अक्षय ऊर्जा की ओर दस कदम

Submitted by Hindi on Fri, 01/20/2012 - 11:03

भारत में कुडनकुलम की चर्चा इन दिनों खूब है। कुडनकुलम की चर्चा के पीछे का राज हमारी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने का तर्क है। हमारे पूर्व राष्ट्रपति और देश के सम्मानित वैज्ञानिक एपीजे अब्दुल कलाम तक ने कहा है कि कुडनकुलम की परमाणु ऊर्जा परियोजना का विरोध बंद कर देना चाहिए क्योंकि वह हमारी ऊर्जा जरूरतों के लिए जरूरी है। अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए भारी भरकम और खतरों से भरी ऊर्जा परियोजनाएं लगाना क्या इतना जरूरी है? शायद नहीं। ऊर्जा की हमारी जरूरतें हमारे अपने साधनों से भी पूरी हो सकती हैं। कम से कम ग्रीनपीस की एक रिपोर्ट तो हमें उम्मीद की वही किरण दिखा रही है।

एपीजे अब्दुल कलाम ज्यादा दूर न जाकर उसी तमिलनाडु के ओदांथुराई पंचायत को देखें तो उन्हें कुडनकुलम के परमाणु ऊर्जा संयत्र के बारे में बयान देने की जरूरत नहीं पड़ेगी। ग्यारह गावों की इस पंचायत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों को जिस तरह पूरा किया है वह न केवल कलाम को जवाब है बल्कि पूरे देश में ऊर्जा के भविष्य का सुनहरा मॉडल भी है। सोलर, बायोगैस और पवन ऊर्जा के समुचित प्रयोग से उन्होंने अपनी 350 किलोवाट की ऊर्जा जरूरतों को आसानी से पूरा कर लिया है। इसके लिए उन्हें किसी बाहरी कंपनी को भारी भरकम बिल भी अदा नहीं करना पड़ता। केवल ओदांथुराई पंचायत ही नहीं बल्कि ऐसी दस कहानियों को जोड़कर ग्रीनपीस ने एक दस्तावेज ही तैयार कर दिया है। ग्रीनपीस का एक विभाग अक्षय ऊर्जा पर काम कर रहा है जिसके मुखिया रमापति कुमार है। विभाग देश में ऊर्जा व्यवस्था का ऑडिट कर रहा है। इसी कड़ी में उसने देशभर में ऐसे ऊर्जा प्रयोगों का एक संकलन तैयार किया है जिसमें वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों से ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने की कहानियां। इन कहानियों में बिहार के प्रयोग भी शामिल हैं तो लेह लद्दाख की भी ऊर्जा गाथाएं हैं। इस रिपोर्ट को गुरुवार को दिल्ली में जारी किया गया जिसका नाम है- ‘टेकिंग चार्ज, केस स्टेडीज़ आफ डिसेंट्रालाइज्ड ए रिन्युलएबिल इनर्जी प्रोजेक्ट्स इन इंडिया इन 2010’। रिपोर्ट को ग्रामीण विकास मंत्री माननीय अगाथा संगमा और जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के सांसद प्रो. जब्बीइर हुसैन ने जारी किया।

रिपोर्ट जारी करते हुए सुश्री अगाथा संगमा ने कहा कि “यह रिपोर्ट दर्शाती है कि कैसे अक्षय ऊर्जा देश को ऊर्जा सशक्तिकरण की राह पर आगे बढ़ा रही है, खासतौर से गांवों में। लोगों को बिना पर्यावरण को नुकसान पहुँचाए भरोसेमंद ऊर्जा मिल रही है। अब जरूरत है कि एक टिकाऊ ऊर्जा समाधान की ओर देश तेजी से आगे बढ़े और इसकी राह यह रिपोर्ट दिखा रही है।” उन्होंने माना कि यह रिपोर्ट देशव्यापी विकेंद्रीकृत अक्षय ऊर्जा प्रणाली से जुड़ी दस सफल गाथाओं का एक विहंगम दस्तावेज है जो यह साबित करता है कि केन्द्रीकृत विशाल विद्युत परियोजनाएं देश के गांवों को रौशन बनाने में निरुददेश्य हैं। साथ ही पर्यावरण तथा इंसान के लिए विनाशकारी साबित हो रहीं हैं।

इस रिपोर्ट को पेश करते हुए क्लारइमेट व इनर्जी कैम्पेनर मनीष राम ने कहा कि “यह रिपोर्ट मात्र अक्षय ऊर्जा कहानियों का अध्ययन भर नहीं है बल्कि इस बात का प्रमाण है कि अक्षय ऊर्जा का विकेंद्रीकृत ढांचा ही भारत को ऊर्जा सशक्त बना सकता है। अक्षय ऊर्जा देश के विभिन्न हिस्सों में परंपरागत ऊर्जा स्रोत की जगह ले चुकी है। जो नीति निर्माताओं को देश के ऊर्जा अभाव को दूर करने के लिए एक सशक्त‍ एवं समृद्ध विकेंद्रीकृत ऊर्जा व्यवस्था से निर्माण की राह दिखा रहा है। विशेषकर दूर-दराज के उन हिस्सों में जहां आज तक न तो केंद्रीयकृत ऊर्जा परियोनाओं के लाभ पहुंचे और न ही भविष्य में ऐसा होने की उम्मीद है।”

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