सिक्किम

Submitted by Hindi on Mon, 08/29/2011 - 11:00
सिक्किम अधिकतम लंबाई 73 मील और अधिकतम चौड़ाई 55 मील क्षेत्रफल 2,745 वर्ग मील। इसके उत्तर में तिब्बत, पूर्व में भूटान पश्चिम में नेपाल और दक्षिण में भारत गणतंत्र है। इसकी राजधानी गंगटोक है। सिक्किम का 30 प्रतिशत से अधिक भाग जंगलों से घिरा है। यहाँ शाल के जंगल हैं। लगभग 4000 किस्म के फूलने फलने वाले पौधे तथा छोटी झाड़ियाँ हैं। यहाँ की मुख्य उपज धान, ज्वार, बाजरा और मक्का है। संतरा और सेब बहुत होते हैं। बड़ी इलायची भी होती है। पशुओं में बर्फीला चीता, भालू, कस्तूरी मृग और बारहसिंगे पाए जाते हैं।

1950 ई. की संधि के अनुसार सिक्किम भारत द्वारा संरक्षित है। इसकी सुरक्षा, विदेशी मामले, डाकतार, सीमा की सड़कों तथा अन्य महत्वपूर्ण सड़कों आदि के विकास का पूर्ण उत्तरदायित्व भारत सरकार का है। सिक्किम के अंदरूनी मामले में भारत दखल नहीं देता। सिक्किम की आबादी 1,65,000 है जिसमें नेपाली 65 प्रतिशत, लेप्चा 33 प्रतिशत और तिब्बती या अन्य लोग 2 प्रतिशत हैं। यहाँ की स्त्रियों को बड़ी स्वतंत्रता है। अधिकांश स्त्रियाँ, विशेषत: लेप्चा या तिब्बती एक लंबा सा लबादा, जिसे 'बक्कू' कहते हैं, पहनती हैं। यह कमर से कसकर बँधी रहती है। स्त्रियाँ सिर पर टोपी भी पहनती हैं। अब कोट, पतलून, सलवार, कमीज और साड़ी का भी प्रचलन हो गया है। यहाँ के निवासी बौद्ध धर्मावलंबी हैं पर अधिकांश नेपाली हनुमान जी की पूजा भी करते हैं। शिक्षा में सिक्किम पिछड़ा हुआ है। इसके आर्थिक विकास के लिए भारत ने पर्याप्त धन दिया है। शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग-धंधे, पशुपालन, खेती-बारी आदि का पर्याप्त विकास हो रहा है। अनेक लोअर प्राइमरी, अपर प्राइमरी, मिडिल और हाई स्कूल खुल गए हैं। स्कूलों में नेपाली और तिब्बती भाषाएँ अनिवार्य रूप से पढ़ाई जाती हैं। हिंदी पढ़ाने का भी प्रबंध हुआ है।

तिब्बत के लिए दो दर्रे नाथुला (15,512 फुट) और जेलेप ला (13,254 फुट) हैं। इन्हीं दरों द्वारा पहले तिब्बत से लाखों का व्यापार होता था। यहाँ कई पर्वत शिखर हैं जिनमें कंचनचंघा (ऊँचाई 28,140 फुट), सिनियोल्चु (22,620 फुट), किनकिन झाऊ (22,900 फुट), चोमियोमो (22,385 फुट) प्रमुख हैं। कंचनचंघा उनका पवित्र शिखर है जिसका वे लोग पूजोत्सव मनाते हैं। यहाँ वर्षा अधिक (औसत 137 इंच) होती है। यहाँ कई छोटी-छोटी नदियाँ लाचिन, लाचुंग और जिस्ता हैं जो उत्तर से बहती हुई दक्षिण में सँकरी हो गई हैं।

इतिहास- 13वीं शती में लेप्चा लोग बर्मा और असम से आकर सिक्किम में बस गए। कुछ दिनों के बाद वे लोग वहाँ के राजा बन बैठे। तिब्बत से आए कुछ लोग लेप्चाओं को हराकर वहाँ के शासक (1641 ई.) में बन बैठे और इन्होंने बौद्ध लामा धर्म को स्थापित किया। 18वीं शती तक सिक्किम तिब्बत के अधीन था। 1780 ई. में भूटान ने सिक्किम पर आक्रमण किया था। 1816 ई. में अंग्रेजों ने सिक्किम के साथ संबंध स्थापित किया। 1849 ई. में आर्किबॉल्ड केंपेल, दार्जिलिंग के सुपरिटेंडेंट और सर जोसेफ हूकर को कैद कर लिया। इसके फलस्वरूप अंग्रेजों ने 1861 ई. में एक संधि सिक्किम पर बलात्‌ थोपकर उसे ब्रिटिश सत्ता का संरक्षित राज्य बना लिया। 1890 ई. में एक दूसरी संधि हुई जिसके द्वारा सिक्किम ने अंग्रेजों का संरक्षण स्वीकार कर लिया। भारत को स्वतंत्रता मिलने पर 1947 ई. में भारत के अधीन सिक्किम आ गया और 1950 ई. के दिसंबर में संधि हुई जिसका उल्लेख ऊपर हुआ है। 1953 ई. में शासन के लिए एक परिषद (काउंसिल) बनी जिसके 5 सदस्य चुने हुए तथा 3 सदस्य नामजद होते हैं। नामजद सदस्यों में से दो की सहायता से महाराजा राज्य का शासन चलाते हैं। राज्य में शांति बनाए रखने और कानून पालन के लिए न्यायालय है।

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