गांव की संसद में आपकी भी हिस्सेदारी है जरूरी

Submitted by birendrakrgupta on Sun, 08/10/2014 - 23:48
Source
पंचायतनामा, 20-26 जनवरी 2014
ग्रामसभा पंचायती राज की मूल संवैधानिक संस्था है। ग्रामसभा में स्वयं जनता उपस्थित होकर अपनी समस्याओं और विकास संबंधी योजनाओं के क्रियान्वयन का मूल्यांकन कर सकती है। ग्रामसभा ग्रामीणों का अधिकार है। इसका मतलब यह हुआ कि एक ग्रामीण को ग्रामसभा में यह अधिकार है कि वह पूछ सके कि पंचायत प्रतिनिधियों ने गांव के विकास में क्या भूमिका निभाई है। ग्रामसभा की बैठक 26 जनवरी, 15 अगस्त, 1 मई तथा 2 अक्टूबर को जरूर किया जाता है। लेकिन ग्रामीणों को इसकी जानकारी नहीं होने के कारण वे इस अवसर से वंचित रह जाते हैं। ग्रामीणों को यह जानना चाहिए कि मुखिया या अधिकारी बिना ग्रामसभा की अनुमति के कोई बड़ा निर्णय नहीं ले सकते हैं, खासकर उन मुद्दों पर जिससे एक बड़ी आबादी का हित जुड़ा है। मुखिया को लोगों के सवालों के जवाब देने होते हैं। साथ ही मुखिया अपनी विकास की योजनाओं को ग्रामसभा की बैठक में रखेगा ताकि इस पर ग्रामीण भी अपने विचार रख सकें और गांव के विकास में भागीदारी का एहसास ग्रामीणों में हो सके। पंचायतनामा के इस अंक में गणतंत्र दिवस के मौके पर ग्रामसभा बैठक के नियम और इसकी जरूरतों पर विस्तृत रूप से चर्चा की जा रही है। हम आप मिलकर ग्राम स्वराज्य के सपने को साकार करने में अपना अहम योगदान दे सकते हैं।

ग्रामसभा पंचायती राज की मूल संवैधानिक संस्था है। राज्य में पंचायती राज व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से ग्रामसभा का गठन तथा नियमित बैठक करने पर बल दिया गया है। पंचायती राज की अन्य संस्थाएं ग्राम पंचायत, पंचायत समिति एवं जिला परिषद् जनता के प्रतिनिधियों वाली संस्थाएं हैं, लेकिन ग्रामसभा जनता की सभा है। ग्रामसभा में स्वयं जनता उपस्थित होकर अपनी समस्याओं और विकास संबंधी योजनाओं के क्रियान्वयन का मूल्यांकन कर सकती है।

स्थाई समितियां बनाकर करें जिम्मेदारियों का निर्वाह
ग्रामसभा अपने कार्यों एवं जिम्मेदारियों को बेहतर तरीके से निर्वाह करने के लिए स्थाई समितियों का गठन कर सकती है। इनमें ग्राम विकास समिति, कृषि समिति, ग्राम रक्षा समिति, शिक्षा समिति एवं सामाजिक न्याय समिति, सार्वजनिक संपदा समिति, स्वास्थ्य समिति, आधारभूत संरचना समिति तथा निगरानी समिति शामिल हैं।

तारीख, समय तथा स्थान की जानकारी करें सार्वजनिक
प्रत्येक स्थाई समिति की बैठक ग्रामसभा क्षेत्र के अंदर माह में एक बार अवश्य की जानी है। तारीख व समय का निर्धारण ग्रामसभा की अध्यक्षता करने वाले व्यक्ति के द्वारा होगा। बैठक की सूचना अर्थात उसकी तारीख, समय तथा स्थान और किए जाने वाले कामकाज के बारे में जानकारी, बैठक की तारीख से ठीक तीन दिन पहले समिति के प्रत्येक सदस्य को दी जानी है। इस विषय की जानकारी को सार्वजनिक किया जाना है।

एक तिहाई सदस्यों की उपस्थिति है जरूरी
ग्रामसभा की बैठक के लिए ग्रामसभा के कुल सदस्यों के एक तिहाई सदस्यों का उपस्थित होना आवश्यक है और इस कुल भाग का एक तिहाई हिस्सा महिलाओं का होना भी जरूरी है। यदि सदस्यों की उपस्थिति बैठक के लिए निर्धारित कोरम के अनुसार नहीं है तो अध्यक्षता करने वाला व्यक्ति इस बैठक को स्थगित कर अगले बैठक के लिए नई तिथि और समय निर्धारित करेगा।

