पेड़ों पर खतरा

Submitted by Hindi on Mon, 02/18/2013 - 12:54
Source
जनसत्ता, 17 फरवरी 2013
बड़े और विशाल वृक्ष न केवल पंछियों को आसरा और जीवों को आश्रय देते हैं, बल्कि बड़ी मात्रा में फल, फूल, पत्तों जैसे कई रूपों में उनके भोजन की आपूर्ति भी करते हैं। लिहाजा ऐसे पेड़ों के खत्म होते चले जाने का मतलब है, भविष्य में उन प्रजातियों को भी खो देना जो इन पेड़ों के सहारे अपना जीवन भली-भांति गुजारती आ रही हैं। इसके अलावा ऐसे पेड़ों की विशालकाय जड़े मिट्टी को बांधे रखती हैं, मिट्टी को पुनर्चक्रित करती हैं। कृषि परिदृश्य में भी उम्रदराज और बड़े पेड़ पंछियों और जीवों की ओर से बीज और पराग को फैलाने के लिए बड़ी भूमिका का निर्वाह करते हैं। पर्यावरण को लेकर दुनिया भर में बातें की जा रही हैं। जल, जंगल और ज़मीन बचाने के लिए बहसें हो रही हैं। पेड़ों और हरियाली को बचाने के लिए पहल भी हो रहे हैं। लेकिन दुनिया के बड़े और उम्रदराज पेड़ों और उनकी प्रजातियों को बचाए जाने को लेकर गंभीर प्रयास नहीं हो रहे हैं। जबकि ऐसा होना चाहिए। वैज्ञानिकों के मुताबिक अब समय आ गया है कि इन वृक्षों को बचाने के जतन किए जाएं। ‘साइंस जर्नल’ में प्रकाशित एक लेख के मुताबिक दुनिया भर में उम्रदराज पेड़ों की संख्या घट रही है और यह चिंता का विषय है।

इस बड़े पेड़ों से न केवल पंछियों को आसरा मिलता है, बल्कि जीव-जंतुओं को जीने का भरोसा भी मिलता है। पर्यावरण को बनाए रखने में वृक्षों की भूमिका पर कोई दो राय नहीं है, लेकिन दुनिया के शीर्ष तीन पारिस्थितिकी विज्ञानियों के एक हालिया अध्ययन ने चेतावनी दी है कि दुनिया भर में सौ से तीन सौ साल और इससे ज्यादा बूढ़े पेड़ तेजी से कम हो रहे हैं अगर उन्हें बचाने के प्रयास नहीं किए गए तो की बड़े पेड़ों की प्रजातियाँ ग़ायब हो जाएंगी और इससे पारिस्थितिकी तंत्र को होने वाले नुकसान के लिए हम जिम्मेदार होंगे।

जलवायु परिवर्तन सहित कटाई और असुरक्षित जगह बड़े पेड़ों के अस्तित्व के लिए उतना ही बड़ा संकट है, जितनी जंगल की आग। एक पुराने अध्ययन में बताया गया था कि ला सेल्वा (कोस्टारिका, मध्य अमेरिका) जंगल के पेड़ शायद गर्म तापमान की दोहरी मार झेल रहे हैं। आस्ट्रेलिया के माउंटेन एश फोरेस्ट से लेकर कैलिफोर्निया के योशमिते नेशनल पार्क, ब्राजील के रेनफारेस्ट, यूरोप के जंगल सहित दुनिया भर में उम्रदराज पेड़ों की उम्र कम होने के संकेत मिल रहे हैं। यह नुकसान सिर्फ जंगलों तक ही सीमित नहीं, बल्कि कृषि परिदृश्य और शहरों तक में देखने को मिल रहा है।

पारिस्थितिकी नजरिए से विशाल पेड़ों की कटाई भी विनाशकारी साबित हो सकती है। इस कटाई के परिणामस्वरूप जंगलों का क्षेत्र घट सकता है और कार्बन उत्सर्जन में वृद्धि हो सकती है। कृषि, पेड़ों की कटाई, मानव निवास और जलवायु परिवर्तनों के प्रभावों के कारण विशाल आकार वाले पुराने पेड़ों के भविष्य को खतरा पैदा हो गया है।

