बादल - तेरे रूप अनेक

Submitted by admin on Sun, 10/06/2013 - 11:01
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राधाकांत भारती की किताब 'मानसून पवन : भारतीय जलवायु का आधार'
बादल मौसम और होने वाली वर्षा की जानकारी देते हैं। आसमान में काफी ऊंचाई पर हिमकण वाले बादल तो बालों की लटें या घूंघट की तरह दीखते हैं। सीरस प्रकार के बादल होते हैं। ये बादल खराब मौसम का संकेत हैं। पतली-पतली तहों वाले सफेद दूधिया बादल, काफी ऊंचाई पर होने पर भी चौबीस घंटों से वर्षा देते हैं जिन्हें पक्षाभ-स्तरी (सिरोटस्ट्रेटस) बादल कहते हैं। गाढ़े रंग के झीने बादल कभी-कभी बरसात लाते हैं या तैरते हुए चले जाते हैं, इन्हें मध्य-स्तरी (आल्टोस्ट्रेटस) बादल कहते हैं। सिद्धांतः गर्म हवा फैलती है और ऊपर उठती है, ऊपर उठने पर एक ऊंचाई तक जाने से हवा ठंडी होने लगती है। इस क्रिया में हवा में मौजूद जलवाष्प द्रवीभूत होकर जलबुंदकियां बनाती हैं। यदि हवा और अधिक ऊंचाई पर पहुँचती है तो सघन होते हुए ये जलबुंदकियां हिमकण बन जाते हैं। ऊपर आसमान में भारी मात्रा में मौजूद इन जलबुंदकियों या हिमकणों के समूह से बादल या मेघराशि का निर्माण होता है। हवा के बहाव के साथ ही आसमान में तैरते बादलों का समूह जब अधिक सघन होता है तो जल की बूंदों के रूप में या ऊंचे पर्वतों पर हिम के रूप में बरसने लगता है।

जैसा कि आपने देखा होगा कि खुले आसमान में, विशेषकर बरसात में बादलों के विशाल समूह आते-जाते हैं। कभी इनसे वर्षा होती है तो कभी ये बिन बरसे ही भाग जाते हैं। कई बार आसमान के विशाल फलक पर इन मेघराशियों द्वारा तरह-तरह की आकृतियों का बनना-बिगड़ना भी एक मनमोहक दृश्य होता है। इन बादलों को मूलतः तीन समूहों में विभाजित किया गया है। ल्युक हार्वर्ड नामक वैज्ञानिकों ने 1804 में इन बादलों का नामकरण लैटिन में रखा, ये हैं-सिरस यानी घुंघराले बालों जैसे, पक्षाभ मेघ (क्युमलस) यानी कपासी या रुईया - ऊन की ढेर-जैसे तथा स्तरी मेघ स्ट्रैटस यानी सीधे परतदार बादल। इन तीन प्रकार के बादलों को उपवर्गों में भी बांटा गया है। इस तरह के रंग-रूप और ऊंचाई के अनुसार बादलों को दस उपवर्गों में नामांकित किया गया है।

ये सभी बादल मौसम और होने वाली वर्षा की जानकारी देते हैं। आसमान में काफी ऊंचाई पर हिमकण वाले बादल तो बालों की लटें या घूंघट की तरह दीखते हैं। सीरस प्रकार के बादल होते हैं। ये बादल खराब मौसम का संकेत हैं। पतली-पतली तहों वाले सफेद दूधिया बादल, काफी ऊंचाई पर होने पर भी चौबीस घंटों से वर्षा देते हैं जिन्हें पक्षाभ-स्तरी (सिरोटस्ट्रेटस) बादल कहते हैं। गाढ़े रंग के झीने बादल कभी-कभी बरसात लाते हैं या तैरते हुए चले जाते हैं, इन्हें मध्य-स्तरी (आल्टोस्ट्रेटस) बादल कहते हैं। ऊंचाई पर फैले इन बादलों से सूर्य के चतुर्दिक, रुपहला या सुनहला बिंब दिखाई पड़ता है। दिन में आल्टो स्ट्रेट्स बादल की पहचान यह ‘सूर्यमंडल’ की छवि भी है। खुले नीले आकाश में अचानक एक ओर उभरकर आए और विशालकाय गोभी की तरह उभरे आकार में फैले बादलों को कपासी (क्युमलस) प्रकार का माना जाता है। आसमान में गर्मियों के उत्तरार्ध में टेढ़ी-मेढ़ी गोलाई लिए धब्बों की तरह फैले बादल-स्तरी कपासी (स्ट्रैटोक्युमलस) होते हैं।

आकाश में लंबी-लंबी गोलाइयों के साथ फैले धारी वाले बादल पक्षाभ कपासी (सिरोक्युमलस) होते हैं, जो मौसम की अनिश्चित्ता प्रदर्शित करते हैं। आसमान की निचली सतह पर सूर्य किरणों से लाल होने वाले बादल मध्य कपासी (आल्टोक्युमलस) प्रकार के हैं, जो सूर्यताप से हमारी रक्षा करते हैं और मौका पाते ही तेज बौछार के साथ धरती पर बरस पड़ते हैं।

घने काले कजरारे बादल जो घनघोर वर्षा लाने वाले होते हैं - निंबस प्रकार के होते हैं। लैटिन में निंबस का अर्थ ‘वर्षा’ होता है। अतः ऐसे बादलों को वर्षा-मेघ (निंबस स्ट्रैटस) मेघ कहा जाता है। वर्षा की रिमझिम फुहार देने वाले हल्के काले रंग वाले बादल ‘स्ट्रैटस’ प्रकार के होते हैं। ये आसमान में तहदार दिखाई पड़ते हैं, किंतु पर्वतीय प्रदेशों तथा धरती के निकट घना कोहरा बनाते हैं।

आसमान में अधिक ऊंचाई पर फैले रहने वाले बादल जो प्रायः ओला वृष्टि या बड़ी-बड़ी बूंदों की बौछार करते हैं कपासी वर्षी (क्युमलोनिंबस) मेघ कहे जाते हैं।

तरह-तरह के आकार-प्रकार वाले ये रंग-बिरंगे बादल वर्षा के साथ-साथ क्षेत्रीय आधार पर मौसम का संकेत भी देते हैं। खुले आसमान में उमड़-घुमड़ कर आने वाले बादल भांति-भांति के आकार बना लेते हैं जिनका अवलोकन करने पर किस व्यक्ति का मन मयूर नहीं नाच उठेगा।

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