बैठक न कराने पर मुखिया हो सकते हैं अयोग्य
प्रत्येक पंचायत के मुखिया का यह उत्तरदायित्व है कि वह ग्रामसभा के बैठक की तारीख, समय तथा स्थान तय करे। मुखिया यदि अनुपस्थित हो तो उप-मुखिया इस बैठक की अध्यक्षता करेगा। यदि मुखिया और उप-मुखिया दोनों अनुपस्थित होते हैं तो पंचायत समिति के कार्यपालक पदाधिकारी (बीडीओ) या उनके द्वारा अधिकृत पंचायत समिति के सहायक सचिव बैठक की तारीख, समय तथा स्थान तय करेंगे। यदि पंचायत का मुखिया निश्चित समय अंतराल पर बैठक बुलाने में असफल रहता है तो संबंधित पंचायत समिति के कार्यपालक पदाधिकारी के निर्देश व अनुशंसा पर अनुमंडल पदाधिकारी द्वारा मुखिया को अयोग्य करार करते हुए पद से हटा दिया जाएगा। मुखिया को अयोग्य करार करने के पूर्व संबंधित अनुमंडल पदाधिकारी मुखिया को सबूतों के आधार पर अपनी बात रखने का अवसर देंगे।

ग्रामसभा की बैठक में प्रतिनिधित्व करें समिति के अध्यक्ष

ग्रामसभा की प्रत्येक स्थाई समिति में चार सदस्य होंगे। समिति के सदस्य, किसी एक सदस्य को  ग्रामसभा के बैठक में प्रतिनिधित्व के लिए अध्यक्ष के पद के रूप में मनोनीत करेंगे। ग्राम सभा की प्रत्येक स्थाई समिति के सदस्यों का कार्यकाल बैठक में मनोनीत होने की तिथि से एक वर्ष के लिए होगी। सदस्य को फिर से निर्वाचित किया जा सकता है। ग्रामसभा की स्थाई समितियों की सदस्यता के लिए कोई आरक्षण नहीं होगा। ग्राम सभा की स्थाई समिति में सदस्य के आपात स्थिति में पद छोड़ने की स्थिति में यह समझा जाएगा कि पद खाली रिक्त हो गया है तथा इस स्थान को शीघ्र ही भरा जाएगा। ग्रामसभा के प्रत्यके स्थाई समिति का एक सचिव होगा। सचिव का चुनाव ग्रामसभा की अध्यक्षता करने वाले व्यक्ति द्वारा मनोनीत किया जाएगा। मनोनीत सदस्य ग्रामसभा के सदस्यों के बीच का ही होना चाहिए। सदस्य का कार्यकाल उसकी सदस्यता की अवधि तक रहता है।


बैठक की कार्यवाही को लिखा जाना जरूरी
ग्रामसभा की बैठक का संचालन बैठक की अध्यक्षता करने वाले व्यक्ति द्वारा किया जाएगा। अध्यक्ष ग्रामसभा की राय लेकर बैठक में जिन विषयों पर चर्चा करनी है उसकी प्रक्रिया की शुरुआत करेगा। बैठक में जिन विषयों पर निर्णय लिए गए हैं उसकी जानकारी उपस्थित आम जनों को दी जाएगी और संबंधित ग्राम पंचायत के सचिव को बैठक में लिए गए सभी निर्णयों को कार्यवाही पंजी में लिखना है। स्थाई समिति को यह अधिकार है कि उन बिंदुओं पर निर्णय लें जो उनके अधिकार क्षेत्र में आता है। उदाहरणस्वरूप यदि मामला वित्तीय पहलू से संबंधित है या अन्य किसी मामले से तो उस मामले को ग्रामसभा में विचार करने के लिए भेज देगा। स्थाई समितियों में से प्रत्येक स्थाई समिति की बैठक की कार्यवाही को कार्यवृत पुस्तक में लिखा जाना है।

बैठक बुलना मुखिया की जिम्मेवारी

ग्रामसभा बैठक के आयोजन की जिम्मेवारी मुखिया की है। मुखिया द्वारा बैठक आयोजित न करा पाने की स्थिति में बैठक का आयोजन पंचायत समिति के कार्यपालक पदाधिकारी यानी प्रखंड विकास पदाधिकारी बैठक का आयोजन करेंगे। यदि मुखिया बैठक बुलाने में असफल होता है तो ग्रामसभा के सदस्य को बैठक करने का अधिकार प्राप्त है। इसके लिए बीडीओ को सूचित करना होता है।