आमतौर पर माना जाता था कि सिक्वोया के जिन उम्रदराज पेड़ों को मौसम कोई खतरा नहीं पहुंचा सकता उन पेड़ों पर भी खतरा मंडरा रहा है। सिक्वोया के पेड़ अमेरिका में अमरीकन वेस्ट के सबसे ऊंचे प्रतीक माने जाते हैं जो स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी से भी ऊँचे हो सकते हैं और 2500-3000 सालों तक जीवित रह सकते हैं। हालांकि कैलिफ़ोर्निया के रेडवुड पेड़ भी काफी ऊँचे होते हैं लेकिन सिक्वोया दुनिया के सबसे ऊँचे पेड़ हैं। इनका व्यास दस मीटर तक होता है और वजन छह सौ टन तक। इनकी लंबी आयु का रहस्य इनकी अग्निरोधकता में छिपा है हालांकि इनकी जड़ें ज्यादा गहरी नहीं होती। ऐसे में जंगल की आग से झुलस कर जमीन सूख जाती है तो यह गिर जाते हैं। इन पेड़ों की छाल बहुत मोटी होती है, डाल और पत्तियां भले ही जल जाएं लेकिन तने पर कोई खास असर नहीं होता।

सिक्वोया पेड़सिक्वोया पेड़हाल में खबरें आई थीं कि सिक्वोया नेशनल पार्क, कैलिफोर्निया का विशाल सिक्वोया पेड़ 3240 वर्ष बाद भी नियमित दर से बढ़ रहा है। एक तरफ वैज्ञानिक अध्ययन कर रहे हैं कि जलवायु परिवर्तन का इन वृक्षों और तटवर्ती रेडवुड वृक्षों पर क्या असर पड़ेगा, वहीं दूसरी तरफ यह भी देखा जा रहा है कि क्या बड़े और विशालकाय वृक्ष जलवायु परिवर्तन में कोई महत्वपूर्ण और सकारात्मक भूमिका का निर्वाह कर सकते हैं।

दौ सौ छियासी फुट से ज्यादा ऊंचे और एक सौ तेरह फुट से ज्यादा परिधि वाले इस वृक्ष की सबसे विशाल शाखा का व्यास 6.8 फुट है। वैज्ञानिकों का कहना है कि पेड़ को बढ़ने के लिए सुरक्षित वातावरण और पर्याप्त जगह चाहिए होती है। ऐसे में देखने यह है कि ऐसे बड़े और विशालकाय वृक्षों को हम कब तक बचाए रख सकते हैं, हालांकि यह प्रकृति के कार्य में कम से कम दखलंदाज़ी से ही संभव है।

बड़े और विशाल वृक्ष न केवल पंछियों को आसरा और जीवों को आश्रय देते हैं, बल्कि बड़ी मात्रा में फल, फूल, पत्तों जैसे कई रूपों में उनके भोजन की आपूर्ति भी करते हैं। लिहाजा ऐसे पेड़ों के खत्म होते चले जाने का मतलब है, भविष्य में उन प्रजातियों को भी खो देना जो इन पेड़ों के सहारे अपना जीवन भली-भांति गुजारती आ रही हैं। इसके अलावा ऐसे पेड़ों की विशालकाय जड़े मिट्टी को बांधे रखती हैं, मिट्टी को पुनर्चक्रित करती हैं। कृषि परिदृश्य में भी उम्रदराज और बड़े पेड़ पंछियों और जीवों की ओर से बीज और पराग को फैलाने के लिए बड़ी भूमिका का निर्वाह करते हैं। इस लिहाज से पुराने पेड़ वनस्पति की बहाली के लिए केंद्र बिंदु हो सकते हैं। इसके अलावा इनकी पत्तियों से बड़ी मात्रा में वाष्प बन कर उड़ने वाला पानी स्थानीय वर्षा में भी योगदान देता है।

जंगल के पुराने पेड़ों में भारी गिरावट के कई कारण हैं। भूमि की सफाई, खेती के तरीके, मनुष्यों की दखलंदाज़ी, कीटों के हमले और जलवायु परिवर्तन जैसी वजहें पुराने पेड़ों को हमसे जुदा कर रही हैं। बड़े पेड़ों को एक सुरक्षित जगह और लंबे समय तक स्थिरता की आवश्यकता है। लेकिन समय और स्थिरता हमारी आधुनिक दुनिया के लिए दुर्लभ चीजें बन गई हैं।

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