शौचालय कम कर सकता है शिशु एवं बाल मृत्यु दर

Submitted by admin on Mon, 11/25/2013 - 08:32
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19 नवंबर 2013, भोपाल। शौचालय नहीं होने से महिलाओं को अक्सर असुरक्षा से गुजरना पड़ता है। आंकड़ों के अनुसार महिलाओं के खिलाफ गंभीर अपराध एवं बलात्कार की घटनाएं अक्सर शौच के लिए बाहर जाने के समय होती है। जिन राज्यों में खुलेमें शौच करने वालों की संख्या ज्यादा है, वहां कुपोषण एवं शिशु और बाल मृत्यु दर भी ज्यादा है, इसलिए कुपोषण एवं शिशु और बाल मृत्यु दर कम करने के लिए खुले में शौच की आदतों को छोड़ना पड़ेगा। घर में शौचालय होने से स्वास्थ्य समस्याओं को कम किया जा सकता है, इसलिए शौचालय हेल्थ इंश्योरेंस की तरह है।

. उक्त बातें आज गांधी भवन में विश्व शौचालय दिवस पर स्वच्छता के अधिकार को लेकर जलाधिकार अभियान, स्वच्छता का अधिकार अभियान, आरंभ एवं महात्मा गांधी सेवा आश्रम द्वारा वाटर एड एवं चैरिटी वाटर के सहयोग से आयोजित राज्यस्तरीय सम्मेलन में प्रतिभागियों ने कही।

उद्घाटन सत्र में वरिष्ठ पत्रकार राकेश दीवान ने कहा कि शहरी विकास में स्वच्छता एक गंभीर मुद्दा है। पानी की उपलब्धता, लोगों में जागरूकता एवं विकास के साथ इसे जोड़ना बहुत ही जरूरी है। वाटर एड के कार्यक्रम अधिकारी बिनु अरिकल ने कहा कि सामाजिक एवं आर्थिक विकास के लिए यह दिवस बहुत ही महत्पूर्ण है। स्वच्छता के मामले में मध्यप्रदेश बहुत ही पिछड़ा हुआ है।हमें शिक्षा एवं स्वास्थ्य के साथ-साथ पर्यावरण एवं आर्थिक विकास के साथइसे जोड़कर देखने की जरूरत है। इंडिया वाटर पोर्टल, दिल्ली के संपादक सिराज केसर ने कहा कि सरकारी योजनाओं में शौचालय का निर्माण किया गया, जबकि जमीन पर वे उपलब्ध नहीं है। हमें इस भ्रष्टाचार को भी उजागर करने कीजरूरत है।

द हंगर प्रोजेक्ट की कार्यक्रम अधिकारी सुश्री शिबानी शर्मा ने इसेमहिलाओं की गरिमा से जुड़ा मुद्दा बताया। एफ.पी.आई. के कार्यक्रम अधिकारी जॉनसन ने स्वास्थ्य के साथ जोड़ते हुए बताया कि घरेलू शौचालय बहुत ही जरूरी है। कार्यक्रम के समन्वयक अनिल गुप्ता ने कहा कि स्वच्छता अधिकार को लेकर पिछले सप्ताह प्रदेश के विभिन्न जिलों में अभियान चलाया गया था।आरंभ संस्था के अनूप सहाय ने शहरी क्षेत्र में स्वच्छता की परिस्थितियों से अवगत कराया। स्वाभिमान केंद्र के अब्दुल जब्बार, जनसाहस देवास के आसिफ, लोग बिरादरी इंदौर के तपन भट्टाचार्य, मध्यभारत के शफीक खान, ताल की सुश्री चित्रा खन्ना, धरती मुरैना के देवेंद्र भदौरिया, एकता परिषद के संतोष सिंह सहित कई लोगों ने विचार व्यक्त किए।
 

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