करोड़ों खर्च के बाद भी गंगा मैली क्यों?

Submitted by Hindi on Wed, 10/17/2012 - 14:08
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Source
एबीपी न्यूज, 15 अक्टूबर 2012

जीवनदायिनी गंगा को साफ करने के लिए अब तक करोड़ों रुपए खर्च किए जा चुके हैं। सन्यासियों, वैज्ञानिकों के साथ-साथ आम जनता गंगा को स्वच्छ करने की कोशिश में लगी हुई है, लेकिन गंगा आज भी मैली की मैली है। गंगा का पानी पीने लायक छोड़िए, नहाने और खेती करने लायक भी नहीं बचा है।गंगा को बचाने की कोशिशें नाकाफी रही हैं। पहाड़ों से निकल कर गंगा मैदान की तरफ बहती है। इसका पहला पड़ाव होता है हरिद्वार। हरिद्वार धार्मिक नगरी तो है ही लेकिन गंगा को गंदा करने की पहली बदनामी भी ये शहर उठाता आया है। कहते हैं गंगा पाप धोती है लेकिन हरिद्वार में गंगा शहर की गंदगी को साफ करती ज्यादा नजर आती है। एबीपी न्यूज के विशेषज्ञों द्वारा किए गए रिसर्च में हरिद्वार के हर की पैड़ी के 100 एम.एल. गंगाजल में पाए गए एमपीएन कोलीफॉर्म बैक्टीरिया 54,000 तक तथा विश्वकर्मा घाट के जल में 35,000 तक बैक्टीरिया पाए गए हैं। जबकि इनकी मौजदूगी सिर्फ दस तक स्वीकृत है। फीकल कोलीफॉर्म टेस्ट में भी इन दोनों जगहों पर क्रमशः गंगाजल में 1,400 तथा 2,800 बैक्टीरिया पाये गए हैं। इनके अलावा गंगा में ई-कोलाई बैक्टीरिया, आयरन तथा रेत भी जरूरत से ज्यादा पाये गए हैं।

करोड़ों खर्च के बाद भी गंगा मैली क्यों? भाग-2




करोड़ों खर्च के बाद भी गंगा मैली क्यों? भाग-3



गंगा को बीमार करने वाले शहर के तौर पर कानपुर बदनाम है। हर साल यहां गंगा में प्रदूषण बेहद खतरनाक हद तक पाया जाता है। एमपीएन कोलीफॉर्म टेस्ट में कानपुर में गंगाजल एक बार फिर फेल हुआ है। कानपुर में दाखिल होते वक्त ये आंकड़ा 35,000 जबकि कानपुर से बाहर जाते वक्त 54,000 है। यानी कानपुर शहर के गंगाजल में बैक्टीरिया पनप रहे हैं बढ़ रहे हैं। फीकल कोलीफॉर्म टेस्ट में भी कानपुर में दाखिल होते वक्त ये आंकड़ा 2,800 तथा कानपुर से निकलते वक्त 2200 है। यानी मल से उत्पन्न होने वाले बैक्टीरिया कुछ कम हुए नजर आते हैं। लेकिन पानी में ई-कोलाई बैक्टीरिया की मौजूदगी है। एक खतरनाक बात यह है कि इस बार कानपुर के पानी में धातुओं की मौजूदगी भी मिली है। जो तीन साल बाद लौटी नजर आ रही है। जिससे सिर्फ पेट की ही बीमारियां नहीं होती बल्कि लंबे वक्त तक पानी इस्तेमाल करने पर कैंसर और किडनी खराब होने जैसी बीमारियाँ भी हो सकती हैं।