ग्रामसभा बैठक में मांग सकते हैं मुखिया के क्रियाकलापों पर विवरणी
ग्रामसभा की वार्षिक बैठक अगले वित्तीय वर्ष के प्रारंभ होने से कम से कम तीन माह पहले ही कर लेना है। सालाना बैठक में ग्राम पंचायत के सालाना लेखा-जोखा विवरणी, बीते वर्ष की प्रशासन रिपोर्ट, ऑडिट रिपोर्ट, आगामी वित्तीय वर्ष के लिए प्रस्तावित विकास योजनाओं से संबंधित कार्यक्रम, ग्राम पंचायत की वार्षिक बजट व अगले वित्तीय वर्ष की वार्षिक बजट योजना, ग्राम पंचायत के मुखिया व सदस्यों की विशेष क्रियाकलाप योजना, आय एवं व्यय के संबंध में मांगा गया किसी प्रकार का स्पष्टीकरण आदि से संबंधित बातें रखी जानी है। ग्राम पंचायत उन सभी मामलों को ग्रामसभा की बैठक में रखेगी जिन्हें पंचायत समिति, जिला परिषद, उपायुक्त या जिलाधिकारी या कोई प्राधिकृत अधिकारी ऐसी बैठकों में रखे जाने की अपेक्षा रखते हों। सभी व्यस्क व्यक्तियों को ग्रामसभा की बैठक में अपनी भागीदारी देनी चाहिए ताकि सार्वजनिक मुद्दों पर बिना किसी भेदभाव से सही निर्णय लिया जाए और योजनाओं के क्रियान्वयन में पूरी पारदर्शिता बरती जाए।

गांव की संसद में रखें इन बातों का ध्यान


1. ग्रामसभा गांव की संसद है और इसकी गरिमा को उसी प्रकार बनाए रखना जिस प्रकार देश की संसद की गरिमा है। ग्राम सभा की बैठक में अभद्र व्यवहार करने वाले व्यक्ति को अध्यक्ष बाहर निकाल सकता है। साथ ही यदि कोई आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल करता है और माफी नहीं मांगता है अथवा ऐसा करने के लिए कहने पर भी नकार देता है तो उसे सभा से बाहर अध्यक्ष निकाल सकता है।
2. अध्यक्ष द्वारा अपने-अपने स्थान ग्रहण करने के आदेश की यदि कोई भी सदस्य अवहेलना करता है तो वह सदस्य व्यवस्था भंग करने का दोषी माना जाता है। अध्यक्ष तत्काल उसे बैठक से बाहर निकाले जाने का निर्देश देगा और पूरे बैठक की अवधि में शामिल नहीं किया जाएगा। गंभीर अव्यवस्था होने की आशंका को देखते हुए अध्यक्ष बैठक स्थगित कर सकता है।
3. ग्रामसभा की बैठक में निर्णय तभी लिया जा सकेगा जब निर्णय के पक्ष में बहुमत प्राप्त हुआ हो। यदि दोनों पक्ष में बराबर का वोट हुआ है तो निर्णायक वोट करने का अधिकार अध्यक्ष को है।
4. यदि किसी व्यक्ति को ग्रामसभा की बैठक में उपस्थित होने के अधिकार के संबंध में यदि कोई विवाद हुआ है तो बैठक की अध्यक्षता करने वाला व्यक्ति इस विवाद का निराकरण कर सकेगा। अध्यक्षता करने वाला व्यक्ति ग्रामसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में उस व्यक्ति के नाम होने अथवा न होने को देखते हुए विवाद के संबंध में अपना फैसला देगा।
5. ग्रामसभा की बैठक में उपस्थित होने वाले सभी सदस्यों के नाम उपस्थिति पंजी में दर्ज किए जाएंगे।

योजनाओं पर ही नहीं मुद्दों पर भी करें ग्रामसभा


ग्रामसभा की बैठक में इस बात का ध्यान रखें कि यह बैठक सिर्फ योजनाओं का ब्योरा जानने के लिए ही नहीं है, बल्कि इस बैठक में गांव की सामाजिक समस्याओं पर भी विचार करना जरूरी है। सामाजिक समस्याओं का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष प्रभाव हमारे जीवन पर पड़ता है। गांव-घर की समस्याओं के निपटारा के लिए ग्रामसभा की बैठक एक महत्वपूर्ण अवसर है जहां प्रत्येक ग्रामीण विभिन्न विषयों पर खुलकर चर्चा कर सकते हैं। लोगों को जागरूक किया जा सकता है और जीवन में बदलाव लाया जा सकता है।

