भारत जल सप्ताह 2015 का उद्घाटन

Submitted by HindiWater on Thu, 01/15/2015 - 12:22
पाँच दिवसीय जल सप्ताह की थीम है 'सतत् विकास के लिए जल प्रबंधन।' भारत जल सप्ताह में ऑस्ट्रेलिया इस कार्यक्रम का भागीदार देश है और इस प्रदर्शनी में 30 ऑस्ट्रेलियाई कम्पनियाँ जल संसाधन के क्षेत्र में अपनी तकनीकी दक्षता दर्शा रही हैं। महाराष्ट्र इससे एक भागीदार राज्य के तौर पर जुड़ा हुआ है। इस प्रदर्शनी में विभिन्न तकनीकों, कृषि और सिंचाई क्षेत्र में सतत् विकास के लिए जल प्रबंधन के उपलब्‍ध उपायों और हालिया विकास, ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति, औद्योगिक जल के उपयोग के बारे में दर्शाया गया है।केन्द्रीय जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण मन्त्री सुश्री उमा भारती ने कहा है कि आम जनता की भागीदारी एवं सूचनाओं की साझेदारी के लिहाज से जल संसाधन प्रबन्धन का सबसे महत्वपूर्ण पहलू सम्बन्धित आँकड़ों को सार्वजनिक करना है, क्योंकि इससे पारदर्शिता एवं जागरूकता बढ़ती है। भारत जल सप्ताह 2015 का उद्घाटन करते हुए उन्होंने कहा, 'इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए केन्द्रीय जल आयोग ने इसरो के राष्ट्रीय दूर संवेदी केन्द्र के सहयोग से आंकड़ों के सृजन की परियोजना लांच की है।'

मन्त्री ने कहा कि विश्व की आबादी का 18 फीसदी से ज्यादा भारत में निवास करता है, लेकिन विश्व के नवीकरणीय जल संसाधन का महज 4 फीसदी ही हमारे देश में है। यही नहीं, जल के असमान वितरण के कारण उपयोग योग्य जल की मात्रा और भी ज्यादा सीमित नजर आती है। उन्होंने कहा, 'बढ़ती आबादी और तेजी से विकसित हो रहे राष्ट्र की बढ़ती जरूरतों के साथ-साथ जलवायु परिवर्तन के असर के कारण उपयोग योग्य जल की उपलब्धता पर दबाव और बढ़ जाने का अन्देशा है। इस्तेमालकर्ताओं के विभिन्न वर्गों के बीच गहराते जल विवादों के चलते भी इन आशंकाओं को बल मिल रहा है।'

सुश्री भारती ने कहा कि हमारे देश में स्थित नदी बेसिनों में उपलब्ध जल की मात्रा में व्यापक अन्तर देखने को मिलता है। जहाँ एक ओर गंगा एवं ब्रह्मपुत्र नदी बेसिनों में जल की भरमार है, वहीं दूसरी ओर प्रायद्वीपीय भारत के बेसिनों में जल की भारी किल्लत देखने को मिलती है। इनमें से ज्यादातर पूर्ण विकास के स्तर को पहले ही छू चुके हैं। उन्होंने कहा कि इन्हीं तथ्यों को ध्यान में रखते हुए अधिक जल वाले बेसिनों से कम जल वाले बेसिनों में जल के हस्तान्तरण के लिए अन्तर बेसिन जल हस्तान्तरण कार्यक्रम की परिकल्पना की गई है, जिसे नदियों को आपस में जोड़ने की योजना के रूप में भी जाना जाता है। उन्होंने कहा, 'यह कार्यक्रम प्रणाली में मजबूती बनाए रखने एवं देश की जरूरतों के हिसाब से एक विशाल भण्डारण क्षमता हासिल करने के लिए अपेक्षाकृत बड़े जलाशयों के निर्माण पर आधारित है। हम इस कार्यक्रम के क्रियान्वयन के लिए सभी के फायदे वाली रणनीति अपनाएंगे।'

केन्द्रीय जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण राज्य मन्त्री श्री सांवर लाल जाट ने अपने संबोधन में कहा कि बढ़ती आबादी से जल की उपलब्धता पर दबाव और ज्यादा बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि सिंचाई के लिए हमें नई तकनीक अपनानी पड़ेगी जो जल के कम उपयोग पर आधारित होगी। मन्त्री ने कहा कि नदियों को आपस में जोड़ने से अतिरिक्त जल वाले क्षेत्रों से किल्लत वाले क्षेत्रों में जल का प्रवाह सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

केन्द्रीय कृषि मन्त्री श्री राधा मोहन सिंह, केन्द्रीय शहरी विकास मन्त्री श्री एम. वेंकैया नायडू और केन्द्रीय पर्यावरण एवं वन मन्त्री श्री प्रकाश जावड़ेकर ने भी इस बैठक को संबोधित किया।

