने टापू, जिसे नागार्जुनकोंडा कहा जाता है, पर तीसरी ईसवी के बौद्ध सभ्‍यता के अवशेष मिले हैं। इन अवशेषों का सबंध भगवान बुद्ध से है। नागार्जुनसागर बांध की खुदाई करते समय एक विश्‍वविद्यालय के अवशेष मिले थे। यह विश्‍वविद्यालय आचार्य नागार्जुन द्वारा संचालित किया जाता था। आचार्य नागार्जुन बहुत बड़े बौद्ध संत, विद्वान और दार्शनिक थे। वे बौद्ध धर्म के संदेशों का प्रचार करने नागार्जुनकोंडा से अमरावती गए थे।

फिर कृष्णा नदी अमरावती पहुंचती है। यहां भगवान शिव का प्रसिद्द मंदिर अमरेश्‍वर है। इस मन्दिर के बारे में मान्यता है कि कृष्णा नदी के तट पर 32 फीट का शिवलिंग अपने आप उग आया जो धरती पर 9 फीट दिखाई देने लगा और शेष भाग धरती के भीतर रहा। परम्परा यह है कि नदी में स्नान कर मन्दिर में जाना चाहिए। अमरावती में विश्‍वप्रसिद्ध बौद्ध स्‍तूप भी है जहां भगवान बुद्ध के जीवन से संबंधित चित्रों को देखा जा सकता है। अमरावती कला-शैली भारतीय मूर्तिकला के इतिहास में एक प्रमुख स्‍थान रखती है। अमरावती के पास ही कृष्णा नदी के तट पर प्रसिद्ध नगर विजयवाडा स्थित है। विजयवाडा के इंद्र कुलादरी पहाड़ पर कन्नका दुर्गा देवी का मंदिर है। नवरात्रि पर्व के समय विजयवाडा में असंख्य श्रद्धालु इस मंदिर की पूजा करने के लिए आते हैं।

विजयवाड़ा से कृष्णा समुद्र की तरफ चलती है और अपनी 1300 कि. मी. की यात्रा समाप्त करके बंगाल की खाड़ी में गिरती है।

कृष्णा एक नदी। यह महाराष्ट्र में महाबलेश्वर के निकट 4500 फुट ऊँचे पश्चिमी घाट से निकलकर 800 मील पश्चिम से र्पूव बहती हुई बंगाल की खाड़ी में गिरती है। विजयवाड़ा के पास यह एक बड़ा डेल्टा बनाती है। कोयना, वर्ण, पंचगंगा, मालप्रभा, तुंगभ्रदा भीम और मूसी इसकी प्रमुख सहायक नदियाँ हैं। यह नदी 90 मील लंबी नहर और गोदावरी से तथा बकिंघम नहर द्वारा मद्रास से संबंधित है।

विजयवाड़ा के निकट कृष्णा की चौड़ाई लगभग 1300 गज है जहाँ 20 फुट ऊँचे तथा 3791 फुट लंबे बांध का निर्माणकर नहरें निकाली गई हैं जिनसे कृष्णा के डेल्टा में 10,02,000 एकड़ भूमि की सिंचाई होती है।

आंध्र में नागार्जुनीकोंडा के पास कृष्णा पर एक बाँध बनाकर नागार्जुनीसागर का निर्माण किया गया है जिससे लगभग 20,००,००० एकड़ भूमि की सिंचाई होती है।

Hindi Title

कृष्णा


विकिपीडिया से (Meaning from Wikipedia)

कृष्णा


कृष्णा भारत में बहनेवाली एक नदी है। यह पश्चिमी घाट के पर्वत महाबालेश्वर से निकलती है. इसकी लम्बाई प्रायः 1290 किलोमीटर है. यह दक्षिण-पूर्व में बहती हुई बंगाल की खाड़ी में जाकर गिरती है. कृष्णा नदी की उपनदियों में प्रमुख हैं: तुंगभद्रा, घाटप्रभा, मूसी और भीमा. कृष्णा नदी के किनारे विजयवाड़ा एंव मूसी नदी के किनारे हैदराबाद स्थित है. इसके मुहाने पर बहुत बड़ा डेल्टा है. इसका डेल्टा भारत के सबसे उपजाऊ क्षेत्रों में से एक है. यह मिट्टी का कटाव करने के कारण पर्यावरण को बहुत नुकसान पहुचांती है.

अन्य स्रोतों से

कृष्णा नदी (भारतकोश से)


कृष्णा नदी दक्षिण भारत की एक महत्त्वपूर्ण नदी है, इसका उद्गम महाराष्ट्र राज्य में महाबलेश्वर के समीप पश्चिमी घाट श्रृंखला से होता है, जो भारत के पश्चिमी समुद्र तट से अधिक दूर नहीं है। यह पूर्व से पश्चिम की ओर बहती है और फिर सामान्यत: दक्षिण-पूर्वी दिशा में सांगली से होते हुए कर्नाटक राज्य सीमा की ओर बहती है। यहाँ पहुँचकर यह नदी पूर्व की ओर मुड़ जाती है और अनियमित गति से कर्नाटक और आंध्र प्रदेश राज्य से होकर बहती है। अब यह दक्षिण-पूर्व व फिर पूर्वोत्तर दिशा में घूम जाती है और इसके बाद पूर्व में विजयवाड़ा में अपने डेल्टा शीर्ष की ओर बहती है।

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