अमेज़न

Submitted by Hindi on Fri, 07/29/2011 - 13:18
अमेज़न प्राचीन पश्चिमी जनविश्वास के अनुसार नारी योद्धा जिनका पुक्सीन सागर के निकट पोंतस में आवास बताया जाता है। कहते हैं कि इन नारी योद्धाओं का अपना स्वतंत्र राज्य था और उसपर उनकी रानी थर्मोदीन नदी के तट पर बसी अपनी राजधानी थेमिस्कीरा से राज्य करती थी। आनुश्रुतिक विश्वास के अनुसार इन योद्धाओं ने इस्कीदिया, थ्रोस, लघु एशिया और ईजियन सागर के अनेक द्वीपों पर हमले किए थे और एक समय तो उनकी सेनाएँ अरब, सीरिया और मिस्र तक पहुँच गई थीं। उनके देश में मर्द को बसने का अधिकार न था, परंतु वे अपनी अद्भुत जाति को लुप्त होने से बचाने के लिए अपनी पड़ोसी जाति के पुरुषों में जाकर कुछ दिन रह आती थीं। इस संबंध से जो पुत्र होते थे वे या तो मार डाले जाते थे या अपने पिताओं के पास भेज दिए जाते थे और कन्याएँ रख ली जाती थीं जिन्हें उनकी माताएँ कृषिकर्म, आखेट और युद्ध करना सिखाती थीं। ग्रीकों का विश्वास था कि अमेज़न योद्धाओं के दाहिना स्तन नहीं होता था जिससे वे अस्त्र-शस्त्र आसानी से चला सकती थीं। ग्रीक किंवदंतियों में तो अनेक ग्रीक वीरों का इन नारी योद्धाओं से युद्ध हुआ है जिसके दृश्य ग्रीक कलावंतों ने बार-बार अपने देवताओं की चौखटों पर उभारे हैं। ग्रीक कला में अमेज़न-नारी-योद्धा का आकलन पर्याप्त हुआ है। एक अमेज़न (मात्तेई) की अत्यंत सुंदर मूर्ति वातिकन के संग्रहालयों में आज भी सुरक्षित है।

अमेजन 2. द. अमरीका की एक प्रसिद्ध नदी है जो जल की मात्रा के विचार से संसार की सबसे बड़ी तथा सर्वाधिक लंबी नदियों में दूसरी है। इस नदी की संपूर्ण द्रोणी विषुवत्‌रेखीय क्षेत्र में पड़ती है। पेरूवियन ऐंडीज़ पर्वत के पूर्वांचल में 12,000 फुट की ऊँचाई पर स्थित लागो लारीकोचा नामक झील से निकलकर पेरू तथा ब्राजील में लगभग 4,000 मील पूर्व-उत्तर-पूर्व प्रवाह के अनंतर भूमध्यरेखा पर अंधमहासागर (ऐटलांटिक ओशन) में गिरती है। यह मुहाने से (90 मील पर स्थित) पारा तक बड़े सामुद्रिक पोतों, (2,300 मील पर स्थित) इकीटोस तथा छोटे सामुद्रिक पोतों और (2,786 मील पर स्थित) आचुअल प्वाइंट तक छोटे जहाजों के लिए नौकागम्य है। धारा की औसत गति तीन मील प्रति घंटा है जो सँकरे स्थानों में पाँच मील तक हो जाती है। नवंबर से जून तक नदी बढ़ाव की ओर रहती है। सुदूर तक यह प्रमुख दो धाराओं में विभक्त होकर बहती है, पर मुहाने से 400 मील अंत:स्थित ओवीडोज के बाद एककबद्ध होकर लगभग एक मील चौड़ी तथा 200 फुट गहरी नदी के रूप में विशाल जलराशि लाती है, जा समुद्र में मुहाने से 200 मील दूर तक स्पष्ट पहचानी जा सकती है। बाढ़ में घाटी का न केवल निचला मैदान ही (इगापो) प्रत्युत्‌ ऊपरी मैदान (वारगेम) के लाखों वर्ग मील का क्षेत्र भी झील सा हो जाता है।

अमेज़न में 27,22,000 वर्ग मील क्षेत्र से लगभग दो सौ नदियों का जल आता है। अधिकांश सहायक नदियाँ दक्षिण से आती हैं जिनमें हुआल्गा, उकायली, जावारी, जुटाई, जुरुआ, तेभी, कोआरी, मैडिरा, तापाजोज, जिंगु आदि प्रमुख हैं। सेंटियागो, मोरोना, जापुरा रायो, निग्रो, औतुमा, ट्रांवेटा आदि उत्तरी सहायक नदियाँ हैं। भूगोलवेत्ताओं के अनुसार अमेजन का निचला भाग सामुद्रिक खाड़ी था जिसकी लहरों के अपक्षरण से ओवीडोज के पास का पर्वतीय स्थल कटकर बह गया। नदी के मुहाने पर विशाल भित्तिवार (बोर) आता है जिसके कारण नदी के जल के साथ विशाल परिमाण में मिट्टी आने पर भी डेल्टा नहीं बन पाता।

नदी तट पर स्थित पारा (जनसंख्या 3,50,000), मनाओज (ज. सं. 1,00,000), इक्वीटोस (ज. सं. 30,000) और संतारम (ज. सं. 7,000) आदि बंदरगाहों द्वारा रबर, कहवा, चमड़ा, तंबाकू, लकड़ी, कपास, सुपारी, काकाओ, नारंगी, मांस, मछली, तथा अन्य उष्णकटिबंधीय वस्तुओं का निर्यात होता है। अमेज़न द्रोणी में अनेक प्रकार के पेड़, पौधे, झाड़ियाँ, लताएँ तथा जीवजंतु, कीट, पतंग, मछलियाँ आदि पाई जाती हैं जिनके बीच कटुतम जीवनसंघर्ष है। अत: यहाँ विभिन्न औद्योगिक, परिवाहनकि, मानवशास्त्रीय, भौगोलिक, वैज्ञानिक एवं खनिज संबंधी अन्वेषण एवं सर्वेक्षण कार्य हो रहे हैं। 1927 एवं 1928 में अमरीकी भौगोलिक परिषद् ने भी हिस्पानिक अमरीका (लैटिन अमरीका) के मानचित्र (मापक 1 : 10,00,000) की सामग्री के कल्पनार्थ विशेषज्ञों के दो दल भेजे थे।

यूरोपियनों में से स्पेन निवासी बिसेंट यानेज पिंजन ने सर्वप्रथम सन्‌ 1500 ई. में अमेज़न का पता लगाया और मुहाने से 50 मील अंतर्देश तक यात्रा की। फ्रांसीसी डी आरलेना ने इसका अमेज़ोनाज़ नाम रखा और 1541 में ऐंडीज पर्वत से लेकर समुद्र तक इसकी यात्रा की।

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