पुरी शंकराचार्य की प्रतिज्ञा पर जी डी ने छोड़ा अनशन

Submitted by admin on Mon, 10/14/2013 - 15:00

गंगा को विकृत करने में भाजपा-कांग्रेस दोनों का हाथ: पुरी शंकराचार्य



स्वामी ज्ञानस्वरूप ने 121 दिन बाद अपना अनशन तोड़ास्वामी ज्ञानस्वरूप ने 121 दिन बाद अपना अनशन तोड़ा “मुझे यह कहने में कोई संकोच नहीं है कि गंगा को विकृत करने में भाजपा और कांग्रेस..दोनों का हाथ है। दोनों ने राष्ट्र को धोखा दिया है। हमें पता है कि भाजपा शासन में भी गोवंश की हत्या होती रही है। कोई दल ऐसा नहीं, जिसने विकास के नाम पर प्रकृति को विकृत न किया हो। हम चुप हैं, तो इसका मतलब यह नहीं है कि हम मुर्दा हैं। हम मुर्दा नहीं है। शासन यदि हमारी बात नहीं मानता है, तो वह जान ले कि यह अभियान रुकेगा नहीं।.... हम राजनैतिक दलों को चुनौती देते हैं कि या तो वे अपना शोधन कर लें या फिर रसातल में जाएं। हम प्रतिज्ञा करते हैं कि विकास और राजस्व के नाम पर गौ-गंगा को विकृत नहीं होने देंगे।’’

पुरी शंकराचार्य जगद्गुरु स्वामी श्री निश्छलानंद की इस प्रतिज्ञा की बिना पर अपने अनशन के 121वें दिन स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद उर्फ प्रो जी डी अग्रवाल ने आश्विन मास की अष्टमी, दिन शनिवार तद्नुसार अंग्रेजी तिथि 11 अक्तूबर, 2013 को अपना गंगा अनशन छोड़ दिया। उ. प्र. के वृंदावन के हरिहर आश्रम में पुरी शंकराचार्य के हाथों जूस पीकर अनशन तोड़ते हुए स्वामी सानंद कृशकाय दिखे, मन से टूटे हुए और निराश भी, लेकिन उनकी वाणी का ओज उतना ही बलशाली था और विचार उतने ही स्पष्ट थे,जितना किसी ने कभी भी देखा होगा।

 

मैं अगली सरकार के निर्णयों की प्रतीक्षा करुंगा: जी डी


स्वामी सानंद ने कहा -उत्तराखंड त्रासदी के बाद मैं प्रतीक्षा कर रहा था कि शायद सरकार कुछ करेंगी। इस बीच सुप्रीम कोर्ट का आदेश आया, तो मैंने सोचा शायद सरकार उसका मान रखते हुए तत्काल कोई कमेटी गठित कर उत्तराखंड त्रासदी की ज़िम्मेदारी सुनिश्चित करेगी। दुख है कि सरकार ने आज की तारीख तक ऐसी कोई कमेटी की घोषणा नहीं की है। इस पूरे दौर में मैं किंकर्तव्यविमूढ़ हो गया था। मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करूं। अस्पताल में डॉक्टरों की देखभाल के बीच प्राणरक्षा मेरा लक्ष्य नहीं है। अतः गुरुदेव श्री शंकराचार्य के आदेश की पालना करते हुए मैं आज अपना अनशन छोड़ रहा हूं। पवित्र धारीदेवी शिला के साथ क्या हुआ है; सब जानते हैं। अब मेरी मांग सिर्फ इतनी रह गई है कि अलकनंदा और मंदाकिनी को भी भागीरथी के समान महत्वपूर्ण मानते हुए सरकार निर्बाध छोड़ दे। मैं अगली सरकार के निर्णयों की प्रतीक्षा करुंगा। तब तक क्या होगा; यह श्री गुरु चरणों के ऊपर छोड़ रहा हूं।’’

 