करोड़ों खर्च के बाद भी गंगा मैली क्यों? भाग-4





उत्तर प्रदेश के कुल सात शहरों से 11 नमूने लिए गए लेकिन बैक्टीरिया के मामले में सबसे खराब पानी वाराणसी में मिला। यहां एमपीएन कोलीफॉर्म बैक्टीरिया की तादाद बेहद चौंकाने वाली थी। 100 एम.एल गंगाजल में वाराणसी में गंगा को दाखिल होते वक्त 1,40,000 तक बैक्टीरिया पाए गए तथा निकलते वक्त ये बढ़ कर 3,50,000 तक पहुंच गए। पानी में फीकल कोलीफॉर्म यानी मल से उत्पन्न होने वाले बैक्टीरिया भी बेहद तेजी से बढ़ते नजर आए। साफ नजर आ रहा है कि वाराणसी में गंगा की शुद्धि के लिए किए गए काम किसी काम नहीं आ रहे हैं। वाराणसी के गंगाजल में इन बैक्टीरिया के अलावा ई-कोलाई, रेत, आयरन, मैंगनीज और कॉपर भी काफी मात्रा में पाया गया। उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में भी गंगाजल की स्थिति बहुत खराब है उसमें पाए गए एमपीएन कोलीफॉर्म 1,70,000 है जो सामान्य से कहीं ज्यादा है जबकि फीकल कोलीफॉर्म 54000 है। इसी तरह रेत, आयरन, मैंगनीज और पानी में शीशे की मौजूदगी भी पाई गई। कुल मिलाकर हरिद्वार से बलिया तक यही नतीजा निकला कि उत्तर प्रदेश में ही राम की गंगा ज्यादा मैली है।

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Comments

Submitted by Anonymous (not verified) on Thu, 10/18/2012 - 09:03

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ईमानदारी से न सरकार काम कर रही है और नाही कोई संस्था क्योकि सब के सब नदियों को दुहने पर लगे है , क्योकि अगर एक बार नदी स्वच्छ हो गयी तो उनकी तो दुकाने ही बंद हो जाएँगी ....... एक के बाद एक नयी संस्था बना कर ये नदी माफिया , जल मानव , विदेशो से , भारत सरकार से करोडो डकार रहे है और अपनी मलिनता ही दूर कर रहे हैं ..... मंचो पर अपनी छाती पीट कर हाय गंगा हाय गंगा करतें हैं , जब तक इन सामाजिक माफियाओ और तथाकथित जल मानवों के चंगुल से नदियों को नही छुड़ाया जायेगा तब तक नदिया मैली ही रहेंगी और ये जल मानव करोडपति अरबपति बन कर सिर्फ पञ्च सितारा होटलों के कमरों में ही नदियों को स्वच्छ करते रहेंगे और नदियों को दुह्तें रहेंगे .........DrShama Usmani

Submitted by Anonymous (not verified) on Thu, 10/18/2012 - 16:54

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ast month mei Tavopan, joshimath gaya tha.jis hotel mei humari booking thi usame Uma Bharti ke ' Ganga Bacha Pariyojana' ke 150 log ruke the jo humare pahuchane pe 1 ghante pahale check out kar kar laut gaye. Room saf karwaya..har room se kam se kam 5 botal sharab ki nikali..aur snax.ap khud samajh gaye honge ki paiso ka kaise isatemal hota hai. Very shameful. Ganga jisako hum apani ma ki taraf pujate hai usako bhi yah log bech rahe hai. aur media to biki hui hai..mai river alaknanda ko apane terrace de dekhata hu..abhi usaka color green jaisa hai..aur bahut khubsurat hai..aur jaise jaise mai upar joshimath ya govindghat ki ore jata hu..woh aur clear hai.maine alaknana ke glacier dekha hai..touch bhi kiya hai.was a wonderful life time experience..is april last mei jab badrinath ji ka pat khula tha. anyways I'm glad that I'm on this page which has lot of intellectuals n dedicated people.warm regards to all. & also Happy Navaratra.Chandan Aryan

Submitted by Anonymous (not verified) on Thu, 10/18/2012 - 16:57

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मुझे कहना तो नहीं चाहिए पर बात आने पे कहना भी पड़ता है। ये वही लोग हो सकते हैं जो अपने मां-बाप से लेकर इस पतित पावनी गंगा को बचा नहीं सकते। मुझे तो बहुत बुरा लगता है कि जो गंगा मां हम लोगों को सिंचती है उसी के जल में हम कचरा, नाले का गंदा पानी डालते हैं। एक बात मैं आप लोगों को बताते चलूं कि मैंने कई जगहों पर देखा कि लोग गंगा जल को अपने टॉयलेट में उपयोग करते हैं। कितने शर्म की बात है कि हम मोक्षदायिनी गंगा के जल को किसी भी तरह से नहीं छोड़ रहे हैं। मैं तो सिर्फ इतना ही कहना चाहूंगा कि भगवान इन लोगों को सद्बुद्धि दे ताकि इनका कुछ हो सके।prabhat dwivedi

