महिला मुखिया पथरीली जमीन पर कर रही हैं केले की खेती

Submitted by birendrakrgupta on Sat, 08/16/2014 - 22:50
Source
पंचायतनामा, 11-17 अगस्त 2014

टपक सिंचाई योजना से प्रत्येक पौधे में पाइप के द्वारा पानी पहुंचाया जाता है। संपूर्ण क्षेत्र में पाइप बिछाकर प्वाइंट बनाया जाता है, जहां से पानी आपूर्ति की जाती। टपक सिंचाई योजना में आवश्यकतानुसार ही पानी खर्च कर फसल सिंचित कर सकते हैं।कौन कहता है कि पत्थर पर दूब नहीं उपज सकता। हां, पत्थर पर भी दूब उपज सकता है। बशर्ते उपजाने वालों में कुछ कर दिखाने की तमन्ना व जज्बा हो। ऐसा भी कहा गया है कि हौसला जिसका बुलंद रहता है सफलता उसके कदम चूमती है। यह कर दिखाया है झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के पोटका प्रखंड के राजदोहा गांव की एक महिला ने। यह कोई आम महिला नहीं है, बल्कि डोमजुड़ी पंचायत की मुखिया अनीता मुर्मू हैं। प्रखंड में भी इन्हें तेज-तर्रार व जुझारू मुखिया के रूप में जाना जाता है।

पंचायत के कार्यों से अलग हट कर कृषि के क्षेत्र में भी इनका एक अलग स्थान है। वर्तमान में श्रीमती मुर्मू ने यूरेनियम कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड के नड़वा इकाई के समीप पांच एकड़ क्षेत्र में केले के सैकड़ों पौधे लगाई है, वह भी पथरीली भूमि पर। बंजर भूमि पर गड्ढा कर उसमें अलग से मिट्टी तथा खाद डाल कर केला के पौधे लगाने के कुछ दिनों बाद ही उसमें हरियाली आने लगी है। इस संबंध में अनीता मुर्मू कहती हैं कि हाजीपुर केला के लिए प्रसिद्ध है। परंतु राजदोहा को भी हम केला उत्पादन हब बनाना चाहते हैं, ताकि यहां के कृषकों को लाभ मिलें। दूसरे किसान भी केला की खेती करें। वह समाज को खेती के प्रति प्रेरित करना चाहती हैं।

राजदोहा को केले का हब बनाना चाहती हैं अनीता मुर्मू। बेटे व पति की भी है खेती में रुचि।उन्होंने घाटशिला के रावतारा से प्रति पौधा 20 रुपए की दर से केला का पौधा खरीदी है। इसके लिए उन्होंने टपक सिंचाई योजना अपनाई है। वे बताती हैं कि प्रत्येक पौधे में पाइप के द्वारा पानी पहुंचाया जाएगा। संपूर्ण पांच एकड़ क्षेत्र में पाइप बिछाकर प्वाइंट बनाया गया है, जहां से पानी आपूर्ति की जाएगी। टपक सिंचाई योजना में आवश्यकतानुसार ही पानी खर्च कर फसल सिंचित कर सकते हैं। समीप ही एक निजी तालाब है, जिसका पानी गर्मी के दिनों में भी यथावत रहता है। यानी फसल सिंचाई के लिए इन्हें चिंता नहीं रहती है।

अनीता मुर्मू अपने पूरे परिवार के साथ चिलचिलाती धूप में स्वयं काम करती हैं। गेता और कुदाल उनका सहारा है। श्रीमती मुर्मू को दो लड़के हैं, जिनमें से एक रामी मुर्मू ने गुड़गांव से बी फर्मा कंपलीट किया है तथा दूसरा मेधाराई मुर्मू ऑटोमोबाइल डिप्लोमा आदित्यपुर से कर रहा है। पति शंकर चंद्र मुर्मू सरकारी नौकरी में हैं। पूरा परिवार एक साथ मिल कर खेती का काम करता है। जितनी अभिरुचि खेती में अनीता मुर्मू को है, उतना ही उनके दोनों बेटों को भी है। बेटों के साथ उनके पति की भी खेती में रुचि है। पूरे परिवार को एक साथ मिल कर खेत में काम करने का जज्बा ही बताता है कि कृषि के प्रति उनकी चाहत कितनी है।

श्रीमती मुर्मू को राजदोहा में एक बड़ा-सा कृषि फॉर्म बनाने की योजना है। केला के अलावा आम, अमरूद, लीची, नीबू आदि के लिए भी उन्होंने गड्ढे करा दिए हैं। जल्द ही उसमें फलदार वृक्ष लगा दिए जाएंगे। अनीता मुर्मू को श्रीविधि खेती के लिए जिला से कई बार पुरस्कृत भी किया जा चुका है। विगत वर्ष भी श्रीविधि से धान की खेती के लिए पुरस्कार प्रदान करने हेतु उनके नाम की अनुशंसा की गई थी। इस वर्ष भी दस एकड़ में श्रीविधि से धान की खेती उन्होंने की है। सरकारी स्तर पर कृषकों को दिए जा रहे प्रशिक्षण में इनका नाम प्रथम रहता है। पूर्व में भी इन्होंने कृषि से संबंधित कई तरह के प्रशिक्षण प्राप्त किए हैं।
 

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