उत्तर प्रदेश में 20-25 फरवरी 2014 तक ‘ग्रामीण पेयजल जागरूकता सप्ताह'

Submitted by pankajbagwan on Sat, 02/15/2014 - 10:31
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प्रदेश के सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में शुद्ध एवं सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने के लिये राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम के अन्तर्गत कई पेयजल योजनाओं का क्रियान्वयन किया जा रहा है। इन योजनाओं का लाभ जनसामान्य तक पहुंचाना, असुरक्षित पेयजल के दुष्प्रभाव, पेयजल योजनाओं के क्रियान्वयन में ग्राम पंचायतों की भागीदारी, पेयजल स्रोतों का रख-रखाव, पेयजल स्रोतों में जैविक एवं रासायनिक अशुद्धियों का परीक्षण, उनका उपचार तथा रोकथाम आदि चुनौतियों के प्रति जन-जागरुकता प्रदेश की प्राथमिकता है। प्रदेश स्तर पर इन चुनौतियों के प्रति जन- सामान्य को सतर्क करने हेतु राज्य सरकार द्वारा ‘ग्रामीण पेयजल जागरूकता सप्ताह‘ का आयोजन किया जा रहा है।

प्रदेश व्यापी एक सप्ताह के प्रस्तावित अभियान के संदर्भ में ‘जनसंचार माध्यम‘ (रेडियो, दूरदर्शन तथा समाचार पत्र), नव संचार माध्यम‘ (मोबाइल द्वारा श्रव्य संदेश), पुनर्स्मरण संचार माध्यम (बस पैनल, होर्डिग, वाल पेंटिग), कियास्क, पोस्टर आदि का उपयोग करते हुये सामान्य जन-जागरूकता अभियान के अतिरिक्त पंचायती राज संस्थानों, ग्राम स्तरीय कार्यकर्ताओं (आशा, आंगनबाड़ी कार्यकत्री, स्वच्छता दूत, स्वयंसहायता समूहों, ग्राम पेयजल एवं स्वच्छता समिति) के सदस्यों आदि की सेवाओं का उपयोग करते हुए जिले के प्रत्येक मजरे/टोले में अभियान चलाने तथा प्रत्येक परिवार को प्रेरित करने हेतु अधिकतम बल दिया जाए।

प्रत्येक जनपद, विकासखण्ड एवं ग्राम पंचायत स्तर पर जन- जागरूकता रैली एवं प्रभातफेरी का आयोजन किया जाये, जिसमें सभी शिक्षण संस्थानों, सरकारी, गैरसरकारी एवं पंचायती राज संस्थाओं की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाए।

इस दौरान सभी स्तरों पर प्रतिदिन वाद-विवाद, चित्रकला, नारालेखन आदि प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएं। संचार माध्यमों का भरपूर उपयोग करते हुए स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल का उपयोग का संदेश जन सामान्य तक पहुंचाया जाए। इस सप्ताह के दौरान प्रत्येक परिवार से निरन्तर सम्पर्क कर के उन्हें पेयजल से संबधित सुरक्षित व्यवहारों व संदेशों से अवगत कराने हेतु वार्ड सदस्यों, आशा, आंगनबाड़ी, स्वयंसहायता समूह सदस्यों, स्वच्छता दूत, नैसर्गिक मार्गदर्शकों, धर्म-गुरुवों, विद्यालय आदि को सम्मलित करते हुये प्रत्येक ग्राम में वार्ड वार दलों का गठन कर इन दलों द्वारा प्रत्येक वार्ड में समूह बैठकों का श्रृंखलाबद्ध आयोजन किया जा सकता है। अभियान के दौरान समस्त सामुदायिक जल स्रोतों का गुणवत्ता परीक्षण किया जाए तथा उसके परिणामों से समुदाय को अवगत कराया जाए।

पूर्व में जल निगम की प्रयोगशालाओं में किये गये रासायनिक परीक्षण में संदूषित पाये गये जल स्रोतों को लाल पेन्ट से, सुरक्षित जल स्रोतों को नीले पेंट से मार्क कर दिया जाए। रासायनिक रूप से प्रदूषित जल स्रोतों के निकट, पेयजल के रूप में उसके उपयोग को हतोत्साहित करने के लिए उपयुक्त संदेश का प्रदर्शन किया जाए।

उपर्युक्त प्रदेशव्यापी संगठित अभियान के आलोक में सभी जनपदों से अनुरोध है कि इस अवसर का भरपूर उपयोग करते हुए पेयजल एवं स्वच्छता के मुद्दों पर कार्य कर रही अन्तर्राष्टीय संस्थाओं जैसे यूनीसेफ, वाटर एड, वाटर एण्ड सैनिटेशन प्रोग्राम (विश्वबैंक) तथा स्थानीय गैरसरकारी संगठनों व समुदाय आधारित संगठनों के साथ समन्वय स्थापित कर जिले के सभी मजरों/टोलों में सशक्त अभियान चलाया जाए।

ग्राम स्तरीय कार्यकर्ताओं द्वारा घर-घर में अन्तर-व्यैक्तिक संवाद स्थापित करने तथा सामुदायिक गतिशीलता लाने के लिए गतिविधि आधारित प्रोत्साहन सहित अभियान की इन गतिविधियों हेतु राज्य पेयजल एवं स्वच्छता मिशन द्वारा उपलब्ध कराई जाने वाली धनराशि का समुचित उपयोग किया जाए।

ग्रामीण पेयजल जागरूकता सप्ताह के दौरान आयोजित की जा रही गतिविधियों के कार्य बिन्दु इस आशय से संलग्न हैं कि इन्हें प्रत्येक जनपद की आवश्यकता के अनुरूप लागू किया जाए। कृपया उपरोक्त के संबध में अपने प्रशासनिक नियंत्रणाधीन अर्द्ध-सरकारी संस्थाओं / निगमों तथा अधीनस्थ अधिकारियों को भी अपने स्तर से निर्देशित करते हुए उपरोक्तानुसार दिनांक 20 से 25 फरवरी 2014 के मध्य सम्पूर्ण प्रदेश में ग्रामीण पेयजल जागरूकता सप्ताह का प्रभावी ढंग से आयोजन सुनिश्चित कराएं।

भवदीय
आलोक रंजन, (कृषि उत्पादन आयुक्त, उत्तर प्रदेश)

कृपया पूरे कार्यक्रम को देखने के लिए अटैचमेंट देखें।

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