Submitted by Anonymous (not verified) on Thu, 10/18/2012 - 17:07

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सच में लाखों करोड़ों रुपए फूंकने के बाद भी गंगा मैली की मैली क्यों हैं क्या गंगा के बेटों में वो बात नहीं रही की अपने मां को अविरल व निर्मल बना सकें।anita tomar

Submitted by Anonymous (not verified) on Thu, 10/18/2012 - 17:11

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nahi aisi baat nahi hai anita ji ki ma ganga ko bachane ke liye uske bete nahi hain. hai par ganga ko saaf karne ke nam par katrati hain bas dusro ke kandhe par banduk chalate hain. wo nahi chahate ki hame kuchh ho.anil gautam

Submitted by Anonymous (not verified) on Thu, 10/18/2012 - 17:15

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bade dino baad apka koi post facebook par aaya hai kripya aap apne post hamesha hame uplabdh karwate rahen taki hame apne ma ganga aur pani, paryavaran ke baare me jankari milati rahe. ma ganga ko ham sabhi ko milkar bachana chahiye. jai ma gange, har har gangeamit trivedi

Submitted by Anonymous (not verified) on Thu, 10/18/2012 - 17:23

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ram ki ganga ab maili ho gayi hai in kale angrezo ki bandh pariyojnao tatha kachara dhote-dhote.sulabh ganga

Submitted by Anonymous (not verified) on Thu, 10/18/2012 - 17:25

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Asheesh Semwal सरकार भरोसे लायक नहीं रही। गंगा की मुक्ति के लिये प्राणपण तपस्या करनी होगी । जब तक कुछ साधक मोछ प्राप्त नहीं कर लेते तब तक भौतिकता सोच की गुलाम सरकार की समझ में कुछ नहीं आयेगा ।

Submitted by Anonymous (not verified) on Thu, 10/18/2012 - 17:28

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गंगा को बचाने का परिणाम तभी अपने पक्ष में होगा जब ताकत अपने साथ होगी । अपनी ताकत अपने पर भरोसा करने से बढती है किसी सरकारी आश्वासन से नहीं । जब तक हम अपनी ताकत बढाने के लिये जिन्दगी को हथेली में लेकर चलने का साहस नहीं बटोर सकते तब तक यह सब बेमानी होगी । यदि गंगा चाहिये तो अपना बलिदान देना पडेगा. सच्चा योद्धा बनना होगा, सच्चे योद्धा तैयार करने होंगे । गंगा की रक्षा में यदि जान जायेगी तो स्वर्ग का राज्य निश्चित है।richa sharma

Submitted by Anonymous (not verified) on Thu, 10/18/2012 - 17:30

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भगवति तव तीरे नीरमात्राशनोऽहं, विगतविषयत्रष्ण: क्रष्णमाराधयामि।सकलक­लुषभंगे स्वर्गसोपानसंगे,तरलत­रतरंगे देवि गंगे प्रसीद॥भगवति तव तीरे नीरमात्राशनोऽहं, विगतविषयत्रष्ण: क्रष्णमाराधयामि।सकलक­लुषभंगे स्वर्गसोपानसंगे,तरलत­रतरंगे देवि गंगे प्रसीद॥Aachary Kashyap

Submitted by Anonymous (not verified) on Thu, 10/18/2012 - 17:36

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ramesh ji aap hame apne post se vanchit na kare yahi hamara apse agrah hai. aap sahi kah rahi hain poonam ji hamare desh ki tatha sanskriti ki pahchan dene wali hai ma ganga.rohan sharma

