जल ही जीवन है

Submitted by admin on Tue, 02/25/2014 - 15:11
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Source
राष्ट्रीय जल विज्ञान संस्थान की पत्रिका 'जल चेतना', जुलाई 2013

जल ही जीवन है।
जल ही सावन है।
जल ही पावन है।
जल ही उपवन है।

जल के बिना जीवन असंभव है।
जल के बिना विकास असंभव है।
जल के बिना विकास प्रकृति अधूरी है।
जल के बिना दुनिया दुखियारी है।

जल है तो हम सब हैं
जल है तो जीव-जंतु हैं।
जल है तो सृष्टि है।
जल है तो जीवन है।

जल की बचत करें।
जल का सदुपयोग करें।
जल को संचित करें।
जल को संरक्षित करें।

जल को प्रदूषित होने से बचाएं।
जल को बर्बाद होने से बचाएं।
जल को गंदा होने से बचाएं।
जल को खतरनाक होने से
बचाएं।

जल में कूड़ा-कचरा न डालें।
जल में खतरनाक द्रव न डालें।
जल में हानिकारक रसायन न डालें।
जल में शहर की गंदगी न डालें।

जल के बिना हम नहीं होंगे।
जल के बिना परिवार नहीं होगा।
जल के बिना देश नहीं होगा।
जल के बिना दुनिया नहीं होगी।

प्यासे को जल चाहिए।
प्रकृति को जल चाहिए।
पेड़-पौधों को जल चाहिए।
हम सबसो जल चाहिए।
कृपया जल को बचाइए
और सदैव मुस्कुराइए।

जल बनाम सच्चा मित्र


दोनों का रंग नहीं होता,
दोनों का आकार नहीं होता,
दोनों का स्थान नहीं होता,
दोनों का स्वाद नहीं होता,

लेकिन.........................
दोनों का जीवन ही बहुत ही महत्व है।
और दोनों ही जीवन के लिए
अत्यंत आवश्यक हैं।