तभी से बादल बरसता है

Submitted by admin on Fri, 07/25/2014 - 09:59
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जनसत्ता (रविवारी) 23 जुलाई 2014
बहुत पुरानी बात है। तब धरती और बादल पास-पास रहते थे। इतने पास कि एक-दूसरे को छू लेते। उस समय धरती बहुत हल्की थी। इतनी हल्की कि हवा में उड़ जाती। कभी-कभी तो बादल धरती की पीठ पर सवार होकर पूरे अंतरिक्ष का चक्कर लगा आता।

एक दिन की बात है। धरती ने बादल से कहा- ‘तुम्हें पीठ पर बिठाते-बिठाते मैं थक गई हूं। मैं अकेले कहीं दूर घूमने जाना चाहती हूं।’

बादल ने कहा- ‘तो जा न, किसने रोका है। मगर याद रखना, जल्दी लौट आना। मैं तुझे याद करूंगा।’

बादल हंसते हुए कहने लगी- ‘तुम मुझे याद करोगे? लेकिन मुझे कैसे पता चलेगा?’

बादल सोचने लगा। फिर बोला - ‘तेरी याद आने पर मैं बरसने लगूंगा। खूब बारिश करूंगा। जब बारिश हो तो समझ लेना कि मैं याद कर रहा हूं। लेकिन याद रखना। बस लौट आना। नहीं तो मैं नाराज हो जाऊंगा।’

धरती शरमा गई। सकुचाते हुए उसने नजरें झुका लीं। फिर पूछने लगी, ‘तुम नाराज हो जाओगे? लेकिन मुझे कैसे पता चलेगा?’

बादल फिर सोचने लगा। कहने लगा- ‘नाराज होने पर मैं ओले गिराऊंगा। तूझे ओलों से ढक दूंगा। समझ लेना कि मैं नाराज हूं।’ धरती घूमने चली गई। धरती नीचे और नीचे की ओर टपक पड़ी।

कई दिन बीत गए। बादल धरती को याद करने लगा। याद में बरसने लगा। इतना बरसा कि बस बरसता रहा।

धरती हरी-भरी हो गई। धरती पर पेड़ उग आए। पहाड़ बन गए। नदियां बन गईं। समुद्र बन गया। खेत लहलहाने लगे। पशु-पक्षियों ने धरती को बसेरा बना लिया। धरती भारी हो गई। अब अपनी धुरी पर घूमने लगी। तभी से धरती घूम रही है। आज भी बादल धरती को याद करता है। खूब बरसता है। और हां, जब नाराज होता है तो ओले बरसाता है।

ईमेल : chamoli123456789@gmail.com

Comments

Submitted by ved vikash (not verified) on Tue, 05/03/2016 - 15:23

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<p>Gyan Ki Sagar me ek sacha Prem des bhagti hota hai. Jise ham gayan Ki Sagar kahte hai. Jaise-badal ka barsna... Sach maniye toh barsna badal ka hota hai...ur Si sari batey hai jise ham bayan nhi kar patey.....</p>

Submitted by shivam patel (not verified) on Thu, 03/23/2017 - 15:56

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मेरी यही राय हैं आप लोगों से कि सब लोग अपने जन्म दिन पर केक काटने वजाये पौधे लगाकर अपने और अपने आने वाले पीढ़ियों को बीमारियों से बचाये और उनका जीवन उजजवल सूखमय बनाये।। और मानव होने का धम्र निभाओ।।।। वृक्ष लगाओ

Submitted by Ghanshyam sharam (not verified) on Wed, 01/17/2018 - 12:39

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Ghanshyam swhhog

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