Submitted by Anonymous (not verified) on Thu, 10/18/2012 - 17:40

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‎***Jai Maa Gange ..Nector Maa Ganga*** There is no greater mantra than Om , there is no greater women than Maa Parvati , there is no Reality than Guru , there is no greaterknowledge than Self-Knowledge . Similarly it is believed there is no greater place of pilgrimage than the Holy Ganga.The Holy water of Divine Mother Ganga is akin to the nectar. The Water of holy Ganga is the only one of its kind , which by virtue of itys medicinal properties doesn’t putrefy even if kept for years . The water of other rivers decays and starts giving a foul smell in a short span . That is the reason why holy Ganga has been mentioned as the greatest doctor for all diseases.The British East India Co. used only Ganges water on its ships during the three month journey back to England , because it stayed “sweet & fresh” . Emperor Akbar called it the “water of immortality” and always traveled with a supply .Our scriptures have been singing praises of the nectarine water of holy Ganga for thousands of years. The 20th century science too has acknowledged it. What is it that makes the water of holy Ganga so unique ? Why is it that it doesn’t rot even when kept for years ? How does it cure diseases when used for drinking or bathing ? Indian & Western scientist have studied these questions for centuries & have concluded that seers have expressed the truth in the prayer : “Salutations to her who is the form of all medicines ”Film producer Julian Crandall Hollick searched for the “mysterious X factor” that gives Ganges water its mythical reputation. He started his investigation looking for the water`s special properties at the river`s source in the Himalayas . There wild plants , radioactive rocks, and unusually cold , fast – running water combine to form the river . D. S. Bhargava , a retired professor of hydrology, told Hollick , “Organic materials usally exhaust a river`s available oxygen and the water starts putrefying . But in the Ganges , an unknown substance ,or X factor , acts on the organic materials and bacteria and kills them” . Bhargava furthee added that the Ganges ` self purifying quality leads her oxygen level to 25 times higher than any other river in the world . Jay Ramchandran , amolecular biologist in a short science lesson , explains why the Ganges does not spread diseases among the millions of Indians who bathe in it . It is only due to its extraordinary ability to retain oxygen.One of the astonishing facts revealed by research scientists is that the water of holy Ganga contains millions of bacteriophage which consume pathogenic bacteria . Bacteriophage is a virus , a parasite of bacteria , which is very small (ten thousandth part of a centimeter ) in size and covered with a protein shell (capsid) . One of its amazing properties is that it is always present in the water of holy Ganga and can survive for thousands or lakhs of years even with out food . Whenever any pathogenic or putrefying bacteria enter the water , the bacteriophage , in millions , attack them & destroy them . If one suffering from diseases drinks the water of holy Ganga , the friendly bacteriophage enter his body with the water and destroy the harmful bacteria . The patient starts recovering gradually.Where do these bacteria – devouring bacteriophage come from ? It is not yet known , but they are found every where , right from thr origin of holy Ganga to the place where it merges in to sea . They are destroyed by boiling . Therefor , the water of holy Ganga should not be boiled.In the Indian culture , there already exists a believe that the water of holy Ganga should not be boiled . Mother Ganga is considered a blessing for the people of this country . Lord Shiva has gon to the extent of extolling her in the following , ‘ O Govinda , Ganga becomes pleased wit the devotion of one who knows the greatness of Ganga even if he were to be an undeserving person , even if he livesfar off . They whose minds have been deluded by ignorance , attachment , greed etc. do not have any faith in Dharma and particulary in Ganga ‘ Thousands of salutations to Mother Ganga who is the form of Lords Brahma , Vishnu and Rudra.Maadhva Nand

Submitted by Anonymous (not verified) on Thu, 10/18/2012 - 17:43

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अगर इसी तरह हिमालय से निकल रही नदियों पर बाँध बनते रहें तो यह कहना कि हम हिमालय का संरक्षण कर रहें है..यह सरासर बेईमानी होगी....बाधो के कारण आज हिमालय का सीना छेदा जा रहा है...जो ठीक नहीं है... ओर हम सब इस प्रकार कि विचार गोष्ठी करते हें रह गए........यह कैसे संबव है कि नदियों स्रोत्रो पर बाँध बन रहें है...ओर हम हिमालय ओर गंगा को बचाने की बात कर रहें हों??Bhilangana River

Submitted by Anonymous (not verified) on Thu, 10/18/2012 - 17:49

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गंगा सरस्वती सिंधु ब्रह्मपुत्राश्च गंदकीकावेरी यमुना रेवा कृष्णा गोदा महानदी ॥ma ganga ko bachaiyemadhurima pandey

