आस्था और अस्तित्व में फंसी गंगा

Submitted by Hindi on Fri, 05/11/2012 - 17:47
Source
एनडीटीवी, 25 मार्च 2012

क्या हमारे देश के नदियों का काम यही है कि वह हमारे पापों को धोएं? जो हमें अपना पानी पिलाती हैं उसी नदी को हम आज विलुप्त होने के लिए मजबूर कर रहे हैं। क्या यहीं हमारा नदियों के प्रति कर्तव्य है? इसी मुद्दे पर एनडीटीवी द्वारा एक विचार विमर्श किया गया।

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