श्री विधि से धान उत्पादन का लक्ष्य संभव

Submitted by Hindi on Fri, 05/31/2013 - 15:06
Source
पंचायतनामा डॉट कॉम

धान उत्पादन और उत्पादकता बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास किये जा रहे हैं। इस वर्ष बिहार में 25 लाख एकड़ क्षेत्र में श्री विधि से धान उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। बिहार में लगभग 32 से 35 लाख हेक्टेयर में धान की खेती होती है। श्री विधि और संकर किस्म के धान को बढ़ावा देकर उत्पादकता बढ़ाने का कोशिश हो रही है। धान उत्पादन के लिए केंद्र से ‘कृषि कर्मण पुरस्कार’ बिहार और झारखंड को मिले। श्री विधि से धान लगानेवाले किसानों को अनुदान के साथ ही अन्य सुविधाएं देने की योजना चल रही है। रासायनिक खाद के उपयोग को घटा कर जैविक खाद को बढ़ावा देने के लिए भी योजनाएं चलायी जा रही है। धान की खेती के पहले ‘हरी चादर योजना’ के तहत किसानों को अपने खेत में ढैंचा और मूंग लगाने के लिए सरकार मुफ्त बीज उपलब्ध करा रही है। पेश है कृषि उत्पादन आयुक्त आलोक कुमार सिन्हा से खरीफ फसल के उत्पादन की रणनीति पर पंकज कुमार सिंह की बातचीत के मुख्य अंश

धान उत्पादन को लेकर विभाग का लक्ष्य क्या है?


धान की उत्पादकता बढ़ाने पर सरकार का फोकस है। पिछले वर्ष की तुलना में अधिक धान का उत्पादन हो, इसके लिए रणनीति बनायी गयी है। इस वर्ष विभाग का लक्ष्य है कि पूरे राज्य में 100 लाख टन यानी एक करोड़ टन धान का उत्पादन प्राप्त हो सके। राज्य में 32 से 35 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती होती है।

क्या श्री विधि से अधिक धान का उत्पादन मिलता है। इसके लिए सरकार की क्या रणनीति है?


पिछले वर्ष की तुलना में 30 प्रतिशत अधिक क्षेत्र में श्री विधि से धान की खेती होगी। राज्य में 25 लाख एकड़ क्षेत्र में श्री विधि से धान की खेती होगी। इसमें पांच लाख एकड़ के लिए किसानों को अनुदान दिये जायेंगे। इसके तहत किसानों को बीज के साथ ही वर्मी कंपोस्ट के लिए तीन हजार रुपये प्रति एकड़ अनुदान दिये जायेंगे। प्रखंडों में कैंप लगा कर किसानों को यह सुविधा दी जायेगी। इस वर्ष आठ लाख एकड़ में संकर किस्मों के धान लगाने के लिए किसानों को प्रोत्साहित किये जायेंगे। संकर धान लगाने के लिए किसानों को प्रति एकड़ 1200 रुपये अनुदान देने का प्रावधान किया गया है। किसान गोष्ठी और किसान पाठशाला आयोजित कर किसानों को अधिक धान उत्पादन की जानकारी दी जा रही है। इसके लिए राज्य के दोनों कृषि विवि बीएयू और आरएयू के वैज्ञानिकों के साथ ही आइसीएआर और कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि वैज्ञानिकों की भी मदद ली जा रही है।

क्या पंचायतों में श्री दिवस मनाने की योजना है?


हां, श्री विधि के प्रचार के लिए बिहार के हर पंचायत में दो बार श्री दिवस मनाया जायेगा। 25 और नौ जून को पूरे राज्य की सभी पंचायतों में श्री दिवस पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित होंगे। इसमें किसानों को श्री विधि से धान उत्पादन की तकनीक की जानकारी दी जायेगी। इसमें श्री विधि के सफल किसानों के साथ ही अन्य किसान भी भाग लेंगे। श्री विधि से सफल किसान अन्य किसानों को इसके लाभ के बारे में बतायेंगे। कृषि वैज्ञानिक भी किसानों को बेहतर धान उत्पादन के लिए तकनीकी जानकारी देंगे। इसके पहले राज्य और जिला स्तरीय कार्यशाला भी आयोजित होंगे। विभागीय अधिकारियों, एसएमएस एवं अन्य प्रसार कर्मियों को भी इसकी जानकारी दी गयी है।

किसानों की जागरुकता के लिए क्या कार्यक्रम हैं?


