यमुना में फिर प्रदूषण का उफान

Submitted by admin on Thu, 02/20/2014 - 13:27
Source
दैनिक जागरण, 18 फरवरी 2014
अचानक बढ़ा एक हजार क्यूसेक पानी, सूखे जलकल अधिकारियों के हलक

हिंडन कट से प्रदूषित पानी आने की आशंका, मांट ब्रांच से गंगाजल की आपूर्ति भी घटी

भले ही यमुना नदी में सीवेज के गिरने को लेकर सरकारी विभाग अपने-अपने तर्क दे रहे हों। लेकिन स्थिति इसके विपरीत है। दिल्ली, हरियाणा, मथुरा व आगरा सहित अन्य शहरों में नदी दूषित हो रही है। पिछले दिनों आगरा में जबरदस्त प्रदूषण के चलते यमुना की स्थिति बदतर हो गई थी। इसके चलते नदी के जल में ऑक्सीजन की मात्रा महज 2 पीपीएम रह गई। इन हालातों में नदी के पानी के शोधन में भी दिक्कत होने लगी और ताजनगरी में पेयजल संकट खड़ा हो गया। आगरा: जल स्रोतों पर मंडरा संकट बढ़ता जा रहा है। भीषण प्रदूषण से यमुना को कुछ राहत मिली ही थी कि करबन और खारी नदी का पानी खतरनाक हो गया। उ.प्र. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड इनके पानी की जांच करा रहे थे कि सोमवार को अचानक फिर से यमुना में प्रदूषण का उफान शुरू हो गया।

लगभग एक पखवाड़े से आगरा में पेयजल पर संकट गहराया हुआ है। ओखला बैराज से आ रहा यमुना का पानी दिल्ली के सीवर और जगह-जगह स्थित औद्योगिक इकाइयों के कचरे से प्रदूषित होकर आ रहा था। पानी शोधित करने में भी जब मुश्किल हुई, तो जलकल और प्रशासन के अधिकारियों ने केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को पत्र लिखे। तब पता चला कि हिंडन कट से भी प्रदूषित पानी का डिस्चार्ज एकदम से बढ़ा है। इस पर सिंचाई एवं लोक निर्माण मंत्री शिवपाल यादव ने दिल्ली सरकार को नोटिस देकर चेतावनी दी कि दिल्ली के नाले बंद नहीं हुए तो यूपी से गंगाजल की आपूर्ति रोक दी जाएगी। उसके बाद सिंचाई विभाग ने भी आश्वासन दिया था कि हिंडन कट से आ रहा गंदा पानी पंद्रह या सोलह फरवरी तक पूरी तरह से बंद कर दिया जाएगा।वहीं मांट ब्रांच से गंगाजल की आपूर्ति बढ़ने से यमुना के जल में कुछ सुधार हुआ था। यमुना में पानी का बहाव लगभग 2335 क्यूसेक हो गया। इसी बीच सोमवार को अचानक से यमुना में पानी की मात्रा बढ़ गई।

जल संस्थान के चीफ केमिस्ट डॉ. दीपक सिंह ने बताया कि यमुना में करीब एक हजार क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज बढ़ गया है। यह पानी कहां से आया है? फिलहाल इसकी सही जानकारी नहीं है। वहीं, विभागीय जानकारों का तर्क है कि ओखला बैराज से तो सौ क्यूसेक से ज्यादा डिस्चार्ज होता ही नहीं है। आशंका है कि यह प्रदूषित पानी गाज़ियाबाद स्थित हिंडन नदी के कट से ही यमुना में छोड़ा गया है। इसके अलावा मांट ब्रांच से भी गंगाजल की आपूर्ति कम हुई है। इससे यमुना का पानी दोबारा से प्रदूषित हो गया है।

खारी नदी में रहस्य का रसायन


जांच में जुटे प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी

किरावली: करबन नदी में पशुओं का काल बने केमिकल के बाद अब खारी नदी में भी झाग उठना शुरू हो गए हैं। किरावली की खारी नदी में एक नीलगाय की मौत ने अधिकारियों के होश उड़ा दिए हैं। वह अब तक समझ नहीं पाए हैं कि इस नदी में केमिकल कहां से आए।