Submitted by Anonymous (not verified) on Thu, 10/18/2012 - 17:49

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गंगा के जल में जब यूही, शैन: शैन: विष घोला जाएगा ।जीवन देने वाला यह जल, मृत्युलोक ले जाएगा ।।यह देख भले इंसान हसे, पर धरती रोने वाली है ।हिन्द देश के वासी जागो, गंगा खोने वाली है ।।इंसान बड़ा खुद्दार बना , इंसानियत को त्याग दिया ।गंगा के निर्मल जल में, विष का प्याला दाग दिया ।।प्राणदायिनी गंगा हमको, अमृत रस देने वाली है ।हिन्द देश के वासी जागो, गंगा खोने वाली है ।।इस नीर दशा को देख के, अखियों से अब नीर बहे ।मन पर बारी बोझ पड़ा, चुपचाप खड़े अब कैसे सहे ।।सोच जरा इंसान अरे, यह जीवन देने वाली है ।हिन्द देश के वासी जागो, गंगा खोने वाली है ।।Golu Gadwali

Submitted by Anonymous (not verified) on Thu, 10/18/2012 - 17:51

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Ganga to maili rahegi hi jab tak karkhano hamare gharo aadi pa ganda pani aur khacra isme padta rahega isko saaf karne ke naam par jitni bhi pariyojnaye chal rahi ya chali hai agar ispar bhi inquiry baithai jaye to isme bhi gholate hi najar aayenge.Avdhesh Abhayandu

Submitted by Anonymous (not verified) on Thu, 10/18/2012 - 17:57

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गंगा मैया अपने बेटों से पुकार कर रही है कि हमें बचा लो नहीं तो तुम भी नहीं रहोगे। आओ हम सभी को मिलकर मां गंगा को बचाना है। जय मां गंगे, हर-हर गंगे।राकेश शर्मा

Submitted by Anonymous (not verified) on Sat, 10/20/2012 - 16:02

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‎''मानों तो मैं गंगा माँ हूँ, न मानो तो बहता पानी'' यह एक गीत की पंक्तियाँ हैं .......बहुत सच्ची है ये पंक्तियाँ........मानों तो सब कुछ और ना मानों तो कुछ भी नहीं, स्थूल है।और यदि मानों तो साक्षात परम ब्रह्म है। ब्रह्मा-विष्णु-महेश तीनों समाहित हैं। गंगा परम ब्रह्म का साक्षात रूप है। एक वरदान है मानव के लिए, ऐसा वरदान जहां उस परम ब्रह्म को मनुष्य छू सकता है, दर्शन कर सकता है और तो और उसको धारणकर सकता है। ऐसा अद्भुत वरदान.......... मानव शरीर में जल तत्व की प्रधानता है और जब गंगा जल से तृषा शांत करती है तब ब्रह्मा होती है गंगा।जल से ही जीवन है । जब गंगा के जल से फ़सलें लहलहाती हैं, पेड़ -पौधे सिंचित हो श्वास का साधन बनते हैं तब विष्णु होती है गंगा.......और जब मोक्ष देती है तब शिव होती है गंगामानों तो सबकुछ है गंगा .............................. जय गंगेShalini Rai Rajput

Submitted by Anonymous (not verified) on Sat, 10/20/2012 - 16:03

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ऋग्वेद में जिस सरस्वती नदी का वर्णन मिलता है वह विलुप्त हुयी और सरस्वती के साथ ही एक पूर्ण सभ्यता समाप्त हो गयी। आज सिंधु घाटी स्भ्यता के रूप में उसके प्रमाण मिल रहें हैं। इसमे कोई दो राय नहीं एक नदी के विलोप साथ सभ्यता के समाप्त होने की संभावना है। सरस्वती नदी के आस-पास ही संसार की सबसे पुरातन और पूर्ण विकसित स्भ्यता का निर्माण हुआ और सरस्वती के विलुप्त होने के साथ ही पूर्ण विकसित स्भ्यता भी समाप्त हो गयी। अब गंगा के साथ ही एक सभ्यता और न विलुप्त हो जाए कहीं....सोचे सभीAshwini Tyagi

Submitted by Anonymous (not verified) on Sat, 10/20/2012 - 16:04

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sirf chillane se maa ganga ki awirlta nirmlta k liye sore machane se maa ganga awirl nirml nhi ho jayengi uske liye jmini star se ladai ladni hogi.Ganesh Jaiswal

