विदेशियों के चेहरे पर चमक रहा रायपुर ईको फ्रेंडली रंग

Submitted by admin on Fri, 05/24/2013 - 10:06
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दैनिक भास्कर (ईपेपर), 22 मई 2013
जर्मनी, अमेरिका समेत 20 देशों में होली सेलिब्रेशन के लिए हो रही सप्लाई, अरारोट से तैयार होता है रंग

जर्मनी में इसी साल अप्रैल में मनीष के भेजे रंग से विदेशियों ने खेली होलीजर्मनी में इसी साल अप्रैल में मनीष के भेजे रंग से विदेशियों ने खेली होलीयूरोप और अमेरिका के कई देशों के लोगों के चेहरों पर अब रायपुर के चटख लाल गुलाबी रंग लग रहे हैं। इस देशों में मनाई जाने वाली परंपरागत भारतीय होली के लिए रायपुर से रंग एक्सपोर्ट किए जा रहे हैं।

भनपुरी के एक प्लांट में तैयार होने वाले इन रंगों को खाया भी जा सकता है। पिछले महीने कैलिफ़ोर्निया की यूनिवर्सिटी ऑफ बारकेली, इयूजेने यूनिवर्सिटी और जर्मनी के कई प्रांतों में भारतीय अंदाज़ में रंग-बिरंगी होली खेली गई। इस होली सेलिब्रेशन के लिए रायपुर से रंग भेजे गए। जर्मनी, पोलैंड, स्विटज़रलैंड, नीदरलैंड, पुर्तगाल, इटली और अमेरिका जैसे कई देशों में होली खेलने के लिए विदेशी रायपुर से रंग मंगा रहे हैं। लगभग 20 देशों को रंग सप्लाई करने वाले शहर के मनीष ड्रौलिया बताते हैं कि 2001 में होली के रंगों के साइड इफेक्ट को देखते हुए फूड क्वालिटी के रंगों का उत्पादन शुरू किया। लेकिन महंगे होने के कारण इन रंगों को भारतीय बाजार में अच्छा रिस्पांस नहीं मिला। फिर उन्होंने अपने ब्लॉग और वेबसाइट के जरिए इन रंगों का प्रचार-प्रसार शुरू किया। आठ साल पहले उन्हें अमेरिका से 20 किलो रंगों का ऑर्डर मिला। तब उन्हें एक्सपोर्ट के नियमों की जानकारी नहीं थी। लेकिन ग्राहकों का विश्वास जीतने के लिए ढाई हजार का ऑर्डर भेजने के लिए उन्होंने तीस हजार रुपए खर्च कर दिए। साल 2004 से अब तक वे विदेशों में 100 तरह के रंग सप्लाई कर चुके हैं। पांच किलों से लेकर 4 टन रंग तक के ऑर्डर उन्हें मिल रहे हैं।

चाहे तो खा लीजिए रंग


रायपुर में बनने वाले रंग के लिए गुजरात से अरारोट या स्टार्च मंगाया जाता है। फिर इसमें फूड कलर मिलाकर इसे सुखाया जाता है। पॉलिश के बाद इसमें मोगरा और गेंदा का इत्र मिलाया जाता है। गुलाबी, हरा, पीला, लाल समेत दस अलग-अलग रंग पूरी तरह से हैंड मेड है। केवल पॉलिश और पैकेजिंग के लिए मशीन का इस्तेमाल किया जाता है। इन रंगों से रोटी बनाकर खाने पर भी नुकसान नहीं होने के कारण ये खूब लोकप्रिय हैं। होली खेलने के बाद स्किन से पूरी तरह साफ हो जाने और कोई रिएक्शन नहीं होने की गारंटी के कारण रंग और भी लोकप्रिय हो रहे हैं।

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