शिक्षा
गांव में बच्चों की अच्छी शिक्षा के लिए ग्रामसभा में चर्चा जरूर करें। साथ ही वैसे सभी लड़के-लड़कियां जिन्हें सरकारी योजनाओं के तहत किसी भी प्रकार की सहायता जैसे छात्रवृत्ति, पोशाक, साइकिल वितरण आदि नहीं मिल पा रहा हो तो इस प्रकार के सभी विषयों पर ग्रामसभा में चर्चा की जानी चाहिए। प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी तथा स्कूल के प्रधानाध्यापक को ग्रामसभा में बुला कर इस विषय पर जानकारी और लाभुकों के बारे में विस्तृत जानकारी ली जा सकती है।

महिला उत्पीड़न
गांवों की महिलाओं तथा बच्चियों के उत्पीड़न के मामलों पर ग्रामसभा में परिचर्चा की जानी चाहिए। महिला उत्पीड़न के मामलों पर चर्चा करने के लिए गांव-टोले की सभी महिलाओं को ग्रामसभा में उपस्थित होकर इस विषय पर जानकारी और अधिकारों की समझ देने के लिए जरूर बुलाएं। ग्रामसभा की अध्यक्षता करने वाला व्यक्ति गांव-टोले के महिला जनप्रतिनिधियों को इस चर्चा में अवश्य बुलाएं ताकि पंचायत में महिला उत्पीड़न की स्थिति को जाना जा सके। सभा में प्रखंड विकास पदाधिकारी तथा पुलिस पदाधिकारी को भी बुलाएं। पंचायत में महिलाओं के खिलाफ हुई हिंसा का ब्योरा पंचायत रजिस्टर में लिखा जाना चाहिए। हिंसा के कारण और निवारण पर खुली चर्चा करें। महिला हिंसा पर रोक लगाने के लिए बैठक में इसकी निंदा करें और सार्वजनिक रूप से चेतावनी दें। इन विषयों पर चर्चा के लिए महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाएं।

अंधविश्वास तथा मानव तस्करी
ग्रामसभा अंधविश्वास के मुद्दे पर चर्चा करने के लिए बुलाई जा सकती है। मुखिया अथवा ग्रामसभा की अध्यक्षता करने वाला व्यक्ति पंचायत में अंधविश्वास के मामलों पर गंभीरता से चर्चा करने के लिए आम जनों को बुलाएं। अंधविश्वास की पीड़िता अधिकतर महिलाएं होती हैं इसलिए यह जरूरी है कि महिलाएं इसमें अधिकाधिक भाग लें और अंधविश्वास को रोकने के उपाय बताएं। ग्रामसभा मे विभिन्न सामाजिक कुरीतियों को सत्रों में बांट कर चर्चा कर सकते हैं। इन सत्रों में मानव तस्करी के मामलों पर भी चर्चा करें। महिला तस्करी के मामलों पर मुख्य रूप से ध्यान दें। प्रखंड विकास पदाधिकारी, पुलिस पदाधिकारी अथवा महिला आयोग की सबसे निचले स्तर के पदाधिकारी/सदस्य को ग्रामसभा में बुलाया जा सकता है। इसके अलावा क्षेत्र में काम कर रहे स्वयंसेवी संगठनों के पदाधिकारियों को चर्चा के लिए बुलाया जा सकता है।

स्वास्थ्य सुविधा तथा शुद्ध पेयजल
ग्रामसभा बैठक में स्वास्थ्य सुविधाओं और शुद्ध पेयजल की व्यवस्था पर बातचीत करें। प्रखंड स्वास्थ्य पदाधिकारी, आंगनबाड़ी सेविका, सहिया तथा स्वास्थ्य विभाग के प्रखंड और पंचायत स्तर के कर्मचारियों से स्वास्थ्य योजनाओं के क्रियान्वयन पर जानकारी लें। सही दिशा में काम न होने पर स्पष्टीकरण मांगें। इसी प्रकार गांव में शुद्ध पेयजल उपलब्ध करवाने संबंधी योजनाओं के क्रियान्वयन के संबंध में जानकारी प्रखंड पदाधिकारी से लें। बच्चों में कुपोषण, गर्भवती महिलाओं का टीकाकरण आदि पर चर्चा के लिए बाल विकास परियोजना पदाधिकारी को भी ग्रामसभा में बुलाया जा सकता।

Disqus Comment