Submitted by Anonymous (not verified) on Sat, 10/20/2012 - 16:06

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हम अपने ही हाथ से अपनी सभ्यता, अपनी सांस्कृतिक धरोहर 'गंगा' को समाप्त कर रहे हैं. माँ गंगा को बचाने के कोई भी प्रयास नहीं किये जा रहे हैं. कहीं ये कोई साजिश तो नहीं. कहीं यह तो नहीं सोचा जा रहा है की गंगा को समाप्त करके भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति को बड़े आसानी से समाप्त किया जा सकता है. 'गंगा के पानी में कैंसर के कीटाणु ' इस रिपोर्ट का उद्देश्य कही ये तो नहीं की भारतियों को गंगा जल से दूर कर दिया जाये........ ये गहन जाँच का विषय हो सकता है.Sajal Srivastava

Submitted by Anonymous (not verified) on Sat, 10/20/2012 - 16:18

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गंगा की बर्बादी के लिए जितना इसे प्रदूषित करने वाले जिम्मेदार हैं,उससे कहीं ज्यादा वो लोग जिम्मेदार हैं, जिन्हें इसे प्रदूषण मुक्त करने की जिम्मेदारी दी गई थी। 27 साल पहले शुरू किए गए गंगा एक्‍शन प्‍लान पर अब तक 2000 करोड़ रुपये से भी ज्‍यादा खर्च हो चुके हैं लेकिन नतीजा सिफर रहा है।Sudarshan Rawat

Submitted by Anonymous (not verified) on Sat, 10/20/2012 - 16:22

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भारत गंगा है -गंगा भारत हैकोई कुमार नही था जो अपनी काव्यात्मक भाषा से 'इमोसनलब्लैक-मेल करता ,कोई अन्ना नहीं था जो अपनी सनक से जनतंत्र को खतरे में डालकर सरकार को झुकाने कि कोशिश करता ,कोई अरविन्द केजरीवाल नहीं था जो विदेशी पैसो से बेफकूफ जनता के लीये 'अन्ना टोपी ',झंडे ,होर्डिंग आदि बनवाकर जनता को लुभाता ,कोई किरण बेदी नहीं थी कि नेताओं के स्वांग रच कर अपनी भांड-गिरी दिखा कर अमला जुटाती .बस एक अकेला ही था जिसने ७३ दिन 'अनशन ' कर अपने प्राण गंगा माँ के लीये त्याग दिए -एक सच्चे सपूत को भारत भाग्य विधाता अत्यंत सच्चे मन से भावभीनी श्रीधा फूल देता है और इस प्रण के साथ सभी विधाताओं से ये आग्रह करता है कि अपने अपने नगर में गंगा या फिर कोई भी नदी हो उसमे किसी भी प्रकार का कूड़ा-करकट नहीं डालेंगे और ण ही डालने देंगे ..देव नेगी

Submitted by Anonymous (not verified) on Sat, 10/20/2012 - 16:26

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sangam is supposed the most sacred and ancient place on earth, here all god, godess, saints adds their energy in the water of ganga. Vandana Giri

Submitted by Anonymous (not verified) on Sat, 10/20/2012 - 16:30

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Ganga ma se hamara desh desh se rajya or rajya se ham hi ham jane jate hai or ese save rakhana hamara krtviya banta hai.Agrwal Raju Rajendra

Submitted by Anonymous (not verified) on Sat, 10/20/2012 - 16:35

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गांगं वारि मनोहारि मुरारिचरणच्युतम् ।त्रिपुरारिशिरश्चारि पापहारि पुनातु माम् ।।Dinesh P. Badoni

Submitted by Anonymous (not verified) on Sat, 10/20/2012 - 16:38

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Jai maa ganga. To save ganga river jab hum log antim sanskar karte hai to puri body ko achi tarah jala ke ganga maine visrit karna cahiye is se hum ganga ko apvitrh hone se bacha sakte hiPreeti Raturi

Submitted by Anonymous (not verified) on Sat, 10/20/2012 - 16:45

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Maa Ganga is the ever well wishing river as lord Shiva had prevented the over confidence of Maa Ganga while Lord Vishnu and Lord Brahma had agreed to the Maa Ganga's farewell in the Heaven..Lord Shiva had distributed the three water drops of Maa Ganga 1st drop was to the Heaven. 2nd Drop was to the Earth and 3rd Drop was to the beneath while Bhagirath's request was accepted By lord Shiva and Maa Ganga was searching the way to come out from the complicated ways of hair on bast head of lord Shiva..Maa Ganga's illusion was disabused,.Jai maa Gange har har Gange....................Jagmohan Farswan

