प्रभावित क्षेत्रों में काम करना किसी चुनौती से कम नहीं : उपराष्ट्रपति

Submitted by birendrakrgupta on Tue, 12/09/2014 - 15:51
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चरखा फीचर्स,
.उपराष्ट्रपति मो. हामिद अंसारी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख जैसे दूर-दराज़ क्षेत्रों और झारखण्ड तथा छत्तीसगढ़ जैसे नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में काम करना किसी चुनौती से कम नहीं है, ऐसी चुनौती को स्वीकार कर चरखा का कार्य सराहनीय है।

श्री अंसारी रविवार को नई दिल्ली स्थित इण्डिया इण्टरनेशनल सेण्टर में आयोजित चरखा विकास संचार नेटवर्क के 20वें स्थापना दिवस समारोह को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि चरखा संस्थापक स्व. संजोय घोष और संगठन के सदस्यों द्वारा विवादित और दूर-दराज़ तथा पिछड़ेे क्षेत्रों में रहने वालों विशेष तौर पर गरीबों और ज़रूरतमंदों की सेवा उल्लेखनीय पहल है। उन्होंने चरखा और इससे जुड़े सभी सदस्यों को उनके सराहनीय कार्य के लिए बधाई दी और आने वाले दशकों में भावी प्रयासों की सफलता की कामना भी की।

इस अवसर पर चरखा अध्यक्ष सुमिता घोष ने उपराष्ट्रपति मो. हामिद अंसारी को चरखा का प्रतीक चिन्ह भेंट किया। इससे पूर्व चरखा की सहयोगी रही वरिष्ठ पत्रकार और लेखक उषा राय की अध्यक्षता में एक परिचर्चा आयोजित की गई जिसमे चरखा के 20 वर्षों के सफर और चुनौतियों पर चर्चा की गई।

इस परिचर्चा में चरखा अध्यक्ष सुमिता घोष, हेल्पेज इण्डिया के महानिदेशक और स्व. संजोय घोष के कॉलेज मित्र मैथ्यू चेरियन तथा संस्था की मुख्य कार्यकारी अधिकारी सुश्री अंशु मेशक ने भाग लिया। समारोह में जम्मू स्थित पुंछ, बिहार, झारखण्ड, असम और लद्दाख से आये चरखा प्रतिभागियों के अलावा बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे।

ज्ञात हो कि जमीनी स्तर से जुड़े एक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में कार्य करने वाले संजोय घोष ने 1994 में एक गैर-सरकारी संस्था के रूप में चरखा की स्थापना की थी। जिसका मूल उद्देश्य समाज के गरीब और वंचित वर्गों तक विकास का समुचित लाभ पहुंचाना है। वहीं समाचारपत्रों के माध्यम से उनकी आवाज को नीति-निर्धारकों तक पहुंचाना विशेष रूप से शामिल है।

वर्तमान समय में चरखा लेखकों के आलेख हिंदी, उर्दू तथा अंग्रेजी में प्रकाशित होने वाले देश के तकरीबन सभी राष्ट्रीय और क्षेत्रीय समाचारपत्रों तथा पत्रिकाओं में प्रकाशित किये जा रहे हैं। 1997 में असम के चरमपंथी गुट उल्फा ने संजोय घोष की हत्या कर दी थी।

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