गंगा स्वच्छता अभियान: आज तक

Submitted by Hindi on Wed, 12/28/2011 - 17:04
Source
राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान, चतुर्थ राष्ट्रीय जल संगोष्ठी, 16-17 दिसम्बर 2011
जीवनदायिनी गंगा अब मैली हो रही हैजीवनदायिनी गंगा अब मैली हो रही है इस अभिभाषण में 1985 में गंगा की सफाई को लेकर आरंभ हुई ‘गंगा कार्य योजना’ ‘केंद्रीय गंगा प्राधिकरण’ के गठन से लेकर आज तक इस दिशा में हुई प्रगति की समीक्षा की गई है, कार्य योजना की परिणतियों और निष्पत्तियों पर विमर्श भी किया गया है। योजना की खामियों को लेकर पर्यावरण एवं वन मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की विवेचना की गई है और भारत सरकार द्वारा निर्धारित लक्ष्यों की रूपरेखा भी प्रस्तुत की गई है जिसके सफल होने की आशाएं हैं।

गंगा पर प्रदूषण का हमला मैदानी भाग में उतरते ही हरिद्वार से शुरू हो जाता है और फिर सागर में मिलने तक इसके 2525 किमी. लंबे बहाव मार्ग के दोनों ओर बसे शहरों का मल, कूड़ा-कचरा इसे अपने में समेटना पड़ता है। शहरी मल के अतिरिक्त उद्योगों से निकले व्यर्थ पदार्थ, रसायन, अधजली लाशें, राख आदि गंगा में मिलते रहते हैं जो इसे दूषित करते हैं।

औद्योगिक अपशिष्ट और मल ऐसे 29 शहरों से आकर गंगा में गिरता है, जिनकी आबादी 1 लाख से ऊपर है। ध्यान देने योग्य तथ्य यह है कि ऐसे शहरों में से केवल 15 शहरों में ही स्वच्छ मल निपटान की व्यवस्था है। 23 ऐसे शहर, जिनकी आबादी 55 हजार से ऊपर है, अपनी मैल गंगा को सौंपते हैं। इसके अतिरिक्त 48 और छोटे-बड़े शहर अपना उच्छिष्ट गंगा में प्रवाहित करते हैं। ये सभी शहर उ.प्र., बिहार और पश्चिम बंगाल में गंगा के किनारे बसे हुए हैं।

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