सोनपुर

Submitted by Hindi on Mon, 08/29/2011 - 15:37
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सोनपुर बिहार के सारन जिले का एक कस्बा है। यह पटना नगर से लगभग तीन मील उत्तर, गंगा और गंडक नदियों के संगम पर बसा है। यह स्थान दो वस्तुओं, लंबे प्लेटफार्म तथा मेले के लिए प्रसिद्ध है। पश्चिम और पूर्व से पूर्वोत्तर रेलवे द्वारा और पटना से स्टीमर द्वारा गंगा पार कर फिर रैल द्वारा सोनपुर पहुँचा जाता है। यहाँ का रेलवे प्लेटफार्म लंबाई के लिए सुप्रसिद्ध है। सोनपुर की सबसे अधिक प्रसिद्धि उस मेले के कारण है जो कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर यहाँ लाता है और एक मास तक चलता है। भारत के कोने कोने से हजारों व्यक्ति एवं मवेशी इस मेले में आते हैं। यह मेला वस्तुत: भारत का ही नहीं वरन्‌ एशिया का सबसे बड़ा मेला है। सोनपुर का पुराना नाम हरिहरक्षेत्र है। यहाँ का मेला हरिहरक्षेत्र के मेले के नाम से भी प्रसिद्ध है। पुराणों में इसे महाक्षेत्र भी कहा गया है। गंगा और वैदिक काल की नदी सदानीरा (नारायणी) के इन संगम पर एक बार ऋषि, साधु तथा संत बहुत बड़ी संख्या में एकत्र हुए, उनमें वैष्णव एवं शैव दोनों में गंभीर वाद विवाद हुआ, अंत में दोनों ने मिलकर कार्य करने का निश्चय किया एवं विष्णु और शिव के नामों पर इसका नाम हरिहरक्षेत्र रखा। इसके निकट ही कोनहरा घाट पर पौराणिक गज और ग्राह की लड़ाई हुई थी। प्यासा गज अपनी प्यास बुझाने के लिए नदी के पानी में गया तब ग्राह (भयानक मगर्मच्छ) ने उसे पकड़ लिया, फिर दोनों में युद्ध छिड़ा, जो ऐसा कहा जाता है कि बहुत वर्षों तक चलता रहा। अंत में विष्णु की कृपा से ग्राह मारा गया और गज की विजय हुई। कुछ लोग इसका यह भी अर्थ लगाते हैं कि गज और ग्राह का युद्ध वस्तुत: अच्छाइयों और बुराइयों के बीच युद्ध था, जिसमें अच्छाइयों की विजय हुई। यहाँ के मंदिर में विष्णु और शिव दोनों की मूर्तियाँ स्थापित हैं। ऐसा कहा जाता है कि हरिहर नाथ की स्थापना विभिन्न विचारों के मिलन, एकता और बंधुत्व बनाए रखने के लिए की गई थी।

यहाँ के मेले में बड़ी बड़ी दुकानें कलकत्ता और बंबई तक से आती हैं और लाखों व्यक्ति अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति यहाँ से करते हैं। हाथियों का तो इतना बड़ा मेला और कहीं नहीं लगता। हजारों की संख्या में हाथी यहाँ आते हैं तथा उनका क्रय विक्रय होता है। मेले का प्रबंध बिहार सरकार की ओर से होता है। स्थान स्थान पर पानी के कल, बिजली के खंभे और शौचालय आदि बनाए जाते हैं। स्थान को साफ सुथरा बनाने के लिए पूरा प्रबंध किया जाता है ताकि कोई बीमारी न फैल सके और न ही लोगों को किसी प्रकार का कष्ट हो। लोगों को लाने तथा ले जाने के लिए कई स्पेशल गाड़ियाँ चलाने का प्रबंध किया जाता है। 1967 ई. के मेले में लगभग 2000 हाथी और 50,000 से ऊपर मवेशी एकत्र हुए थे। देखें 'हरिहर क्षेत्र'।

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संदर्भ
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बाहरी कड़ियाँ
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