संकट में समझ व सहमति की विशेषज्ञ पहल

Submitted by HindiWater on Mon, 11/24/2014 - 11:48
Printer Friendly, PDF & Email

भारत नदी सप्ताह 2014


तारीख : 24-27 नवंबर, 2014
स्थान : लोदी रोड, नई दिल्ली


एक नदी को स्वस्थ मानने के मानक वास्तव में क्या होने चाहिए? जब हम कहते हैं कि फलां नदी को पुनजीर्वित करना है, तो भिन्न नदियों के लिए भिन्न कदमों का निर्धारण करने के आधार क्या हों? केन्द्र तथा राज्य स्तरीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों द्वारा नदियों की निर्मलता की जांच को लेकर अपनाए जा रहे परंपरागत मानक पर्याप्त हैं या उनसे इतर भी कुछ सोचे जाने की जरूरत हैं? बांध, बैराज, जल विद्युत परियोजनाएं बनें या न बनें? न बनें, तो क्यों? बनें तो, कैसे बनें? क्या डिजाइन, क्या आकार अथवा मानक हों? मानकों की प्रभावी पालना सुनिश्चित करने के कदम क्या हों?

नदी के लिए आवश्यक प्रवाह का मापदंड क्या हो? जरूरी प्रवाह की दृष्टि से किसकी मांग उचित है: परिस्थितिकीय पर्यावरणीय अथवा नैसर्गिक? तीनों में भिन्नता क्या है? इनका निर्धारण कैसे हो?

नदी सिर्फ बहता पानी है या कि अपने-आप में एक संपूर्ण पर्यावरणीय प्रणाली? वास्तव में क्या हमारे पास कुछ शब्द या वाक्य ऐसे हैं, जिनमें गढ़ी नदी की परिभाषा, वैज्ञानिकों को भी स्वीकार हो, विधिकों को भी और धर्मगुरुओं को भी?

एक नदी को स्वस्थ मानने के मानक वास्तव में क्या होने चाहिए? जब हम कहते हैं कि फलां नदी को पुनजीर्वित करना है, तो भिन्न नदियों के लिए भिन्न कदमों का निर्धारण करने के आधार क्या हों? केन्द्र तथा राज्य स्तरीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों द्वारा नदियों की निर्मलता की जांच को लेकर अपनाए जा रहे परंपरागत मानक पर्याप्त हैं या उनसे इतर भी कुछ सोचे जाने की जरूरत हैं?

नदियों के विवाद कैसे सुलझें? नदियों की अविरलता और निर्मलता पर गहराते संकट के संकट का समाधान कैसे निकले? नदी जोड़ - कितना उचित, कितना अनुचित?

ये तमाम ऐसे सवाल हैं, जिन पर सार्वजनिक समझ व सहमति कायम करने की जरूरत काफी समय से महसूस की जाती है। ऐसा न होने की कारण ही, इन मसलों पर विविध राय पेश होती रही है। नदियों को लेकर कोई चार्टर न होने के कारण, सरकारों और नदी प्रेमियों के बीच समय-समय पर अंतर्विरोध उभरते रहे हैं। जिसका खामियाजा परियोजना, समाज और सरकार के अलावा स्वयं भारत की नदियां भी भुगत रही हैं।

जरूरी है कि ऐसे विवादित पहलुओं को लेकर भारत के नदी समाज, अध्ययनकर्ताओं, कार्यकर्ताओं और सरकार के बीच एक सहमति बने। इस दिशा में एक गंभीर पहल के उद्देश्य से 24 नवंबर, 2014 कोे भारत नदी सप्ताह-2014 का आगाज होगा। यह आयोजन 27 नवंबर तक चलेगा।

नई दिल्ली में आयोजित होने वाले एक चार दिवसीय आयोजन का मूल विषय वाक्य है - ‘संकट में नदियां’। आयोजन, विश्व डब्लयू डब्लयू एफ-इंडिया के परिसर में होगा। पता है: 172-बी, लोदी इस्टेट, नई दिल्ली - 110003

संप्रग सरकार में पर्यावरण मंत्री रह चुके श्री जयराम रमेश जी की उपस्थिति में उद्घाटन सत्र और भारत सरकार की वर्तमान जलसंसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्री सुश्री उमा भारती जी की उपस्थिति में होगा। इस आयोजन में सर्वश्री रामास्वामी अयय्र, अनुपम मिश्र, दिनेश मिश्र, रवि चोपड़ा, परितोष त्यागी, हिमांशु ठक्कर, रित्विक दत्ता, सुधीरेन्द्र शर्मा, श्रीपाद धर्माधिकारी, रवि अग्रवाल, पांडुरंग हेगड़े, विक्रम सोनी और समर सिंह जैसे ख्यातिनाम विशेषज्ञ और सर्वश्री बाबा बलबीर सिंह सींचवाल और राजेन्द्र सिंह जैसे ख्यातिनाम कार्यकर्ता को एक साथ देखने का मौका भी होगा।

यह आयोजन एक तरह से नदी मंथन की कवायद है। इस आयोजन की विशेषता यह है कि इसका प्रत्येक सत्र विशेषज्ञ उद्बोधन से शुरू होकर समूह चर्चा से गुजरता हुआ निष्कर्ष पर संपन्न होगा। चर्चा में सुविधा की दृष्टि से पहले से तय 113 आगुंतकों को कावेरी, नर्मदा, ब्रह्मपुत्र और सतलुज नामक चार समूहों में रखा गया है। कार्यक्रम में दो संस्थाओं और एक व्यक्ति को नदी संबंधी उल्लेखनीय कार्य के लिए भागीरथ सम्मान से नवाजा जाएगा।

सर्वश्री मनोज मिश्र, हिमांशु ठक्कर, मनु भटनागर, रवि अग्रवाल और सुरेश बाबू आयोजन समिति के सदस्य हैं। कार्यक्रम जानकारी व संपर्क के लिए कृपया संलग्नक देखें।

अधिक जानकारी के लिए अटैचमेंट देखें।

Add new comment

This question is for testing whether or not you are a human visitor and to prevent automated spam submissions.

1 + 4 =
Solve this simple math problem and enter the result. E.g. for 1+3, enter 4.

More From Author

Related Articles (Topic wise)

Related Articles (District wise)

About the author

अरुण तिवारीअरुण तिवारी

शिक्षा:


स्नातक, पत्रकारिता एवं जनसंपर्क में स्नातकोत्तर डिप्लोमा

कार्यवृत


श्रव्य माध्यम-

Latest