किसानों को श्री विधि से खेती की जानकारी के लिए व्यापक प्रचार अभियान चलाये जा रहे हैं। श्री महोत्सव रथ के माध्यम से प्रखंड और पंचायत स्तर पर किसानों को कई प्रकार की जानकारियां दी जा रही हैं। श्री विधि को लोकप्रिय बनाने के लिए वीडियो व सीडी का सहारा लिया जा रहा है। श्री तकनीक से खेती की जानकारी देनेवाले यह वीडियो सभी गांवों में किसानों को दिखाया जायेगा। इसमें श्री विधि पर एक गाना भी तैयार कराया गया है, जो किसानों को यह विधि अपनाने के लिए प्रेरित करेगा। पंपलेट एवं अन्य माध्यमों से भी किसानों को जानकारी दी जा रही है। किसानों को प्रखंड स्तर पर भी कृषि वैज्ञानिक और श्री विधि से खेती करनेवाले किसान जानकारी देंगे।

क्या श्री विधि से मॉनसून कमजोर होने की भरपाई संभव है?


पिछले वर्ष मॉनसून कमजोर होने के बाद भी लक्ष्य के अनुरूप धान का उत्पादन 84 लाख टन हो सका। निश्चित तौर पर श्री विधि तकनीक से धान लगाने पर उत्पादकता काफी बढ़ी है। श्री विधि से धान की खेती करने वाले नालंदा के किसान सुमंत ने प्रति हेक्टेयर 224 टन धान का उत्पादन कर विश्व रिकार्ड बनाया। धान की उत्पादकता बढ़ाने में इस विधि की अहम भूमिका रही है। श्री विधि में कम पानी में अच्छा उत्पादन मिलता है।

क्या कृषि में बड़ी मशीनों का उपयोग लाभकारी है। यांत्रिकीकरण को बढ़ावा देने के लिए सरकार क्या कर रही है?


खेती में मशीनों का प्रयोग लाभकारी है। इससे कृषि मजदूरों की समस्या दूर होती है, वहीं समय की भी बचत होती है। समय पर खेती होने से अधिक उत्पादन मिलता है। राज्य में यांत्रिकीकरण को बढ़ावा देने के लिए सरकार योजनाएं चला रही हैं। कृषि यंत्रों की खरीद पर सरकार 30 से 90 प्रतिशत तक अनुदान उपलब्ध करा रही है। अनुदानित पर कृषि यंत्र खरीदने के लिए राज्य स्तर से लेकर जिला स्तर तक कृषि यांत्रिकीकरण मेला का आयोजन किया जाता है। कृषि यंत्रों पर अनुदान के लिए बजट बढ़ाये जा रहे हैं। अनुदान मिलने से राज्य में काफी संख्या में किसान फसल काटने वाली मशीन कंबाइन हार्वेस्टर की खरीद कर रहे हैं। कृषि यंत्रों पर अनुदान के लिए 300 करोड़ से अधिक के बजट का प्रावधान किया जाता है। सरकार ने पैडी ड्रम सीडर व पैडी ट्रांसप्लांटर को प्रोत्साहित करने के लिए योजना शुरू की है। समय पर धान की रोपनी होने से गेहूं की खेती भी समय से हो सकेगी।

खरीफ मौसम में दलहन उत्पादन की योजना है क्या?


इस वर्ष श्री विधि महाअभियान के तहत खेतों की मेढ़ पर अरहर और उड़द की खेती को बढ़ावा देने की योजना बनायी गयी है। जिस खेत में श्री विधि से धान की रोपनी की जायेगी, उसकी मेढ़ पर अरहर की एक पंक्ति या उड़द की दो पंक्ति में बीज की बोआई करायी जायेगी। इससे न केवल दलहन उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि समेकित कीट प्रबंधन के लिए पक्षी बैठका के रूप में भी अरहर के पौधे उपयोगी होंगे। अरहर व उड़द के बीज किसानों को उपलब्ध कराने की दिशा में प्रयास किये जा रहे हैं।

श्री विधि को बढ़ावा देने में बेहतर काम करने वालों को पुरस्कृत करने की क्या योजना है?


