ऐसे चला तो पांच साल में सूख जाएगा गुड़गांव

Submitted by Hindi on Fri, 09/02/2011 - 17:09
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आईबीएन-7


गुड़गांव। सिटिजन जर्नलिस्ट भवानी शंकर त्रिपाठी उन लोगों में से हैं जिन्होंने पानी की कीमत समझी और उसे बचाने के उपाय तो ढूंढे ही, पानी जैसी बुनियादी सुविधा से महरूम होने के लिए आवाज भी उठाई। त्रिपाठी पिछले दस साल से गुड़गांव में रह रहे हैं। गुड़गांव में हर दिन तकरीबन 6 से 8 घंटे के लिए बिजली चली जाती है। कभी-कभी 14 घंटे तक बिजली नहीं आती। इसका सीधा असर पड़ता है पानी की सप्लाई पर। यहां रहने वाले लोगों को महंगे दामों पर टैंकरों से पानी खरीदना पड़ता है। आमतौर पर 4000 लीटर का टैंकर 350 रुपए में बिकता है लेकिन अब एक टैंकर की कीमत 700 रुपए तक हो गई है।

गुड़गांव में पानी की सप्लाई एक कैनाल द्वारा आती है। उसका ट्रीटमेंट सोनीपत और गुड़गांव में होता है लेकिन बसई से लेकर यहां तक जमीन की ढाल ऊंची हो जाती है जिससे पानी धीरे-धीरे वापस चला जाता है। बिजली की कमी के कारण यहां पानी की सप्लाई में दिक्कत होती है। जैसे ही बिजली जाती है पानी ऊपर चढ़ने के बजाय वापस गिरना शुरू हो जाता है।

यहां पर रहने वाले लोग पानी सीधा जमीन से निकालते हैं और बड़ी मोटर के जरिए ऊंची इमारतों तक भेजते हैं। अगर यही हाल रहा तो अगले पांच साल तक गुड़गांव सूख जाएगा। सवाल ये है कि गुड़गांव में रहने वालों को पानी जैसी बुनियादी जरूरत के लिए इतनी परेशानी क्यों उठानी पड़ती है। गुड़गांव को फिलहाल 450 मेगावाट बिजली मिलती है जबकि इसकी जरूरत लगभग 1500 मेगावाट बिजली की है।बिजली के अलावा पानी के कम होने की असली वजह है भूजल का स्तर गिरना और आधारभूत ढांचे का ना होना। केंद्रीय भूजल बोर्ड के मुताबिक 1995 में जल का स्तर 25 मीटर था जो 2006 में घटकर 40 मीटर हो गया। आज 45 मीटर की गहराई पर भी पानी मुश्किल से मिलता है। अगर ऐसा ही रहा तो शायद अगले 10 साल में गुड़गांव में भूजल पूरी तरह खत्म हो जाए।

सरकार के रिकॉर्ड के हिसाब से गुड़गांव की जनसंख्या 2001 में 7 लाख के करीब थी लेकिन अब ये 18 लाख तक पहुंच गई है जबकि सरकारी रिकार्ड कहते हैं कि शहर की बनावट और इसके संसाधन सात से आठ लाख की जनसंख्या को ही संभाल सकते हैं। बढ़ती जनसंख्या के हिसाब से बुनियादी सुविधाओं और सरकारी नीतियों में फेरबदल किया जाना चाहिए। सरकार ने जो वाटर हार्वेस्टिंग प्लांट लगाए हैं वो भी ठीक से काम नहीं कर रहे। जो चालू भी हैं वो भी SURGE जैसे समूहों की बदौलत। एक सिटिजन जर्नलिस्ट के तौर पर भवानी ने हुडा के अधीक्षक अभियंता पंकज कुमरा से मिलने का फैसला किया। कुमरा साहब कैमरे पर नहीं आए लेकिन उनके साथ बातचीत से पता लगा कि गुड़गांव में 2093 मिलियन लीटर पानी की सप्लाई की जाती है जो शहर के लिए काफी है। अगर ये बात सही है तो सारे शहर में ट्यूबवेल की बोरिंग क्यों जारी है ये ऐसा सवाल है जिसका एक अथॉरिटी को जवाब देना चाहिए लेकिन गुड़गांव में कई अथॉरिटी की कहानी नई नहीं है जिसकी वजह से गुड़गांव की दुर्दशा ये है।
 

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