पानी रे पानी

Submitted by admin on Sun, 09/01/2013 - 15:01
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जनसत्ता (रविवारी), 25 अगस्त 2013

जल एक असाधारण गुणों वाला द्रव है। साधारण तापमान में वृद्धि के साथ पदार्थों के आयतन में वृद्धि होती है, लेकिन जल एक अपवाद है। शून्य डिग्री सेल्सियस पर जल ठोस यानी बर्फ के रूप में होता है। तापमान बढ़ने पर बर्फ जल में बदलने लगती है। लेकिन शून्य से 4 डिग्री सेल्सियस तक आयतन घटता है यानी इसके घनत्व में वृद्धि होती है। इस तरह जल का घनत्व चार डिग्री सेल्सियस पर अधिकतम होता है। चार डिग्री सेल्सियस के ऊपर तापमान को बढ़ाने पर बल का आयतन बढ़ता है यानी इसका घनत्व कम होता है।

जल के बिना धरती पर जीवन संभव नहीं। जीवधारियों के शरीर का 65-70 प्रतिशत हिस्सा जल ही होता है। कोशिकाओं के पाए जाने वाले जीवद्रव्य (प्रोटोप्लास्म) का अधिकांश भाग भी जल होता है। धरती पर मौजूद विपुल जल राशि सूर्य से आने वाली विकिरणों को अवशोषित कर धरती के तापमान को जीवन अनुकूल बनाए रखने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। धरती से इतर किसी ग्रह या पिंड में जीवन की संभावना को तलाश करते वैज्ञानिक पहले यह देखते हैं कि उस ग्रह या पिंड पर जल मौजूद है या नहीं, क्योंकि जल के बिना जीवन का पनपना और उसका संयोजित होना असंभव है। जल हमारी सभ्यता और संस्कृति के साथ भी गहराई से जुड़ा रहा है। संसार की सभी सभ्यताएं-चाहे वह सिंधु घाटी की सभ्यता हो या मिस्र की, मेसोपोटामिया की सभ्यता हो या चीन की-नदियों और अन्य जलस्रोतों के आसपास ही विकसित हुई। जल एक रंगहीन, स्वादहीन और पारदर्शी यौगिक है। यह धरती पर ठोस, द्रव और गैस तीनों अवस्थाओं में पाया जाता है? जल के एक अणु में हाइड्रोजन के दो और ऑक्सीजन का एक परमाणु होता है।

लेकिन पहले जल को एक यौगिक नहीं बल्कि एक तत्व यानी एलिमेंट माना जाता था यहां तक कि प्राचीन रसायनविज्ञानी माने जाने वाले कीमियागर भी जल को तत्व मानते थे। 1786 में हेनरी केवेडिश ने पहले-पहल यह साबित किया कि जल कोई तत्व नहीं बल्कि यौगिक है। इसके दो वर्ष बाद 1783 में एंतोइन लारेंट लेवोजिए ने अपने प्रयोगों से सिद्ध किया कि जल हाइड्रोजन और ऑक्सीजन नामक तत्वों के मेल से बना एक यौगिक है।

जल एक असाधारण गुणों वाला द्रव है। साधारण तापमान में वृद्धि के साथ पदार्थों के आयतन में वृद्धि होती है, लेकिन जल एक अपवाद है। शून्य डिग्री सेल्सियस पर जल ठोस यानी बर्फ के रूप में होता है। तापमान बढ़ने पर बर्फ जल में बदलने लगती है। लेकिन शून्य से 4 डिग्री सेल्सियस तक आयतन घटता है यानी इसके घनत्व में वृद्धि होती है। इस तरह जल का घनत्व चार डिग्री सेल्सियस पर अधिकतम होता है। चार डिग्री सेल्सियस के ऊपर तापमान को बढ़ाने पर बल का आयतन बढ़ता है यानी इसका घनत्व कम होता है। किसी भी अन्य द्रव में जल जैसा यह गुणधर्म देखने को नहीं मिलता।

चूंकि जल का घनत्व चार डिग्री सेल्सियस पर अधिकतम होता है, बर्फ (जो शून्य डिग्री या इससे भी कम तापमान पर होती है) का घनत्व जल से कम होता है। तभी बर्फ जल से हल्की होने के कारण उस पर तैरती है। तैरते समय बर्फ का दसवां हिस्सा पानी से बाहर होता है। इस तरह बर्फ का दस फीसद हिस्सा पानी से बाहर जबकि 90 फीसद हिस्सा पानी के अंदर रहता है। यही कारण है महासागरों में तैरते हुए बर्फ के हिमखंडों (आइसवर्ग) का दस फीसद हिस्सा ही पानी से ऊपर दिखाई देता है। अंग्रेजी में इसी को लेकर एक कहावत है ‘टिप आफ द आइसवर्ग।’

अटलांटिक महासागर में 1912 में हिमखंड से टकरा जाने के कारण ही टाइटन नामक जहाज दुर्घटनाग्रस्त होकर डूब गया था। जल के बाहर का हिमखंड केवल दस फीसद होता है, इस तथ्य की अनदेखी करने के कारण ही शायद यह दुर्घटना हुई। समुद्र से गुजरते और भी जहाज हिमखंड संबंधी इस वैज्ञानिक तथ्य से अनभिज्ञ होने के कारण इसके छोटे से हिस्से को पानी से बाहर देखकर भ्रम में पड़ जाते हैं और दुर्घटनाग्रस्त हो जाते हैं।

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