टलता गया समय, बढ़ती गयी लागत

Submitted by Hindi on Tue, 06/11/2013 - 10:31
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पंचायतनामा डॉट कॉम
राज्य में 15 वृहद व मध्य सिंचाई परियोजनाएं पूरी हुई हैं। नौ वृहत सिंचाई परियोजनाओं से 2187.88 हेक्टेयर व पांच मध्य सिंचाई परियोजनाओं से 294.55 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई क्षमता बढ़ी है। आठ वृहद व चार मध्यम सिंचाई परियोजनाओं का काम चल रहा है। इनमें पश्चिमी कोसी नगर योजना, दुर्गावती जलाशय योजना, उत्तरी कोयल जलाशय परियोजना, बटेश्वरनाथ पंप नहर योजना, पुनपुन बांध योजना, ढादर सिंचाई योजना, उडेरास्थान बांध योजना व बर्नर सिंचाई योजना वृहद एवं मंडाई बीयर योजना, बटेश्वनर जलाशय परियोजना, कुंडघाट जलाशय परियोजना व कर्मनाशा पंप नहर योजना मध्यम स्तर की हैं। सब को वर्ष 2014 में पूरा करने का नया लक्ष्य तय किया गया है, पर कार्य की जो प्रगति दर है, उससे इस लक्ष्य को पाने की संभावना कम है। कर्मनाशा पंप नहर योजना बिहार-उत्तर प्रदेश और बटेश्वगर जलाशय परियोजना झारखंड-बिहार के बीच अंतरराज्यीय बाधा में फंसी है। बटेश्व्र जलाशय व कुंडघाट परियोजना को इसी साल पूरा होना है, पर यह संभव नहीं है।

राज्य की बारह वृहद और मध्यम सिंचाई परियोजनाओं का हाल यही है कि उनके पूरा होने का समय टलता गया और उनकी प्राक्कलित राशि बढ़ती गयी। इन परियोजनाओं पर सरकार का धन 70 से 102 गुना तब ज्यादा खर्च हो रहा है, पर अब भी काम अधूरा है। पश्चिमी कोसी नहर परियोजना 52 साल पहले स्वीकृत हुई थी। 41 साल पहले इसका काम शुरू हुआ। उत्तरी कोयल जलाशय परियोजना का काम 43 साल, बर्नर सिंचाई परियोजना 38 तथा बटेश्वर पंप नहर योजना, दुर्गावती जलाशय योजना एवं ढादर सिंचाई परियोजना 33-34 साल से निर्माणाधीन हैं।

पश्चिमी कोसी नहर परियोजना


यह परियोजना 1961 की है। इस पर काम ग्यारह साल बाद 1972 में शुरू हुआ। 40 साल से यह योजना अधूरी पड़ी है। जब काम शुरू हुआ था, तब इसका बजट केवल 13.49 करोड़ था। आज इसका बजट बढ़ता हुआ 1378.71 करोड़ का हो गया। यह प्रारंभिक बजट से करीब 102 गुना ज्यादा है।

दुर्गावती जलाशय योजना


यही हाल दुर्गावती जलाशय योजना का है। 1976 में इस पर काम शुरू हुआ, लेकिन अब भी काम अधूरा है। इसे 25.30 करोड़ में पूरा होना था। आज इसका बजट 1064.28 करोड़ (करीब 42 गुना ज्यादा) का है। इसे 2014 में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, जबकि अब तक 760 करोड़ रुपये ही खर्च हो पाये हैं। मुख्य नहर का काम 35 प्रतिशत और जल वितरण प्रणाली का काम 90 प्रतिशत से ज्यादा बाकी है। जाहिर है 2014 में इसके पूरा होने पर संदेह है।

उत्तरी कोयल जलाशय परियोजना


1970 की इस परियोजना पर 1972 में काम शुरू हुआ। तब इसे 30 करोड़ में पूरा होना था। 40 साल बाद भी यह परियोजना अधूरी है, इसकी प्राक्कलित राशि में करीब 43 गुना से ज्यादा (1289.50 करोड़) का इजाफा हुआ है। इसे 2014 में पूरा करने का लक्ष्य है, लेकिन अभी तक 53 प्रतिशत (686.28 करोड़) राशि ही खर्च हो सकी है। जल वितरण प्रणाली का काम 65 प्रतिशत भी नहीं हुआ है।

बटेश्वर पंप नहर योजना


यह योजना 1979 में शुरू हुई। साढ़े तीन दशक से इस परियोजना का काम चल ही रहा है। इसे 188.02 करोड़ में पूरा होना था। अब इसका बजट 577.94 करोड़ का है। इसे भी 2014 में पूरा करने की बात है, लेकिन अभी आधी रकम की खर्च हो सकी है। राज्य विभाजन के बाद यह प्रोजेक्ट झारखंड-बिहार के बीच और भी उलझ गया है।

बटेश्वर जलाशय योजना


यह योजना 1976 की है। 37 साल बाद भी यह पूरी नहीं हुई। इसे 4.01 करोड़ में पूरा होना था। अभी इसका बजट 116.02 करोड़ का है। यानी करीब 29 गुना ज्यादा। इसे इसी साल पूरा होना है, लेकिन झारखंड-बिहार के बीच मामला फंसा हुआ है।

पुनपुन बांध परियोजना


इस परियोजना की स्थिति और भी खराब है। इसे 1998 में 20.78 करोड़ के बजट के साथ शुरू किया गया था। आज इसका बजट 658.12 करोड़ (31.67 गुना ज्यादा) का है।
इसे भी 2014 में पूरा होना है, जबकि जन वितरण प्रणाली का काम भी शुरू नहीं हो पाया है। राशि भी अब तक आधी (331.92) ही खर्च हो सकी है

ढादर सिंचाई परियोजना


यह 34 साल पुरानी योजना है। इसे 1979 में जब शुरू किया गया था। इसका बजट साल-दर-साल बढ़ता हुआ 301.79 करोड़ हो गया है। इसे 2014 में पूरा करने का नया लक्ष्य रखा गया, जबकि अब तक आधी राशि (126.76 करोड़) भी खर्च नहीं हो सकी है।

बर्नर सिंचाई परियोजना


यह परियोजना 38 साल पुरानी है। 1975 में 8.03 करोड़ के बजट के साथ इसे शुरू किया गया था। आज इसकी प्राक्कलित राशि बढ़ कर 590.98 करोड़ हो गयी है। यानी 38 साल में इसका बजट करीब 74 गुणा बढ़ गया। इसे भी 2014 में पूरा करने का नया लक्ष्य रखा गया, लेकिन 25 फीसदी से ज्यादा काम नहीं हुआ है। खर्च भी अभी तक 16-17 फीसदी (96.96 करोड़) से ज्यादा नहीं हुआ है।

उडेरास्थान बांध परियोजना


यह 2005 की परियोजना है, जिसे 2007 में शुरू किया गया। इस पर 204.00 करोड़ रुपये खर्च होने हैं और इसे 2014 में पूरा होना है, लेकिन अभी तक आधी से कुछ अधिक ही राशि (135.92 करोड़) खर्च हो सकी है। 70 प्रतिशत काम अभी बाकी है।

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