संगम पर फ्लाई ओवर बना तो सन्त करेंगे आन्दोलन

Submitted by HindiWater on Wed, 01/21/2015 - 13:03
Source
हिन्दुस्तान, 19 जनवरी 2015

‘सरिता समग्र’ सम्मेलन में पहुँची केन्द्रीय मन्त्री उमा भारती, गंगा-यमुना की सहायक नदियों के लिए एकजुटता का आह्वान

इलाहाबाद। संगम पर फ्लाईओवर बनाने की योजना के खिलाफ सन्त सड़क पर उतरकर विरोध करेंगे। यह चेतावनी देते हुए कई सन्तों ने कहा कि प्रधानमन्त्री नरेन्द्र मोदी के ‘नमामी गंगे’ अभियान को फेल करने की साजिशें शुरू हो गई हैं। सपा अध्यक्ष, मुलायम सिंह यादव को कठघरे में खड़ा करते हुए कहा गया कि केन्द्र सरकार को नई जलनीति बनानी चाहिए।

रविवार को मठ मछली बन्दर में ‘सरिता समग्र’ सम्मेलन में ये बातें उठाई गईं। केन्द्रीय मन्त्री उमा भारती मुख्य अतिथि थीं। उन्होंने गंगा सफाई के लिए आश्वस्त किया। संगम पर फ्लाईओवर बनाए जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने उनके सामने कोई प्रोजेक्ट नहीं रखा। जब तक कोई योजना सामने न आए, कोई टिप्पणी नहीं करेंगे पर राज्य सरकार से इतना कह दिया है कि कोई भी योजना बनाएँ तो सन्तों को भरोसे में रखें। इसके पहले गंगा महासभा के महासचिव आचार्य जितेन्द्रानन्द सरस्वती ने चेताया कि संगम पर फ्लाईओवर बनाकर सरकार कुम्भ और माघ में भगदड़ के हालात पैदा करना चाहती है।

500 मीटर तक गंगा में निर्माण न होने का आदेश है, उसके बाद भी जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू हो गई है, सन्त इसका सड़क पर विरोध करेंगे। गंगा सभा हाईकोर्ट में नई याचिका दाखिल करेगी। श्री सरस्वती ने कहा कि पानी का बाजार खड़ा करने की कोशिश हो रही है, इसीलिए सपा के अध्यक्ष मुलायम सिंह पश्चिम यूपी में सिंचाई के नाम पर किसानों को बरगला रहे हैं। माघ मेला में शारदा के पानी से स्नान कराया है। कहा कि गंगा में पानी की कमी उन्नाव में लाशें मिलने के बाद प्रमुख सचिव ने स्वीकार की है। केन्द्रीय मन्त्री ने कहा कि माघ में स्नान के लिए नरोरा से पानी छोड़े जाने के मामले में यूपी सरकार से पूछेंगे।

कार्यक्रम संयोजक पूर्व विधायक विन्ध्यवासिनी कुमार ने मन्त्री के सामने गंगा और यमुना की सहायक नदियों की बात रखी। कहा कि नदियों की जमीन का ऐलान किया जाए और उसके किनारे पर पौधरोपण शुरू हो। नदियों की पढ़ाई पहले की तरह कोर्स में शामिल की जाए। कार्यक्रम की अध्यक्षता शंकराचार्य वासुदेवानन्द सरस्वती ने और संकल्प पाठ शंकराचार्य नरेन्द्रानन्द ने किया। आभार ज्ञापन स्वामी हरि चैतन्य और आचार्य कुशमुनि ने किया। इस मौके पर प्रमुख रूप से दण्डी सन्यासी प्रबन्ध समिति के अध्यक्ष स्वामी विमल देव आश्रम, सांसद केशव प्रसाद मौर्य, लोक भारती के संगठन मन्त्री ब्रजेन्द्र पाल, जल बिरादरी के अरविन्द कुशवाहा, सुचित्रा वर्मा, उदित शुक्ला, गिरधारी भाई, डॉ. चन्द्रशेखर प्राण, शिव बोधन मिश्र, डॉ. उमा सिंह, पूर्व मन्त्री नरेन्द्र सिंह गौर समेत भाजपा के अनेक नेता और पदाधिकारी मौजूद थे।

 

डेढ़ साल में साफ दिखने लगेगी गंगा


गंगा के निर्मलीकरण का पहला असर डेढ़ साल के भीतर दिखेगा। मन्त्री ने कहा कि कन्नौज से कानपुर के बीच गंगा सर्वाधिक प्रदूषित है। अधिकारियों और उद्यमियों की बैठक बुला चुके हैं, दो टूक कह दिया है कि गन्दगी डालना बन्द करें या इण्डस्ट्री बन्द होगी। उन्होंने कहा कि दिल्ली में यमुना में गिर रहे 18 नालों को बन्द करने का काम शुरू हो जाएगा।

उत्तराखण्ड में तीन बाँध बनाकर यमुना में पानी देने की व्यवस्था करेंगे और यमुना-शारदा लिंक पर जल्द काम शुरू हो जाएगा। सुश्री भारती सन्तों के बीच भावुक दिखीं। उन्होंने कहा कि ‘मैं सब कुछ पा चुकी हूँ तिरंगा के लिए मध्य प्रदेश के सीएम कुर्सी छोड़ी थी, कुछ भी परोसी हुई थाली में नहीं मिला... गंगा के लिए काम करने का सौभाग्य मिला है... यह निर्मल नहीं कर पाई तो संगम में प्राण त्याग दूँगी...’ सुश्री भारती ने इसके पहले दक्षिण में भगवान कार्तिकेय के एक मन्दिर में प्राण स्थापना का जिक्र करते हुए कहा कि वह भी गंगा के लिए उसी मार्ग पर चलेंगी और असफल हुई तो प्राणों की आहुति देंगी।

 

 

 

फूल नहीं, नाले बड़ी समस्या


मन्त्री ने कहा कि फूल-माला की गन्दगी गंगा के लिए बड़ी समस्या नहीं। करोड़ों गंगाभक्त खड़े हो गए तो यह खत्म हो जाएगा। नाले और कारखानों की गन्दगी बड़ी समस्या है। गंगा किनारे पूजन सामग्री विसर्जन के लिए ताल बनाएँगे। अन्तिम संस्कार के मसले सन्त समाज पर छोड़ दिए हैं।

 

 

 

 

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