श्री विधि को बढ़ावा देने के लिए बेहतर काम करनेवाले किसान सलाहकार एवं किसानों को पुरस्कृत करने की योजना है। प्रत्यक्ष के अतिरिक्त श्री विधि से 250 एकड़ से अधिक क्षेत्रफल में धान लगवाने वाले किसान सलाहकार को पांच हजार रुपये का पुरस्कार दिया जायेगा। प्रत्येक प्रखंड में सबसे अधिक उपज प्राप्त करनेवाले किसान को दस हजार रुपये का पुरस्कार के साथ ही प्रशस्तिपत्र दिया जायेगा। श्री विधि खेती के लिए चयनित गांव को होर्डिंग में प्रदर्शित किया जायेगा। इसमें श्री विधि से हुई उपज और पारंपरिक तरीके से की गयी खेती से मिली उपज को दर्शाया जायेगा।

राज्य में कृषि के विकास पर क्या कहेंगे?


राज्य में कृषि समुचित विकास के लिए कई योजनाएं चलायी जा रही हैं। अलग-अलग जिलों और क्षेत्रों की मिट्टी के आधार पर फसल, फल व सब्जी उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए योजनाएं तैयार की गयी हैं। मिट्टी जांच केंद्र में किसान आसानी से अपने खेत की मिट्टी की जांच करा सकते हैं। सरकार ने अपने स्तर से भी पंचायत स्तर पर मिट्टी के कई नमूने लेकर जांच करायी है। श्री अभियान चला कर इसे किसानों के बीच लोकप्रिय बनाया जा रहा है। अब किसान खुद बता रहे हैं कि कम लागत में श्री विधि से अधिक उत्पादन मिल रहा है। खेती को लाभकारी बनाने के लिए हर संभव प्रयास हो रहे हैं। कृषि के माध्यम से राज्य विकास कर रहा है। इससे राज्य में प्रति व्यक्ति आय बढ़ाने के साथ ही रोजगार की संभावना भी बढ़ रही है। खेती में अब पढ़े-लिखे लोग भी रुचि ले रहे हैं।

किसानों के मन में श्रीविधि से जुड़ी भ्रांतियां व सच


पारंपरिक तरीके से एक एकड़ में धान की खेती करने में 30-40 किलोग्राम धान की खपत होती है। लेकिन एसआरआइ तकनीक में मात्र दो किलोग्राम में ही एक एकड़ में खेती हो सकती है। किसान भाइयों को अभी भी यह बात अविश्वमसनीय लगती है, जबकि लोगों ने ऐसा करके देख लिया है।

यह भी सच है कि आम तौर पर साधारण तरीके से खेती करने में 30-35 दिनों के बिचड़े को खेतों में रोपने के लिए लाया जाता है, वहीं एसआरआइ में 8 से 12 दिनों के बिचड़े को ही लगाया जाता है।

किसान भाई एक जगह 3-4 बिचड़े को लगाते हैं और यह एक परंपरा का रूप ले चुकी है, लेकिन एसआरआइ में एक जगह पर एक ही बिचड़े को लगाया जाता है। इससे बीज व बिचड़े की बचत होती है।

एक आम धारणा किसानों के मन में बैठी है कि धान पानी वाली फसल है इसी कारण वे खेतों में हमेशा पानी रखा करते हैं। लेकिन एसआरआइ ने यह सिद्ध कर दिया की कम पानी में भी धान की बंपर फसल ली जा सकती है। एसआरआइ विधि में ज्यादा पानी की नहीं, बल्कि ज्यादा नमी की जरूरत होती है। यानी इस विधि से कम पानी में भी अच्छी फसल हो सकती है।

एसआरआइ किसी धान के बीज या कंपनी का नाम नहीं है। बहुत सारे किसानों में यह भ्रांति है। वास्तव में एसआरआइ धान लगाने की पद्धति का नाम है

देसी धान को भी एसआरआइ तरीके से लगाया जाये तो भी उससे बंपर फसल ली जा सकती है।

एसआरआइ तकनीक में बिना वीडर चलाये फसल नहीं प्राप्त की जा सकती है। किसान भाई वीडर चलाने में कोताही बरतते हैं और फिर इस पद्धति को दोष देते हैं। जबकि सामान्य पद्धति में वीडर चलाना जरूरी नहीं है।

एसआरआइ में तीन बार वीडर चलाना अनिवार्य है। इसके बिना फसल उम्दा नहीं हो सकती है।

एसआरआइ में जैविक खाद का उपयोग करें तो फसल अच्छी होगी। इस विधि में रासायनिक खाद से भी दूरी बनायी जाती है।

इस विधि में श्रम कम लगता है। किसान वीडर के माध्यम से ही सारा काम कर सकता है। इससे किसानों को अधिक लाभ होता है व खेती लाभदायक साबित होती है।

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