पाँच दिवसीय जल सप्ताह की थीम है 'सतत् विकास के लिए जल प्रबंधन।' भारत जल सप्ताह में ऑस्ट्रेलिया इस कार्यक्रम का भागीदार देश है और इस प्रदर्शनी में 30 ऑस्ट्रेलियाई कम्पनियाँ जल संसाधन के क्षेत्र में अपनी तकनीकी दक्षता दर्शा रही हैं। महाराष्ट्र इससे एक भागीदार राज्य के तौर पर जुड़ा हुआ है।

कृषि, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन, शहरी विकास, ग्रामीण विकास, पेयजल और स्वच्छता, बिजली जैसे प्रमुख मन्त्रालयों एवं नीति आयोग के सहयोग से इस कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इसके अलावा अनेक अन्तरराष्ट्रीय संगठनों की ओर से भी इसमें सहयोग मिल रहा है।

भारत जल सप्‍ताह-2015 के दौरान देश के हर जिले में 'हमारा जल- हमारा जीवन' पहल को भी मनाया जाएगा। इसका उद्देश्‍य वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, जल समुदायों, गैर सरकारी संगठनों इत्‍यादि को इस पहल से जोड़ना है।

इस कार्यक्रम के तहत् केन्‍द्रीय जल संसाधन, नदी विकास तथा गंगा पुनरूद्धार मन्त्री सुश्री उमा भारती ने नई दिल्ली स्थित प्रगति मैदान में भारत जल सप्ताह प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। यह प्रदर्शनी 17 जनवरी, 2015 तक चलेगी।

इस प्रदर्शनी में विभिन्न तकनीकों, कृषि और सिंचाई क्षेत्र में सतत् विकास के लिए जल प्रबंधन के उपलब्‍ध उपायों और हालिया विकास, ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति, औद्योगिक जल के उपयोग के बारे में दर्शाया गया है। इस प्रदर्शनी से प्रदर्शकों को विभिन्न देशों के जल संसाधन क्षेत्र से जुड़े पेशेवरों तक व उत्‍पाद और सेवाएँ पहुँचाने के लिए एक प्रकार से नेटवर्किंग के अवसर उपलब्‍ध होंगे। प्रदर्शकों को इस क्षेत्र में अपना नेटवर्क बढ़ाने के अवसर भी मिलेंगे जिससे वे नए संयुक्‍त उद्यम ढूँढ पाएँगे और इस उभरते हुए एवं तकनीकी रूप से महत्‍वपूर्ण क्षेत्र के बढ़ते व्‍यवसाय का लाभ उठा सकेंगे। व्‍यवसायिक कम्पनियों को हजारों सम्भावित ग्राहकों, नीतिगत निर्माताओं सहित उच्‍च शिक्षित आगन्तुकों के साथ सीधे सम्पर्क करने का अवसर मिलेगा जिससे वे नए संयुक्‍त उद्यम तलाश सकेंगे और भारत के तेजी से वृद्धि करते जल बाजार के व्‍यवसाय को बढ़ा सकेंगे।

भारत जल सप्ताह 2015 का उद्घाटनइसके जरिए ब्राण्ड की विजिबिलिटी/छवि बढ़ेगी और प्रदर्शक के बारे में मुफ्त में जानकारी प्रदर्शित की जाएगी तथा कार्यक्रम के वेब पोर्टल पर कम्पनी की वेबसाइट का लिंक उपलब्‍ध कराया जाएगा।

भारत जल सप्‍ताह एक वार्षिक मंच है। इसकी अवधारणा और आयोजन पहली बार 2012 में किया गया था। इससे जल संसाधन मंत्रालय, नदी विकास और गंगा संरक्षण और भारत सरकार उपलब्‍ध जल के बेहतर इस्‍तेमाल, संरक्षण एवं परिरक्षण के लिए संगोष्ठियों, प्रदर्शनियों एवं नियमित सत्रों के माध्‍यम से जनता को जागरूक बनाती है एवं महत्‍वपूर्ण कार्य नीतियों के लिए समर्थन हासिल करती है। 'सतत् विकास के लिए जल प्रबंधन' विषय पर यह तीसरा आयोजन है। दूसरा कार्यक्रम भारत जल सप्‍ताह-2013, नई दिल्ली में 8 से 12 अप्रैल 2013 को आयोजित किया गया था जिसका विषय 'बेहतर जल प्रबंधन, चुनौतियां और अवसर' था।

Disqus Comment

More From Author

Related Articles (Topic wise)

Related Articles (District wise)

About the author

नया ताजा