पलकमती नदी के खत्म होने का आपके जीवन पर क्या प्रभाव पड़ा?

Submitted by Hindi on Sat, 02/16/2013 - 11:13
Source
दलित संघ सामाजिक संस्था

 

क्रमांकवर्णनसंख्या प्रतिशत
1.पीने के लिए पानी नहीं है4550%
2.दैनिक क्रिया, शौच में परेशानी1718.8%
3.खेती नहीं हो पा रही है3640%
4.रेत प्राप्त नहीं हो पा रही 1718.8%
5.नदी रेत में सब्जी नहीं उगा पा रहे1011.1%
6.नदी किनारे कुओं का जल स्तर नीचे चला गया है1112.2%
7. जानवरों को पीने हेतु पानी नहीं रह गया है2730%
8.मछलियाँ नहीं मिल पा रही है088.8%
9.कपड़े धोने के लिए पानी नहीं मिल पा रहा है1415.5%
10.स्थानीय रोजगार पर प्रभाव पड़ रहा है।1718.8%


पलकमती नदी में वर्तमान में पाई जाने वाली वनस्पतियां

 

क्रमांकवर्णनसंख्याप्रतिशत
1.बेशरम5662.2%
2.कटाई1617.7%
3.ललतान2527.7%
4.घास1213.3%
5.लडेन1617.7%
6.कोहा088.8%
7.अमरबेल044.4%
8.गोदरा1112.2%
9.चढ़ी055.5%
10.झांऊ055.5%
11.पनपड़ी1011.1%
12.तेंदू011.1%
13.गोखरू044.4%
14.गाजरघास033.3%
15.काई1112.2%
16.बमूल011.1%
17.गूलर055.5%
18.सोठा1516.6%
19.आम022.2%
20.इमली 033.3%
21.अकोल011.1%
22.सागोन011.1%
23.साज011.1%
24.झिरमटा055.5%
25.बेर011.1%
26.रैनी022.2%
27.पुंआर044.4%
28.कशटेऊआ1011.1%


90 परिवारों द्वारा 15 ग्रामों में से ली गई जानकारी अनुसार नदी किनारे की वनस्पतियां भी कम हुई हैं तथा कुछ प्रजातियाँ पूरी तरह से नष्ट हो गई हैं। गूलर 5.5 प्रतिशत शेष रह गई हैं, वहीं एक बेकार वनस्पति बेशरम बढ़कर 62.2 प्रतिशत हो गई। कोहा भी 8.8 प्रतिशत शेष रह गया हैं, वहीं जामुन, बेर जैसी प्रजाति तो पूरे रूप से नष्ट ही हो गई हैं।

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