शहरीकरण रुके तो कार्बन उत्सर्जन थमे

Submitted by Hindi on Sat, 04/21/2012 - 14:44
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नेशनल दुनिया, 20 अप्रैल 2012

हालांकि दूसरे एशियाई देशों के मुकाबले भारत में अब भी शहरीकरण की दर बहुत कम है। दक्षिण कोरिया में 81 प्रतिशत, मलेशिया में 61 और चीन में यह दर 43 प्रतिशत तक है। वहीं भारत में शहरी आबादी 29 प्रतिशत है। इसके बढ़ने की दर 2.4 प्रतिशत है। इस समय दुनिया में शहरी आबादी का प्रतिशत 48.6 प्रतिशत है। जबकि इसकी वृद्धि दर 1.98 है। अगर यह हाल रहा तो अगले 20 साल यानी 2030 तक 60 प्रतिशत आबादी शहरों में रह रही होगी।

पृथ्वी को बचाने की दिशा में काम कर रहे विशेषज्ञों ने एक अध्ययन में कहा है कि कार्बन उत्सर्जन की दर कम करने के लिए सिर्फ जनसंख्या नियंत्रण ही काफी नहीं है। बढ़ता शहरीकरण भी इसके लिए जिम्मेदार है। पश्चिमी देशों में तो पहले ही बड़ी जनसंख्या शहरों में रहती है, इसलिए अब सबसे ज्यादा जिम्मेदारी एशिया और अफ्रीका के कंधों पर है। हालांकि इस अध्ययन को करने वाले अमेरिका और ऑस्ट्रिया के विशेषज्ञ मानते हैं कि भविष्य में जनसंख्या घनत्व ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में बड़ी भूमिका निभाएगा। इस अध्ययन के अनुसार विकसित देशों में शहरीकरण के कारण कार्बन उत्सर्जन में 25 फीसदी तक की वृद्धि हो सकती है। हालांकि औद्योगिक देशों में जनसंख्या नियंत्रण के कारण उत्सर्जन में कुछ गिरावट आ सकती है।

इस शोध की उपयोगिता देखते हुए इसे नेशनल साइंस अकेडमी के अध्ययन में शामिल कर लिया गया है। इस अध्ययन में यह भी कहा गया है कि यदि जनसंख्या वृद्धि की दर कम हो जाती है तो दुनिया 2050 तक कार्बन उत्सर्जन में 30 फीसदी की कटौती का लक्ष्य हासिल कर सकती है। इस अध्ययन को करने वाले ब्रायन ओ नील कुछ और ही सोचते हैं। उनके अनुसार यदि जनसंख्या वृद्धि की दर कम हो भी जाती है तो भी पर्यावरण में हो रहे बदलावों का हल इतनी जल्दी निकलने वाला नहीं है। हां, यह तय है कि भविष्य में इसके परिणाम सकारात्मक होंगे। इस अध्ययन के जरिए बताया गया है कि किस तरह जनसंख्या वृद्धि और पर्यावरण परिवर्तन एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।

बढ़ते शहरीकरण को नियंत्रित करने के लिए दुनिया के सभी देशों को कदम उठाने की जरूरत है। लेकिन भारत, चीन, अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों को इस ओर विशेष ध्यान देने की जरूरत है 21वीं सदी भारत के लिए शहरीकरण की सदी होगी। आने वाले सालों में ज्यादा से ज्यादा लोग गांवों से निकलकर शहरों में पहुंच जाएंगे। 2020 तक 17 करोड़ से ज्यादा लोग गांव से शहर पहुंच चुके होंगे। वहीं 2050 तक यह आंकड़ा 70 करोड़ तक पहुंच जाएगा। हालांकि दूसरे एशियाई देशों के मुकाबले भारत में अब भी शहरीकरण की दर बहुत कम है। भारत में शहरीकरण की दर 29 प्रतिशत के आसपास है। वहीं इसके मुकाबले दक्षिण कोरिया में 81 प्रतिशत, मलेशिया में 61 और चीन में यह दर 43 प्रतिशत तक है।

शहरीकरण बढ़ने से पर्यावरण पर दबाव बढ़ता जा रहा हैशहरीकरण बढ़ने से पर्यावरण पर दबाव बढ़ता जा रहा हैभारत में शहरी आबादी 29 प्रतिशत है। इसके बढ़ने की दर 2.4 प्रतिशत है। इस समय दुनिया में शहरी आबादी का प्रतिशत 48.6 प्रतिशत है। जबकि इसकी वृद्धि दर 1.98 है। अगर यह हाल रहा तो अगले 20 साल यानी 2030 तक 60 प्रतिशत आबादी शहरों में रह रही होगी। ज्यादा आसान शब्दों में कहें तो करीब 4 अरब 90 करोड़ लोग विकसित देशों में रह रहे होंगे। कार्बन उत्सर्जन में कमी आए इसके लिए संयुक्त राष्ट्र हवाई, सड़क और जलमार्गों पर परिवहन कर बढ़ाए जाने की पहल कर रहा है, लेकिन विकसित और शक्ति संपन्न देश इस पहल को लगातार ठुकरा रहे हैं। इससे लगता नहीं है कि संयुक्त राष्ट्र निकट भविष्य में भी कोई बाध्यकारी शर्तें अधिक मात्रा में कार्बन उत्सर्जन करने वाले देशों पर लागू कर पाएगा।

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