क्यों मर रहे हैं दिल्ली के पेड़?

Submitted by Hindi on Mon, 09/05/2011 - 10:24
Printer Friendly, PDF & Email
Source
आईबीएन-7


नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में पेड़ों का हाल बेहाल है। सिटिज़न जर्नलिस्ट देवाशीष भट्टाचार्य ने पाया कि एक भरा-पूरा नीम का पेड़ हल्की आंधी में ही गिर गया। सवाल उठा कि बहुत पुराना और बाहर से दिखने में स्वस्थ ये पेड़ अचानक कैसे गिर गया। पता चला कि पेड़ अंदर ही अंदर खोखला हो चुका था। वजह थी पेड़ के आस-पास बनाया गया सीमेंट का चबूतरा।

पेड़ों के आसपास कंक्रीट की पक्की जमीन होने से बारिश का पानी रिस कर नीचे नहीं जा पाता और ऐसे में पेड़ सूख जाता है। सीमेंट और पेड़ के बीच जो थोड़ी सी जगह छोड़ी जाती है उसमें बारिश के दिनों में अक्सर पानी भर जाता है। ये पानी जब नीचे नहीं जाता तो अंदर ही अंदर पेड़ को गला देता है। ऐसे में पेड़ हल्की सी आंधी भी नहीं झेल पाते। पेड़ों के आसपास सीमेंट के इस तरह के चबूतरे पूरी दिल्ली में मौजूद हैं।

RTI के जरिए देवाशीष ने जाना कि दिल्ली में हो रहा ये कांक्रीटीकरण पेड़ों के लिए खतरनाक साबित हो रहा है। दिल्ली सरकार ने 1994 में इसके लिए Trees Act बनाया। इस Act के मुताबिक पेड़ों को काटना या उन्हें किसी भी किस्म का नुकसान पहुंचाना कानूनन जुर्म है। लेकिन इसके बाद भी पेड़ बदहाल हैं। लुटियंस जोन सहित राजधानी के कई VVIP इलाकों में पेड़ों की हालत इतनी ही खस्ता है। 2007 में दिल्ली के तिलक नगर इलाके में बिना किसी कारण के पेड़ों के गिरने के मामले अचानक बढ़ गए। NDMC ने इसकी वजह जानने के लिए देहरादून के Forest Research Institute से इसकी जांच करवाई।

FRI ने अपनी रिपोर्ट में साफ तौर पर कहा कि जड़ें खोखली और कमजोर होने की वजह से ही पेड़ इस तरह गिर रहे हैं। FRI का मानना है कि इन पेड़ों को बचाने के लिए जरूरी है कि जल्द से जल्द उनके आसपास मौजूद कांकरीट और सीमेंट के फुटपाथ तोड़े जाएं।

नियम कहते हैं कि फुटपाथ और पेवमेंट बनाते समय पेड़ के आसपास 6 बाई 6 फुट की जगह छोड़ी जानी चाहिए लेकिन खुद सरकारी विभाग इन नियमों की परवाह नहीं करते। नतीजा पिछले तीन सालों में आंधी तूफ़ान के दौरान 271 पेड़ गिर चुके हैं। इसके बावजूद शहर की खूबसूरती के नाम पर NDMC का सिविल विभाग पेड़ों का गला घोंटने में जुटा है।

सुप्रीम कोर्ट के सामने भी पेवमेंट्स बनाने का काम चल रहा है। ये सही है कि फुटपाथ और पेवमेंट लोगों के चलने के लिए जरूरी हैं मगर सीमेंट के पेवमेंट पेड़ों की बर्बादी का कारण बन रहे हैं। पेवमेंट बनाने के लिए हमारे पास दूसरे विकल्प भी मौजूद हैं। लाल बजरी देखने में सुंदर है और रखरखाव में सस्ती। ये पेड़ों के लिए अच्छी साबित होती है क्योंकि बारिश का पानी सीधे धरती में जाता है।

दिल्ली के कुछ ऐसे इलाके हैं जहां कंक्रीट और सीमेंट की बजाय घास और लाल बजरी से पेवमेंट बनाए गए हैं। हाल ही में आई सीपीसीबी की एक रिपोर्ट ने ये खुलासा किया कि दिल्ली में प्रदूषण का असर अब यहां के बच्चों पर दिखने लगा है। प्रदूषण की वजह से दिल्ली के स्कूली बच्चों के फेफड़े 43 फीसदी तक कमज़ोर हो चुके हैं।

ऐसे में ये बात और भी जरूरी हो जाती है कि जो पेड़ मौजूद हैं उनके रखरखाव पर सरकार ध्यान दे। NDMC के अधिकार क्षेत्र में आने वाले किसी भी इलाके में निर्माण से पहले सिविल विभाग को पेड़ों के लिए Horticulture विभाग से अनुमति लेनी होती है। RTI के ज़रिये देवाशीष ने जाना की Horticulture विभाग से ऐसी कोई अनुमति नहीं ली जा रही है।

NDMC के अधिकारियों से बात की लेकिन सरकारी अधिकारियों से कुछ जानना आसान नहीं। सिविल विभाग के अधिकारी ने कैमरे पर बात करने से इनकार कर दिया। Horticulture विभाग के निदेशक ने कहा कि इसके लिए उन्हें Chairman से अनुमति लेनी होगी और Chairman ने कहा कि उनके पास बातचीत के लिए समय नहीं है।
 

इस खबर के स्रोत का लिंक:

More From Author

Related Articles (Topic wise)

Related Articles (District wise)

About the author

नया ताजा