Submitted by Anonymous (not verified) on Sat, 10/20/2012 - 16:48

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नमामि गंगे तव पादपंकजं सुरासुरैर्वन्दितदिव्यरूपम् ।भुक्तिं च मुक्तिं च ददासि नित्यं भावानुसारेण सदा नराणाम् ।।हे माता गंगे ! देवताओं और राक्षसों द्वारा वंदित आपके दिव्य चरणकमलों को मैं नमस्कार करता हूँ, जो मनुष्यों को नित्य ही उनके भावानुसार भक्ति और मुक्ति प्रदान करते हैं।'Jatin Raj

Submitted by Anonymous (not verified) on Sat, 10/20/2012 - 16:53

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गंगा इक नदी ही नहीं हमारे लिए माँ समान है |,रमेश कुमार जी की वह अमेरिकन वाली बात ने उनकी सोच व हमारी सोच में अंतर बता दिया | वे माँ न मानते हुए भी नदी के प्रति सम्मान रखते हैं और हम माँ मानते हैं और करते अपमान | इसलिए हमें गंगा को निर्मल व साफ रखने के लिए अपनी और से पूर्ण प्रयास करना चाहिए |Kishor Singh Sajwan

Submitted by Anonymous (not verified) on Sat, 10/20/2012 - 16:56

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A RUDE PICTURE OF GANGA and we have to save our future by saving ganga................and also cmnt that how can we Save ganga by your methodManish Chauhan

Submitted by Anonymous (not verified) on Sat, 10/20/2012 - 16:57

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Ma Ganga is the religious Mother in this world as well a real mom.Shashi Bhushan Maithani

Submitted by Anonymous (not verified) on Sat, 10/20/2012 - 16:59

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हिमालय व् गंगा केवल आध्यात्मिक ,पर्यावरणीय आस्था तथा धार्मिक दृष्टि से ही उपयोगी एवं महत्वपूर्ण नहीं है बल्कि भौतिक ,सम्पन्नता ,आर्थिक सभ्यता एवं संस्कृति तथा वैज्ञानिक दृष्टि से भी अत्यंत उपयोगी एवं आवश्यक है .हमारी आस्था का प्रतीक गंगा को बचाना समय की बड़ी भरी जरुरत है .हिमालयी क्षेत्र प्राकृतिक रूप से जितना संपन्न ,विविधतायुक्त एवं वैभव शाली है उतना ही संवेदनशील भी है .प्रकृति एवं मानव का रिश्ता बहुत प्रगाढ़ है जो एक दूसरे से स्वतंत्र भी है तथा आश्रित भी.यदि जीवन अप्राकृतिक हुआ तो प्रकृति इसे एक सीमा से अधिक सहन नहीं कर पाएगी .परिणाम होगा विनाशलीला .इसलिए विकास की गति सुनिश्चित करते हुए ,पर्यावरण का संरक्षण करते हुए इस विनाशलीला से बचने की आवश्यकता है .में मानता हू कि बर्तमान जगमगाना चाहिए लेकिन भविष्य कि चिंता भी तो सतानी चाहिए .भविष्य एवं भावी पीढ़ी के लिए प्रकृति एवं विरासत का संरक्षण अनिवार्य है .ह्रदय शुद्ध जब मन हो निर्मलआत्मा तब अक्षर स्वर सुनतीक्षद्म प्रपंच भरे जीवन मेंभाव रहित परिजन पुरजन मेंईर्ष्या द्वेष स्वार्थ कलह मेंअमल श्रवण कि शक्ति न जगती‘’विपिन’’ स्वर्ग भूमि अनुराग भरा हैमा गंगा का स्नेह सना है .Vipin Kandpal

