चुनौतियों के बरक्स

Submitted by Hindi on Mon, 07/01/2013 - 16:10
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जनसत्ता (रविवारी), 30 जून 2013
अंतरराष्ट्रीय मंचों के साथ-साथ राष्ट्रों की सरकारें भी आपदा प्रबंधन, बचाव और पुनर्वास के लिए प्रयासरत हैं। वैसे तो दुनिया के सभी देशों में आपदा प्रबंधक की व्यवस्था है, लेकिन स्तरीय व्यवस्थाएं बहुत कम मुल्कों में हैं। 2006 में बॉन विश्वविद्यालय में एक संयुक्त पाठ्यक्रम है जिसके बाद ‘आपदा रोकथाम और जोखिम संचालन में मास्टर’ डिग्री ली जा सकती है। नीदरलैंड में राष्ट्रीय स्तर पर आपातकालीन तत्परता और आपात प्रबंधन के लिए आंतरिक और साम्राज्य संबंधों का मंत्रालय है और यह राष्ट्रीय संकट केंद्र का संचालन करता है। दुनिया के कोने-कोने में अक्सर आपदा की खबरें आती रहती हैं। सूनामी, भूस्खलन, हिमस्खलन, बाढ़, भूकंप, जंगल की आग, चक्रवाती तूफान, बर्फानी तूफान, ओलावृष्टि, महामारी, सूखा, अकाल वगैरह ऐसी आपदाएं हैं, जिससे आमतौर पर दुनिया का कोई न कोई कोना प्रभावित रहता है। यूरोप, आस्ट्रेलिया, अमेरिका के कैलीफोर्निया में हर साल गर्मी के मौसम में जंगल की आग से भारी तबाही होती है। भारत समेत जापान, इंडोनेशिया, अमेरिका, न्यूजीलैंड, फिजी, टोंगा, चिली, मैक्सिको और सोलोमन द्वीप में बार-भूकंप के झटकों से भारी तबाही होती रही है। पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन और हिमस्खलन के कारण हर साल बर्बादी के मंजर देखने को मिलते हैं। ऐसी आपदाओं से निपटने के लिए योजनाबद्ध आपदा प्रबंधन की तैयारी भी पुख्ता होनी चाहिए।

दुनिया भर में आपदा प्रबंधन एक चुनौतीपूर्ण विषय है। राष्ट्र अपना बजट बनाते समय आपदाओं से निपटने के मद में धन रखना नहीं भूलते। कुछ देश आपदा प्रबंधन को बहुत गंभीरता से लेते हैं। इसका उदाहरण तब देखने को मिला जब पिछले साल इटली की एक अदालत ने वहां के छह वैज्ञानिकों और एक पूर्व सरकारी अधिकारी को साल 2009 में आए एक घातक भूकंप के बारे में सही जानकारी न देने पर छह साल की सजा सुनाई है। अप्रैल में चीन में भूकंप से मरने वालों की संख्या 192 पहुंच गई थी, फिर भी चीन ने इस बार दुनिया के सामने बेहतर आपदा प्रबंधन का नमूना पेश किया। मोबाइल वैन से डॉक्टर जगह-जगह पहुंचकर लोगों की जांच कर रहे थे। करीब छह हजार राहतकर्मी इस क्षेत्र में राहत और बचाव के काम में तत्परता से लगाए गए थे।

अनेक अंतरराष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संगठन हैं जो आपात स्थिति और आपदाओं के दौरान जान और माल की सुरक्षा के लिए काम करते हैं। आपातकालीन प्रबंधकों की अंतरराष्ट्रीय एसोसिएशन (आईएईएम) लाभ रहित शैक्षिक संगठन है। इस समय इस संगठन की सात परिषदें-एशिया, कनाडा, यूरोप और संयुक्त राज्य अमेरिका में काम कर रही हैं।

आपात स्थिति का जवाब देने में राष्ट्रीय रेड क्रॉस ने अक्सर निर्णायक भूमिका निभाई है। संयुक्त राष्ट्रसंघ में आपातकालीन प्रतिक्रिया की जिम्मेदारी प्रभावित देश में रेजिडेंट समन्वयक की है। हालांकि प्रभावित देश के अनुरोध पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया का समन्वयन व्यावहारिक तौर पर संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मामलों के समन्वयन कार्यालय द्वारा संयुक्त राष्ट्र आपदा आकलन और समन्वयन टीम तैनात करके किया जाता है।

2001 के बाद से यूरोपीय संघ ने नागरिक सुरक्षा के लिए सामुदायिक प्रक्रिया को अपनाया है जिसने वैश्विक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभानी शुरू कर दी है।

अंतरराष्ट्रीय मंचों के साथ-साथ राष्ट्रों की सरकारें भी आपदा प्रबंधन, बचाव और पुनर्वास के लिए प्रयासरत हैं। वैसे तो दुनिया के सभी देशों में आपदा प्रबंधक की व्यवस्था है, लेकिन स्तरीय व्यवस्थाएं बहुत कम मुल्कों में हैं। 2006 में बॉन विश्वविद्यालय में एक संयुक्त पाठ्यक्रम है जिसके बाद ‘आपदा रोकथाम और जोखिम संचालन में मास्टर’ डिग्री ली जा सकती है। नीदरलैंड में राष्ट्रीय स्तर पर आपातकालीन तत्परता और आपात प्रबंधन के लिए आंतरिक और साम्राज्य संबंधों का मंत्रालय है और यह राष्ट्रीय संकट केंद्र का संचालन करता है।

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