सहस्त्राब्दी विकास लक्ष्य की 2010 तक भारत में स्थिति

Submitted by Hindi on Wed, 08/31/2011 - 11:02
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संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) द्वारा भारत पर तैयार की गई एक आकलन रिपोर्ट के निष्कर्ष निम्न प्रकार है। जबकि वैश्विक स्तर पर स्वीकृत आठ सहस्त्राब्दी विकास लक्ष्यों को हासिल करने की समय सीमा समाप्त होने में मात्र पांच साल रह गए हैं। गरीबों की कुल संख्या 1993-94 के 32 करोड़ से घट कर 2004-05 में 30.10 करोड़ हो गई। इस दर से 2015 में भी गरीबी रेखा से नीचे का जीवन जीने वालों की संख्या 27.90 करोड़ रह जाएगी।

कुपोषण के प्रभाव को दूर करने की भारत की गति धीमी है। कुपोषण के शिकार बच्चों की संख्या 1998-99 के लगभग 47 प्रतिशत से घट कर 2005-06 में लगभग 46 प्रतिशत तक ही आ पाई है। इस दर से 2015 तक कुपोषण के शिकार बच्चों की संख्या 40 प्रतिशत बनी रहेगी। वर्ष 2008 में तपेदिक (ट्यूबरकुलोसिस) के 19 लाख मामले थे और भारत में इन रोगियों की संख्या दुनिया का पांचवां हिस्सा थी। लेकिन देशभर में मरीजों को इलाज मुहैया कराने के मामले में भारत ने अति उल्लेखनीय प्रगति की। वर्ष 2008 में 15 लाख से अधिक रोगी इलाज के लिए पंजीकृत किए गए थे।

पिछले दशक के दौरान भारत के वन क्षेत्र में 728 वर्ग किलोमीटर की बढ़ोतरी हुई। जल आपूर्ति की उपलब्धता 1992-93 के 68.2 प्रतिशत से बढ़कर 2007-08 में 84.4 प्रतिशत हो गई। और शहरी क्षेत्रों में जल उपलब्धता बढ़कर 95 प्रतिशत हो गई। भारत में साफ-सफाई का स्तर दुनिया में सबसे निम्न स्तर पर है और यह देश के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। देश की आधी आबादी के पास शौचालय की सुविधा उपलब्ध नहीं है और ग्रामीण इलाकों में शौचालयों की अनुपलब्धता का प्रतिशत 66 प्रतिशत है।

युवा साक्षरता 1991 में 61.9 प्रतिशत थी, जो 2001 में बढ़कर 76.4 प्रतिशत हो गई। भारत में 2012 के अंत तक शत प्रतिशत युवा साक्षरता की संभावना है। प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा में लिंग समानता संभवत: हासिल हो जाएगा, जबकि उच्च शिक्षा में ऐसा नहीं हो पाएगा, लेकिन गैर कृषि क्षेत्र में दिहाड़ी रोजगार में महिलाओं की हिस्सेदारी 2015 तक लगभग 24 प्रतिशत तक होने की उम्मीद की जा सकती है, जो कि समानता से काफी दूर है।

बाल मृत्यु दर 1990 में 125 प्रति हजार से घट कर 2005-06 में 76.6 प्रतिशत प्रति हजार जन्म पर आ गई। इस दर से 2015 तक बाल मृत्यु दर 70 प्रति हजार जन्म तक रहेगी। जबकि लक्ष्य प्रति हजार जन्म पर 42 मृत्यु का है।

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