गंगा निवेदन

Submitted by admin on Sat, 09/21/2013 - 12:02

आदरणीय/आदरणीया,


अभिवादन! आज 21 सितम्बर, 2013 है। स्वामीश्री ज्ञानस्वरूप सानंद (पूर्व नाम प्रो जी डी अग्रवाल) के गंगा अनशन का 101वां दिन।

बीते 100 दिनों में इस अनशन के समर्थन और इसे आत्महत्या का प्रयास बताकर जेल में ठूंसने के विरोध में सर्वश्री भगवानसिंह परमार की पहल पर बुंदेली जनों के बीच एक बैठक, जलपुरूष राजेन्द्र सिंह की पहल पर दिल्ली की दो बैठकों में अपील, वैज्ञानिक विक्रम सोनी की पहल पर रवि चोपड़ा, राजेन्द्र सिंह, लक्ष्मी सहगल और एस के गुप्ता की उपस्थिति में हुई छोटी सी प्रेस वार्ता और गाज़ियाबाद के विक्रांत शर्मा की पहल पर चार युवकों की मातृसदन यात्रा, समर्थन की तैयारियाँ, गांधी युवा बिरादरी के संयोजक रमेश शर्मा द्वारा जारी एक अपील, गांधी शांति प्रतिष्ठान, दिल्ली परिवार के बीच हुई एक प्रार्थना सभा, सजल श्रीवास्तव द्वारा नियमित जानकारी भेजने का लिया गया दायित्व और भारतेन्दु प्रकाश, मधु भादुड़ी, मधु किश्वर, मनोज मिश्र, मानस रंजन, सिराज केसर, अश्विनी मिश्र, नरेन्द्र महरोत्रा,अजीत कुमार, विजय सिंह बघेल, आर्यशेखर, राजेन्द्र पोद्दार, मेजर हिंमाशु, रविशंकर, अनुज अग्रवाल, कृष्णपाल, ब्रजेन्द्र प्रताप, अरविंद कुशवाहा, निवेदिता वार्ष्णेय, जनक दफ्तरी, श्रीनिवास,महेन्द्र गुप्ता, दीवान सिंह, हेमंत ध्यानी, डॉ. विजय वर्मा व मातृसदन द्वारा जताई गई चिंता मुझ तक पहुंची।मीडिया में कवरेज के नाम पर हिंदी वाटर पोर्टल, हरनंदी कहिन, हमारी धरती, एन्वायरमेंट रिपोर्टर, इंडुज बैकन्स तथा राष्ट्रीय सहारा ने प्रमुखता से मेरे दो लेखों को स्थान दे विशेष सहयोग दिया। इसके अलावा हिंदुस्तान टाइम्स में निवेदिता खांडेकर ने आज एक अच्छी रिपोर्ट दी है। दैनिक जागरण, अमर उजाला आदि में चंद औपचारिक खबरों से भी मैं इस बीच रुबरु हुआ। हालांकि मेरे लेखों पर जगद्गुरु शंकराचार्य जी की नाराजगी के स्वर भी मेरे कानों तक पहुंचे; मैं इसे भी एक तरह की संवेदनशीलता ही मानता हूं।

मुझे लिखते हुए दुख है कि तमाम अपील और संवाद के बावजूद संवेदना की यह अपर्याप्त पूंजी ही मैं जोड़ सका। संभवतः संवेदना के इन थोड़े से स्वरों के बाहर फैली व्यापक उपेक्षा को देखते हुए ही स्वामी सानंद ने 19 सितम्बर को ही संकल्प ले लिया था कि वह21 सितम्बर, 2013 की शाम से जल छोड़ देंगे। मुझे भय है कि कहीं निर्जला रहने का यह संकल्प चुप्पी के चेहरे पर एक कालिख और न पोत दे काश! ऐसा न हो; इसलिए गंगा भक्तों और उन चरणों में मेरी एक छोटा सा निवेदन जिनकी ओर इस कठिन वक्त में देश बड़ी उम्मीदों से निहार रहा है! कृपया स्वीकारें।

स्वामी सानंद के गंगा तप की उपेक्षा किए जाने के विरोध में गंगा प्राधिकरण के तीन विशेषज्ञ राजेंद्र सिंह, राशिद एच. सिद्दिकी और रवि चोपड़ा ने इस्तीफा दिया।

Disqus Comment

More From Author

Related Articles (Topic wise)

Related Articles (District wise)

About the author

अरुण तिवारीअरुण तिवारी

शिक्षा:


स्नातक, पत्रकारिता एवं जनसंपर्क में स्नातकोत्तर डिप्लोमा

कार्यवृत


श्रव्य माध्यम-

नया ताजा