82 साल के शिक्षक ने सुधारी तालाबों की 'सेहत'

Submitted by Hindi on Thu, 09/29/2011 - 09:19
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नई दुनिया, 29 सितंबर 2011
नई दिल्ली। जिस उम्र में बड़े-बुजुर्ग लाठी का सहारा लेने को मजबूर होते हैं, उस पड़ाव पर एक सेवानिवृत्त शिक्षक ने कानून की ‘लाठी’ थामकर समाज और पर्यावरण की भलाई का बीड़ा उठाया। गांव के बदहाल तालाबों की खातिर 82 की उम्र में हाईकोर्ट तक (एक तरफ से लगभग 35 किलोमीटर) का सफर किया और तालाबों की ‘सेहत’ को सुधरवा कर दम लिया। हाईकोर्ट के संज्ञान में आते ही तालाबों की स्थिति सुधरने लगी, भविष्य में कोताही न बरती जाए, इसके लिए कोर्ट ने संबंधित विभागों को हर 15 दिन पर तालाबों का निरीक्षण करवाने का आदेश दिया है।

यह बुजुर्ग हैं कंझावला के रानीखेड़ा गांव निवासी रामकिशन। बुधवार को हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा और जस्टिस संजीव खन्ना की डिवीजन बेंच ने जनहित में उनके प्रयासों की बेहद सराहना की। डिवीजन बेंच ने कहा कि उन्होंने उम्र के अधिकतम पड़ाव में प्रासंगिक जनहित याचिका दाखिल की। इसके पीछे उनका कोई निजी स्वार्थ नहीं था। दूसरों को उनके आचरण और प्रयासों का अनुकरण करना चाहिए।

रामकिशन ने हाईकोर्ट को पत्र लिखकर बताया था कि अदालत के आदेश के बावजूद गांव के सैकड़ों साल पुराने तालाबों का अस्तित्व खतरे में है। इन प्राकृतिक जलाशयों को बचाने के प्रयास नहीं हो रहे हैं। तालाब न सिर्फ जल का स्रोत हैं, बल्कि इनसे गांववालों की आस्थाएं भी जुड़ी हैं।

कोर्ट ने इस पत्र को जनहित याचिका में परिवर्तित करके दिल्ली सरकार, डीडीए व अन्य पक्षों को तलब किया था। पिछली सुनवाई पर बुजुर्ग ने खुद कोर्ट आकर तालाबों की बदहाली के फोटोग्राफ्स दिखाए और गांववालों का पक्ष रखा। इस पर डिवीजन बेंच ने दो वकीलों की कमेटी गठित करके गांव का दौरा करने का आदेश दिया। कमेटी ने हाईकोर्ट में बताया कि कोर्ट के संज्ञान लेने के पश्चात संबंधित विभाग सक्रिय हो गए हैं। तालाबों की देखभाल शुरू की जा चुकी है। कमेटी ने संबंधित फोटोग्राफ भी पेश किए। डिवीजन बेंच ने तालाबों की नियमित देखरेख का आदेश देकर याचिका का निपटारा कर दिया।

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