कैसे बनती हैं झीलें

Submitted by admin on Mon, 04/28/2014 - 11:22
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जनसत्ता (रविवारी), 27 अप्रैल 2014
झीलदेश में तमाम झीले हैं। हरियाणा में भी कई झीलें हैं जहां लोग पिकनिक मनाने और नौका विहार के लिए जाते हैं। इनमें से डबचिक, बारखेट, तिल्यार, सूलतानपुर और चक्रवर्ती झील वगैरह मशहूर हैं। देश में कई मशहूर झीले हैं जैसे कश्मीर की डल झील, ओडिशा की चिल्का झील, हिमाचल प्रदेश की रेणुका झील, राजस्थान की पुष्कर झील, उत्तराखंड में नैनीताल की पहाड़ियों के पास स्थित सात ताल, भीम, ताल, नौकुचिया ताल, नैनी झील वगैरह।

आखिर झील होती क्या है? दरअसल, चारों ओर जमीन से घिरे हुए किसी जल क्षेत्र को ही झील कहते हैं। कई झीलें काफी बड़ी होती हैं जबकि कुछ छोटी। कुछ गहरी होती हैं तो कुछ उथली। कुछ मीठे पानी की झीलें होती हैं तो कुछ खारें पानी की। राजस्थान में खारे पानी की कुछ झीलें हैं जिनमें से सांभर झील बहुत मशहूर है।

जानते हैं कि दुनिया की सबसे बड़ी झील कौन सी है? यह है कैस्पियन झील, जिसे कैस्पियन सागर भी कहते हैं। इस झील का निर्माण धरती की हलचल के कारण ही हुआ। दरअसल, धरती की हलचल भूमि की एक परत के उठाव का कारण बनी। इस उठाव के चलते कालासागर (ब्लैक सी) का पानी फिर से उसमें में नहीं जा सका और इस तरह निर्माण हुआ कैस्पियन झील का जो दुनिया की सबसे बड़ी (खारे पानी की) झील हैं। मीठे पानी के झीलों में अमेरिका की सुपीरियर झील संसार की सबसे बड़ी झील है।

दुनिया की सबसे गहरी झील बेकाल झील है जो पूर्वी साइबेरिया में है। आखिर ये झीलें बनती कैसे हैं? धरती की हलचल के कारण बनने वाले कैस्पियन झील की बात हमने की ज्वालामुखीय कारकों से भी कुछ झीलें बनती हैं। पुराने मृत ज्वालामुखियों के मुंह में लंबे समय तक वर्षा का जल भरते चले जाने से कालांतर में वे झील के रूप में परिवर्तित होती हैं। इस तरह से बनने वाली झीलों को ज्वालामुखी झीलें कहते हैं। ऐसी झीलें देखने में बड़ी सुंदर और आकर्षक होती हैं। इनका पानी बिल्कुल नीला और साफ होता है। संयुक्त राज्य अमेरिका के ओरेगान राज्य में क्रेटर झील इसी तरह की ही झील है।

अपरदन यानी कटाव से भी झीलों का निर्माण होता है। जब नदियां अपने रास्ते की घुलनशील चट्टानों को काट देती हैं तो बड़े-बड़े गड्ढें बन जाते हैं। इन गड्ढों में पानी भर जाने पर ये झीलों में बदल जाती है। आयरलैंड की शेनन नदी से इसी प्रक्रिया के जरिए ही लीन और डर्ग झीलें बनीं।

भूस्खलन यानी चट्टानों के खिसकने से भी झीलें बन सकती हैं। असल में चट्टानों की उलट-पुलट से कभी नदी का पानी रुक जाता है तो झीलें बनती हैं।

गढ़वाल की मोहना झील भी गंगा के प्रवाह से हुए विशाल भूस्खलन से बनी है और स्फीति घाटी की चंद्रताल झील भी भूस्खलन से बनी है। स्फीति घाटी की चंद्रताल झील भी भूस्खलन का ही परिणाम है। मोंटाना की भूकंप झील भी इसी तरह की झील का उदाहरण है।

डेल्टा प्रदेश में नदियों का रास्ता बड़ा टेढ़ा-मेढ़ा होता है। मिट्टी के खिसकने से कभी-कभी धारा रुक जाती है। ऐसे में नदी को नया रास्ता ढूंढना पड़ता है और जहां नदी की धारा रुक गई थी वहां झील बन जाती है मिसीसिपी की पांचस्ट्रियन झील इसी का उदाहरण है।

हिम नदों में कटाव और जमाव से भी अनगिनत झीलें अस्तित्व में आती है। बर्फ की चट्टानों द्वारा जमा किया गया कचरा ही इस कटाव और जमाव के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार होता है। घुमावदार पहाड़ियों से ऐसी रुकावटों से छोटी पहाड़ी झीलें बनती हैं।

हिमघाटियों के मुंह पर जब कचरा रुकावट पैदा करता है तो भी झीलें बनती हैं। लेकिन इस तरह बनने वाली झीलें लंबी और संकरी होती हैं। न्यूयार्क की फिंगर झील, इंग्लैंड की डिस्ट्रिक झील, स्वीडन की ग्लिंट लाइन झील और इटली की कोमी, गार्दा और मेगोइर इसी तरह की झीलों के उदाहरण हैं।

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