गंगा की आत्मा की मांग करना ही मेरी नियति: जी डी


स्वामी सानंद ने इस बात पर क्षोभ जताया कि उमा भारती के अनशन के बाद खुद किए वादे के बावजूद पूर्व मुख्यमंत्री श्री रमेश पोखरियाल निशंक ने कुछ नहीं किया। उन्होंने कहा - “मुझे किसी दल विशेष से कोई उम्मीद हो; ऐसा नहीं है। लेकिन मुझे श्रीगंगाजी की आत्मा चाहिए। श्रीगंगा जी के टनल में कैद रहते यह संभव नहीं है। मैं समझता हूं यदि श्रीगंगाजी को प्राणवान बनाकर रखना है, तो हमें श्रीगंगाजी का पंचमहाभूतों से संपर्क बने रहना जरूरी है। इसके लिए प्राण प्रण से लगे रहना ही अब मेरी नियति है। मैं यह करता रहूंगा।’’

इस मौके पर यमुना रक्षक दल प्रमुख श्री जयकृष्ण जी महाराज, एन्वायरोटेक-दिल्ली के निदेशक श्री एस के गुप्ता, लोक विज्ञान केन्द्र-देहरादून के वैज्ञानिक अनिल गौतम के अलावा स्वामी सानंद के साथ आए दून अस्पताल के डाक्टर, देहरादून के नायाब तहसीलदार व उत्तराखंड पुलिस के जवान व कई स्थानीय संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद थे।

 

मैने स्वयं किया अनुरोध - पुरी शंकराचार्य


उपस्थित जन और मीडिया प्रतिनिधियो के बीच अपनी बात रखते हुए पुरी शंकराचार्य ने स्वामी सानंद को आश्वस्त किया। उन्होंने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि और श्रीगंगाजी को लेकर मेरा भी अनुभव है कि अपने पक्षधर को विरोधी के रूप में प्रस्तुत करना और विरोधी को पक्ष में कर लेना शासन के लिए चुटकी का काम होता है। शासन किसी भी अभियान को दिशाहीन करने की शक्ति रखता है। यह हमने देखा ही है। ऐसे शासन से निपटने के लिए अग्नि पुराण ने साम, दाम, दण्ड, भेद.. समेत सात प्रकार की नीतियाँ सुझाई हैं। स्वयं करपात्री जी महाराज ने कहा था कि महापुरुष गौ, गंगा के नाम पर अनशन कर देहत्याग न करें; क्योंकि शासन तो चाहेगा ही कि ऐसे महापुरुष जाएं और वे निष्कंटक राज करें। इसलिए मैंने स्वयं स्वामी सानंद से फोन पर अनुरोध किया था कि वह अनशन छोड़ें। शंकराचार्य के रूप भी यह मेरा दायित्व है।

 

लक्ष्य की ओर और तेजी से बढ़ने के लिए है स्वामी सानंद का यह कदम


उन्होंने स्वामी सानंद को संबोधित करते हुए कहा - “हर जीव को प्राण प्रिय होता है। इसी प्राण के कारण हम प्राणी कहलाते हैं। किंतु आपने तो अपने प्राणों पर घात लगाकर बार-बार अनशन किया है। इस बार 121 दिन से कठिन व्रत पर हैं। आपने प्राणों के व्यामोह में अनशन तोड़ा हो; ऐसा संदेश तो जा ही नहीं सकता। यह कदम लक्ष्य प्राप्ति की ओर और अधिक ऊर्जा और तेजी के साथ बढ़ने के लिए याद किया जाएगा। अतः अब आप अपने तप और जप से हमें शक्ति दें.. ऊर्जा दें, ताकि हम आपके जीते जी श्रीगंगा जी को अविरल-निर्मल देख सकें।’’

पुरी शंकराचार्य का आशीष और आश्वासन पाने के बाद स्वामी सानंद दिल्ली के लिए रवाना हो गए। उल्लेखनीय है कि स्वामी सानंद एक नामचीन वैज्ञानिक व सन्यासी हैं। वह गत 13 जून से वह गंगा अनशन थे। हरिद्वार प्रशासन ने उनके अनशन को आत्महत्या का प्रयास बताकर मामला दर्ज कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर प्रशासन उन्हें बिना शर्त रिहा करने को मजबूर हुआ। अनशन के सौवें दिन जलत्याग की घोषणा के बाद हरिद्वार प्रशासन ने उन्हें देहरादून के दून अस्पताल में भर्ती करा दिया था।

 

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अरुण तिवारीअरुण तिवारी

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स्नातक, पत्रकारिता एवं जनसंपर्क में स्नातकोत्तर डिप्लोमा

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