गंगा : कोई तो थाम लो...

Submitted by admin on Wed, 09/04/2013 - 10:53
Printer Friendly, PDF & Email
Source
यू-ट्यूब

भारत की सबसे महत्त्वपूर्ण नदी गंगा, जो भारत और बांग्लादेश तक 2,510 किमी की दूरी में उत्तराखंड के गंगोत्री से लेकर बंगाल की खाड़ी के सुंदरवन तक विशाल भू भाग को सींचती है, गंगा देश की प्राकृतिक संपदा ही नहीं, जन जन की भावनात्मक आस्था का आधार भी है।गंगा अपने सहायक नदियों के साथ दस लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल के अति विशाल उपजाऊ मैदान की रचना करती है। गंगा नदी नहीं अपितु एक संस्कृति है। पावन, पतितपावनी, पापतारिणी गंगा को मां का स्थान ना केवल हमारे पुराणों में दिया गया है वरन् गंगाजी हमारी सभ्यता की भी परिचायक हैं। लेकिन करोड़ों लोगों की आस्था का केन्द्र गंगा को मात्र बिजली बनाने का साधन मान लिया गया है। गंगा के शरीर पर बांध बनाकर गंगा के प्राकृतिक स्वरूप को समाप्त किया जा रहा है। कच्चे हिमालय को खोद कर सुरंगे बनाई जा रही हैं। जिससे पहाड़ी जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। उत्तराखंड को गंगा का मायका भी कहा जाता है। लेकिन गंगा को उसके मायके में ही हत्या की स्थिति में लाया जा रहा है। गंगा क्षत-विक्षत हो रही है। कन्या भ्रूण हत्या पर कानून है। पर संस्कृति की पालक नदियों के रक्षण के लिए हमारे पास कोई सोच नहीं है।

More From Author

Related Articles (Topic wise)

Related Articles (District wise)

About the author

नया ताजा