भूजल की गुणवत्ता प्रभावित करने वाले प्राचलों का सांख्यकीय विधि प्रिंसीपल कम्पोनेन्ट एनालिसिस द्वारा निर्धारण

Submitted by Hindi on Wed, 04/25/2012 - 09:59
Source
राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान

विगत कुछ दशकों में हुए औद्योगिक एवं अन्य विकासों का जल संसाधनों की गुणवत्ता पर विपरीत परिणाम देखा गया है। जल प्रदूषण, लवणता, यूट्रोफिकेशन आदि समस्यायें दिनोंदिन बढ़ती जा रही हैं। इसका परिणाम न केवल सतही जल संसाधनों पर बल्कि भूजल पर भी देखा जा सकता है। इसलिए जल गुणवत्ता प्रबंधन वर्तमान जल संसाधन प्रबंधन का एक महत्वपूर्ण पहलू बन गया है।

इस प्रपत्र में जम्मू जिले के भूजल की गुणवत्ता का प्रिंसीपल कम्पोनेन्ट एनालिसीस (PCA) नामक सांख्यकीय विधि द्वारा अध्ययन प्रस्तुत किया गया है। इसके लिए कैल्शियम, मैगनीशियम, सोडियम, पोटेशियम, सल्फेट, क्लोराइड, नाईट्रेट एवं बाईकार्बोनेट को आधार बनाया गया है। विश्लेषण में देखा गया है कि प्रथम आईजेन मान (eigen value) 3.698 है जो कि भूजल आंकड़ों के कुल वेरीयेन्स का 46.22 प्रतिशत प्रतिनिधित्व करती है। जबकि द्वितीय आईजेन मान (eigen value) एवं तृतीय आईजेन मान (eigen value) क्रमशः 1.419 एवं 1.079 है, जो कि कुल वेरीयेन्स के क्रमशः 17.73 एवं 13.48 प्रतिशत है। आंकड़ों के वेरीयेन्स में प्रथम तीन घटकों (आईजेन मान 1.0 से अधिक) का योगदान लगभग 77 प्रतिशत है। अध्ययन में यह देखा गया है कि प्रथम प्रिंसीपल कम्पोनेन्ट का भूजल गुणवत्ता प्रबंधन में सभी प्राचलों का प्रभाव है। प्रथम फैक्टर नाईट्रेट के प्रभाव को प्रमुखतः दर्शाता है। नाईट्रेट फैक्टर कृषि क्षेत्र में मानवीय क्रियाकलापों की वजह से उत्पन्न हुए प्रभावों की ओर ध्यान आकर्षित करता है। द्वितीय एवं तृतीय फैक्टर क्रमशः मैगनीशियम एवं बाईकार्बोनेट हैं, जो भूगर्भीय कारकों का प्रतिनिधित्व करता है।

पाईपर ट्राईलीनियर चित्र द्वारा जम्मू जिले की जल गुणवत्ता कैलशियम-मैगनिशियम-बाई कार्बोनेट हाइड्रो कैमीकल ग्रुप के अधीन है। इस अद्ययन से यह भी ज्ञात हुआ है कि जिले की भूजल गुणवत्ता उच्च लवणता-निम्न सोडियम (C3-S1) ग्रुप के अधीन है। अतः मृदा एवं जल प्रबंधन से सम्बंधित विशेष उपायों के अपनाने की जरूरत है।

 

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