एत्मादपुर क्षेत्र की करबन नदी में केमिकल युक्त पानी से हुई पशुओं की मौत हो गई और फसल को नुकसान हो गया। उसके बाद रविवार को किरावली की खारी नदी के किनारे भी एक नीलगाय मरी पड़ी मिली। नदी में झाग भी उठ रहे हैं। एत्मादपुर में हुए नुकसान के बाद से किसान सहमे हुए हैं। अब वह उस पानी के इस्तेमाल और पशुओं को पानी पिलाने से भी डर रहे हैं। वहीं, उ.प्र. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी खारी नदी में झाग उठने से परेशान हैं। बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी डॉ. बीबी अवस्थी का कहना है कि खारी नदी के किनारे कोई भी औद्योगिक इकाई नहीं है। इस नदी में प्रदूषण का कोई स्रोत समझ में नहीं आ रहा है। उन्होंने बताया कि फिर भी कारण जानने के लिए टीम को लगाया गया है। पूरी नदी का सर्वे करने के बाद पता चलेगा कि मुख्य वजह क्या है।

सरकार तक जाएगा करबन का मामला


करबन नदी में नीलगाय की मौत और फसल चौपट होने के बाद उ.प्र. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने पानी के सेंपल लिए। वहां जांच में माना गया कि यह प्रदूषण अलीगढ़ और बुलंदशहर की औद्योगिक इकाइयों से आया है। इसे लेकर पहले नोटिस भेजे जा चुके हैं। डॉ. अवस्थी ने बताया कि करबन नदी में प्रदूषण के मामले में मुख्यालय को भी लिखित शिकायत भेज दी गई है। इस संबंध में शासन को भी अवगत कराया जा रहा है। प्रयास यही है कि नदियों में किसी तरह का औद्योगिक कचरा न आए। इससे पानी प्रदूषित हो रहा है। वैसे मृत जानवरों का बिसरा जांच के लिए पशु चिकित्सा अधिकारी ने भेजा है, उसकी रिपोर्ट आने के बाद काफी हद तक स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।

यमुना में सीवेज पर सख्त हुआ सीपीसीबी


पीने के पानी किल्लत पर दिल्ल जल बोर्ड सहित अन्य विभागों से मांगी रिपोर्ट
यमुना नदी में दिल्ली से आ रहे प्रदूषण से हलचल मची है। मामले में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) सख्त हो गया है। बोर्ड ने दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति व जल बोर्ड सहित अन्य कई विभागों से रिपोर्ट मांगी है। इससे इस समस्या का निस्तारण हो सके।

भले ही यमुना नदी में सीवेज के गिरने को लेकर सरकारी विभाग अपने-अपने तर्क दे रहे हों। लेकिन स्थिति इसके विपरीत है। दिल्ली, हरियाणा, मथुरा व आगरा (यूपी) सहित अन्य शहरों में नदी दूषित हो रही है। पिछले दिनों आगरा में जबरदस्त प्रदूषण के चलते यमुना की स्थिति बदतर हो गई थी। इसके चलते नदी के जल में ऑक्सीजन की मात्रा महज 2 पीपीएम रह गई। इन हालातों में नदी के पानी के शोधन में भी दिक्कत होने लगी और ताजनगरी में पेयजल संकट खड़ा हो गया। 29 जनवरी को तत्कालीन डीएम जुहेर बिन सगीर ने पानी को लेकर हो रही मुश्किल के बारे में सीपीसीबी से शिकायत करते हुए इसकी जानकारी शासन को दे दी थी। अफसरों के प्रयास के बाद नदी में अतिरिक्त जल छोड़ा गया, तब जाकर शहर को पीने के लिए पानी मयस्सर हुआ। अब सीपीसीबी के वैज्ञानिक आरएम भारद्वाज ने दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति, यूपी और हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, मुख्य कार्यकारी अधिकारी दिल्ली जल बोर्ड से रिपोर्ट तलब की है। उन्होंन कहा है कि नदी में सीवेज की स्थिति क्या है, इसकी जांच कर रिपोर्ट भेजी जाए। वहीं डीएम से भी पूरी जानकारी मांगी है।

जांच में हो चुका खुलासा


यमुना नदी में सीवेज का गंदा पानी मिल रहा है, इस बात का खुलासा अपर जिलाधिकारी नगर बीपी खरे की जांच में हो चुका है। जिसकी रिपोर्ट डीएम को भेज दी गई है।

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