मेजा ऊर्जा निगम प्रा. लि. के खिलाफ किसानों का विरोध

Submitted by admin on Fri, 12/06/2013 - 09:44
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किसानों-मजदूरों ने बैठक कर बनाई रणनीति आज निकाली जाएगी विशाल रैली, डीएम को सौंपेंगे ज्ञापन


शासन-प्रशासन द्वारा मेजा ऊर्जा निगम प्रा. लि. कोहड़ार के लिए किसानों से ज़मीन अधिग्रहण करते समय उचित मुआवजा, सरकारी नौकरी, मज़दूरों को रोज़गार, गृहविस्थापितों को घर बनाकर देने का वायदा किया गया था, लेकिन आज तक कोई भी वायदा पूरा नहीं किया गया। किसानों का आरोप है कि भू-अधिग्रहण की पूरी प्रक्रिया गैरकानूनी है। इलाहाबाद। सरकारी नौकरी, मुआवजा राशि नये भूमि अधिग्रहण कानून के तहत देने, सभी गृह विस्थापितों को कालोनी बनाने व विस्थापित मजदूरों को रोज़गार देने की मांग को लेकर बुधवार को शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन कर रहे किसानों-मज़दूरों पर मेजा ऊर्जा निगम प्रा. लि. संयुक्त उपक्रम एनटीपीसी के अधिकारियों ने जेसीबी व डम्फर चलाकर जान लेवा हमले की कोशिश की। इस दौरान अपनी जान बचाने की कोशिश में कई महिलाओं को चोट आई। जेसीबी की टक्कर से दो महिलाएं चोटिल हो गई हैं। किसानों व मज़दूरों को एनटीपीसी प्रबंधन ने धमकी दी और कहा कि किसी का कोई मुआवजा बाकी नहीं और न तो कोई नौकरी दी जाएगी। जेसीबी व डम्फर से चुटहिल महिलाओं ने जानलेवा हमला कराने वाले एनटीपीसी के अधिकारियों एवं जेसीबी-डम्फर चालकों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए मेजा पुलिस को प्रार्थना पत्र दिया है।

शासन-प्रशासन द्वारा मेजा ऊर्जा निगम प्रा. लि. कोहड़ार के लिए किसानों से ज़मीन अधिग्रहण करते समय उचित मुआवजा, सरकारी नौकरी, मज़दूरों को रोज़गार, गृहविस्थापितों को घर बनाकर देने का वायदा किया गया था, लेकिन आज तक कोई भी वायदा पूरा नहीं किया गया। किसानों का आरोप है कि भू-अधिग्रहण की पूरी प्रक्रिया गैरकानूनी है।

तत्कालीन जिलाधिकारी ने किसानों, मज़दूरों को धोखे में रख भूमि अधिग्रहण कानून 1894 की धारा 17 लगाकर जमीनें मेजा ऊर्जा निगम प्रा. लि. के नाम पट्टा करवा दिया। अब जब किसान-मजदूर उचित मुआवजे, सरकारी नौकरी आदि की मांग कर रहे हैं तो उन्हें जेसीबी व डम्फर से धक्का मार कर भगाया जा रहा है।

शासन-प्रशासन तथा एनटीपीसी प्रबंधन द्वारा किए जा रहे जुल्म व अन्याय के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे विस्थापन विरोध मंच के संयोजक राजीव चन्देल ने कहा कि करीब एक माह पूर्व एनटीपीसी प्रबंधन को किसानों की समस्याओं के बारे में बता दिया गया था और मांग की गई थी कि जब तक इन समस्याओं का समाधान नहीं हो जाता तब तक कार्य प्रारंभ न कराया जाए बावजूद इसके एनटीपीसी के अधिकारी किसानों-मज़दूरों पर जुल्म कर रहे हैं और जबरन जेसीबी लाकर उनकी जमीन हड़प रहे हैं।

किसानों का कहना है कि जब मेजा ऊर्जा निगम प्रा. लि. के अधिकारियों ने स्वयं लिखित में यह कह दिया है कि अभी अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है तब वह रोज-रोज जेसीबी लाकर किसानों को धमकाने की बात क्यों कर रहे हैं।

एन.टी.पी.सी. के खिलाफ किसानों का विरोधबुधवार को भी एनटीपीसी के प्रबंधक ए.के. चौधरी, शिव प्रसाद ने बंदूकधारी गार्डों, माफिया ठेकेदारों व स्थानीय मेजा थाने की पुलिस बुलकार जेसीबी चलवाने का काम किया। इस बारे में पूछने पर भू-प्रभावित किसानों-मज़दूरों के घर की महिलाओं पर जेसीबी व डम्फर चलाकर जानलेवा हमला कराया गया। बाद में आक्रोशित विस्थापन विरोधी मंच के पदाधिकारियों ने पवांर के पूरा में बैठक की, जहां किसानों ने एनटीपीसी द्वारा किए जा रहे जुल्म के खिलाफ लड़ाई लड़ने का संकल्प लिया। मंच के अध्यक्ष राजकुमार यादव ने कहा कि एनटीपीसी चाहे जितनी पुलिस फोर्स बुला ले, लेकिन वह न्याय की लड़ाई के लिए एक कदम भी पीछे नहीं हटेंगे।

बैठक में किसानों ने तय किया कि वह गुरुवार को 500 किसानों-मज़दूरों के साथ एक विशाल रैली निकाली जाएगी और विभिन्न मांगों को लेकर शुक्रवार को जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा जाएगा। इस बीच यदि एनटीपीसी ने किसानों के साथ कोई जोर-ज़बरदस्ती की तो किसान-मजदूर आन्दोलन को बाध्य होंगे और रेल चक्काजाम कर अपनी मांग मनवायेंगे। अध्यक्ष राजकुमार यादव ने बताया कि मेजा ऊर्जा निगम प्रा. लि. से प्रभावित आठ गांवों के किसानों की विशाल रैली गुरुवार को पवांर का पूरा से शुरू होकर झड़ियाही, मई खुर्द, मई कला व इसौटा होते हुए कोहड़ार बाजार तक पहुंचेगी, उसके बाद कोहड़ार बाजार में ही बैठक कर आगे की रणनीति तय की जाएगी। बुधवार को हुई बैठक में मंच के अध्यक्ष राजकुमार यादव, बीके निषाद, दुर्गा निषाद, उमाशंकर यादव, रूद्रकांत यादव, जगजीवन लाल यादव, राम अनुग्रह यादव, उषा देवी, गुलाब कली, शिव देवी, कलुइया, गेंदाकली व श्याम कली आदि मौजूद थे।

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