वर्ल्ड हैरिटेज लिस्ट में भारत की साइट्स

Submitted by HindiWater on Sun, 08/17/2014 - 14:55
Source
नेशनल दुनिया, 26 जुलाई 2014
दोस्तों, यूनेस्को (यूनाइटेड नेशनल एजुकेशनल, साइंटिफिक एंड कल्चरल ऑर्गनाइजेशन) ने हाल ही में वर्ल्ड हेरिटेज की लिस्ट में भारत की दो साइट्स को शामिल किया है। इनमें कल्चरल साइट्स की कैटेगरी में गुजरात के पाटण स्थित रानी की वाव और नेचुरल साइट्स की कैटेगरी में हिमाचल प्रदेश के कुल्लू स्थित ग्रेट हिमालय नेशनल पार्क शामिल है।

रानी का वाव

रानी की वाव


1. यह गुजरात के पाटण जिले में एक सीढ़ी वाल कुआं है। इसे रानी उदयामती ने अपने पति राजा भीमदेव की याद में वर्ष 1063 में बनवाया था। राजा भीमदेव गुजरात के सोलंकी राजवंश के संस्थापक थे।

2. मेहसाणा जिले से 40 किलोमीटर दूर स्थित पाटण उन दिनों गुजरात की राजधानी हुआ करती थी।

3. भूगर्भीय बदलावों के कारण आने वाली बाढ़ और लुप्त हुई सरस्वती नदी के कारण यह बहुमूल्य धरोहर तकरीबन 700 सालों तक गाद की परतों तले दबी रही। बाद में भारतीय पुरातत्व विभाग ने इसे खोजा।

4. वाव के खंभे सोलंकी वंश और उसके आर्किटेक्चर के नायाब नमूने हैं। वाव की दीवारों और खंभों पर ज्यादातर नक्काशी राम, वामन, महिषासुरमर्दिनी, कल्कि जैसे अवतारों के कई रूपों में भगवान विष्णु को समर्पित हैं।

5. इस वाव में एक छोटा द्वार भी है, जहां से 30 किलोमीटर लंबी सुरंग निकलती है।

6. रानी की वाव ऐसी इकलौती बावड़ी है, जो वर्ल्ड हेरिटेज लिस्ट में शामिल हुई है।

ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क

द ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क


1. हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में स्थित ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क कंजर्वेशन एरिया (एचएनपीसीए) को यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज लिस्ट में नेचुरल कैटेगरी में जगह मिली। इस लिस्ट में यह भारत की एक ही एंट्री थी।

2. हिमाचल में स्थित ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क कुल 754.4 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है।

3. यहां दो वन्यजीव सेंचुरीज हैं।

4. यहां कुछ वर्जिन कोनी फेरस फॉरेस्ट्स हैं। एल्पाइन चरागाह और ग्लेशियर इस पार्क का बड़ा हिस्सा है।

5. यहां मस्कन डीयर, ब्राउन बीयर, गोराल, थार, चीता, बर्फानी चीता, भराल, सीरो, मोनल, कलिज, कोकलास, चीयर, ट्रागोपान, बर्फानी कौआ जैसे जंगली पशु-पक्षी पाए जाते हैं।

6. जीएचएनपीसीए के अलावा भारत की छह नेचुरल साइट्स यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज लिस्ट में पहले से ही शामिल हैं।

Disqus Comment