टूर फॉर वाटर में बच्चों ने देखे ऐतिहासिक जलस्रोत

Submitted by Hindi on Fri, 03/23/2012 - 17:41
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नीर फाउंडेशन
नीर फाउंडेशन के निदेशक रमन त्यागी बच्चों को ऐतिहासिक जलस्रोत के बारे में बताते हुएनीर फाउंडेशन के निदेशक रमन त्यागी बच्चों को ऐतिहासिक जलस्रोत के बारे में बताते हुएनीर फाउंडेशन, मेरठ व इंडिया वाटर पार्टनर्शिप, नई दिल्ली द्वारा विश्व जल दिवस दिवस को विश्व जल वीक के रूप में मनाया जा रहा है। इसमें 22 से 24 मार्च, 2012 तक प्रत्येक दिन जल संरक्षण संबंधी विभिन्न प्रकार की गतिविधियां की जानी हैं।

नीर फाउंडेशन के निदेशक रमन त्यागी ने जानकारी दी कि बीडीएस इंटरनेशनल स्कूल के 100 बच्चों को एक टूर ले जाया गया। यह टूर परीक्षितगढ़, मवाना व हस्तिनापुर गया। स्कूली बच्चों को मेरठ के ऐतिहासिक जल स्रोतों व हस्तिनापुर के जंगल को दिखाने के लिए ले जाया गया। इस यात्रा को ‘टूर फॉर वाटर’ का नाम दिया गया। इसमें बीडीएस इंटरनेशनल स्कूल के बच्चे शामिल हुए। सभी बच्चे एक बस में सवार होकर प्रातः 9 बजे स्कूल से चले और पहले परीक्षितगढ़ के गांधारी तालाब पर पहुंचे।

वहां सभी बच्चों को तालाब के ऐतिहासिक महत्व व उसके उपयोग के संबंध में नीर फाउंडेशन के समन्वयक पण्डित हरीशंकर शर्मा द्वारा विस्तार से जानकारी दी गई। इसके बाद बच्चे श्रृग ऋषि के आश्रम गए और वहां पुराने कुएं, बरगद के 100 वर्ष पुराने पेड़ तथा पाण्डवकालीन गुफा देखी तथा उसके संबंध में जानकारी ली। इसके बाद सभी बच्चे नवलदेह के कुएं पर गए जहां कुएं के पानी की गुणवत्ता के संबंध में सभी ने जाना। फिर बस मवाना के लिए रवाना हुई और मवाना के पक्का तालाब पर जाकर बच्चों को तालाब के इतिहास की जानकारी दी गई।

नीर फाउंडेशन के समन्वयक पंडित हरिशंकर शर्मा बच्चों को गांधारी तालाब के बारे में जानकारी देते हुएनीर फाउंडेशन के समन्वयक पंडित हरिशंकर शर्मा बच्चों को गांधारी तालाब के बारे में जानकारी देते हुए

हस्तिनापुर रैंजर ने दी बच्चों को जंगल की जानकारी


बच्चों का टूर करीब सवा बारह बजे हस्तिनापुर के जंगल पहुंचा। जब वहां पहुंचकर बच्चे बसों से उतरे तो वहां के रैंजर कालूराम मीणा शराब के नशे में घुत हुए बैठे थे। उनको नशे में देखकर हम बच्चों को लेकर गेस्ट हाऊस की ओर एक फोरेस्ट गार्ड के साथ चले गए। वहां जाकर हमने डीएफओ को फोन से सूचित कराया कि रैंजर ने शराब पी हुई है और बच्चों को जानकारी देने के लिए कोई भी नहीं है।

इस पर डीएफओ ने फोन से ही एक फोरेस्ट गार्ड को कहा कि बच्चों को जंगल के बारे में जानकारी दी जाए। वह फोरेस्ट गार्ड बच्चों को जानकारी दे ही रहे थे इतने में ही शराब के नशे में घुत रैंजर महोदय भी वहां आ धमके और बच्चों को अपनी बहकी जबान से जंगल के बारे में बताने लगे। इस पर हम चुपचाप वहां से बच्चों को लेकर वापस मेरठ आ गए। बच्चे बगैर जंगल की सही जानकारियां लिए ही वापस लौट आए।

नीर फाउंडेशन द्वारा डीएफओ से लिखित में इसकी शिकायत कर दी गई है।

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