Submitted by Anonymous (not verified) on Sat, 10/20/2012 - 17:01

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jay gangai ma....bhaiyo ganga ji ko vaht hi dusit kar diya hai logo nai ...sari gandai nalai or sivel ki line sab ganga mai hi bisrjan hota hai ...yai sab pai gover. Ko exen laina cahiyai nahi tho ahnai valai time mai ganga ji baut hi gandi ho jayai gi..mai cahta hu ki ganga ji mai honai valai yai sab gandai padrth bi rok lagayi jay..kiyo ki ganga hamri ma hai or ma ki rakcha karna hamra darm hai....jay gangai ma...har har gangaiLaxmi Prasad Chamoli

Submitted by Anonymous (not verified) on Sat, 10/20/2012 - 17:07

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गर्वीले सर्द हिमालय में,मैं बीच तपोवन रहता हूँ.और पावन गंगा जल बनकर,माँ की रग-रग में बहता हूँ.मैं खुद को पहाड़ी कहता हूँ,मैं खुद को पहाड़ी कहता हूँदिगपाल कठैत

Submitted by Anonymous (not verified) on Sat, 10/20/2012 - 17:14

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ganga i s the mst popular river n the world so to save ganga we have to work together.Mukesh Kandwal

Submitted by Anonymous (not verified) on Sat, 10/20/2012 - 17:16

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jai gange ganga v nadi pradushan.ko bachane ke liya delhi ke janter manter per 9 oct. se aam jan v ganga bhakto dwara anshen kiya ja rha hai aap bhi shamil hoker ma ganga ko pradushan se tran dilwane me mahti bhumika ada kar sakte hai .ganga v nadi pradushan ko bachane ka abhiyan u.p. ke vidhansabha lko per 4 sep. ko prateekatamk anshen v 150 ganga bhakto dwara girptaridekershuru ker diya hai. saroj dixit ad. national president b.k.d. member g. a.p.Saroj Dixit

Submitted by Anonymous (not verified) on Mon, 10/22/2012 - 16:31

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hello friends i think that you all are serious about save the river ganga. i am also very serious . i am created a website on this subject please join this website and help us to save our river ganga because we can't do this in single . we have to come together for save this river and all the river of ganga

Submitted by Anonymous (not verified) on Mon, 10/22/2012 - 16:38

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swachchhata aur pavitrata do alag alag cheeje hain.. ganga aaj swachch nahi par sada se ve pavitra hain aur rahengi.. jo jis bhav se jiske paas jata hai use uska utna hi fal milta hai. ma mankar jab koi ganga me snan karega use koi rog nahi honge kyunki ek parikshan k bare me maine kahi suna tha ki gaay k pure sharir me vish fail gaya the par jab gaay ne bachhde ko doodh pilaya to us doodh me vish nahi tha... ma ganga bhi aisi hi hain... jai gange... ha par nirmalta ka prayas chhodna nahi hai...Sadhvi Poornamba

Submitted by Anonymous (not verified) on Mon, 06/03/2013 - 11:06

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The bloke, believed to be in his fresh 30s, emerged weighed down by means of a abundance of matted hair. Mr Shivaram, who believed Keshava had not washed on the side of a decade, swiftly organised a haircut, a bath and a m0edical examination. The servant, believed to be in his belated 30s, emerged weighed down by a flock together of matted hair. Mr Shivaram, who believed Keshava had not washed for a decade, hurriedly organised a haircut, a bath and a m0edical examination.

Submitted by Anonymous (not verified) on Tue, 12/03/2013 - 18:51

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deepak kumar singhs/o- rupkant singhat+po- olapur gangaurdistric- khagariapin code 851204mob- 9122817906

Submitted by Anonymous (not verified) on Sat, 01/31/2015 - 00:32

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Ganga ki nadayan badlengi, satlaj ka muhana badlega, kuch tum badlo kuch hum badle, tabhi ye jamana badlega,....,

Submitted by Anup Bawane (not verified) on Thu, 11/12/2015 - 16:08

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महाराष्ट्र के नागपूर मे वहा के नाग नदी स्वच्छता अभियान बहुत ही सराहनीय रहा था | वहा नागपूर के मध्य से बहती नाग नदी को स्वच्छ करने के लिये वहा के स्कूल, कॉलेज, भिखारी से लेकर महल के लोगो ने भी मिलकर हाथ बटाया था, मिडिया ने भी उसे उस कालावधी मे हवा मे ले रखा था | गंगा जी के लिये भी हाथ के साथ दिल और मन भी अगर काम मे आए तो मजाल है गंगा माता अपवित्र रहे |

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